बहराइच उत्तर प्रदेश के बहराइच से सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। बहराइच मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में इलाज के दौरान महिला सिपाही के 35 वर्षीय पति शैलेंद्र शर्मा की मौत हो गई। मौत के बाद उनकी पत्नी और महिला सिपाही रिचा शर्मा ने अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पति की हालत बिगड़ने के बावजूद समय पर प्रभावी उपचार नहीं मिल सका।इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उस आरोप की है, जिसमें महिला सिपाही ने बताया कि वार्ड में एक सफाईकर्मी ने उनके पति को विगो यानी IV कैनुला लगाया था। आरोप है कि यह ठीक से काम नहीं कर रहा था। हालांकि, यह कहना कि सफाईकर्मी द्वारा लगाया गया विगो ही मौत का कारण बना, अभी जांच के बिना साबित नहीं हुआ है। अस्पताल प्रशासन ने भी इलाज में लापरवाही के आरोपों को खारिज किया है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की है।

पेट दर्द और सांस लेने में परेशानी के बाद अस्पताल पहुंची थीं पत्नी
महिला सिपाही रिचा शर्मा रविवार शाम अपने पति शैलेंद्र को लेकर बहराइच मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी पहुंचीं। शैलेंद्र को पेट में तेज दर्द के साथ सांस लेने में परेशानी हो रही थी। डॉक्टरों ने उनकी जांच की और दोनों बांहों में इंजेक्शन लगाने के बाद रक्तचाप की जांच की गई। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया।रिचा शर्मा का कहना है कि पति की हालत गंभीर लग रही थी, इसलिए उन्होंने इमरजेंसी के पास वाले वार्ड में भर्ती करने का अनुरोध किया था। आरोप है कि उन्हें वार्ड नंबर पांच भेज दिया गया।
सफाईकर्मी द्वारा विगो लगाने का आरोप
महिला सिपाही के मुताबिक, वार्ड में पहुंचने के बाद एक सफाईकर्मी ने उनके पति को विगो लगाया। रिचा का आरोप है कि विगो सही तरीके से काम नहीं कर रहा था। पति की हालत बिगड़ने पर उन्होंने स्टाफ नर्स और डॉक्टरों से मदद मांगी।उनका दावा है कि उन्होंने अस्पताल की हेल्पलाइन पर भी संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन तत्काल मदद नहीं मिल सकी। इसके बाद शैलेंद्र की हालत लगातार खराब होती गई और देर रात उनकी मौत हो गई।
अस्पताल प्रशासन ने आरोपों पर क्या कहा?
मामले में अस्पताल प्रशासन का पक्ष भी सामने आया है। मेडिकल कॉलेज के सीएमएस के अनुसार, मरीज को समुचित उपचार दिया गया था और लापरवाही के आरोप सही नहीं हैं। अस्पताल की ओर से यह भी बताया गया कि मरीज को एक समय पर परिजन वार्ड से बाहर ले गए थे और बाद में दोबारा इमरजेंसी में लाया गया।अस्पताल प्रशासन के अनुसार, डॉक्टर ने मरीज की जांच की और गंभीर हालत में सीपीआर भी दिया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। यही वजह है कि मामले में अब अलग-अलग दावों की जांच जरूरी हो गई है।
जांच कमेटी करेगी पूरे मामले की पड़ताल
घटना के बाद बहराइच मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य संजय खत्री ने जांच कमेटी गठित की है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस जांच में यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि मरीज को किस समय कौन-सा उपचार दिया गया, विगो किसने लगाया, वह सही तरीके से काम कर रहा था या नहीं और मरीज की हालत बिगड़ने के बाद चिकित्सकीय सहायता कितनी जल्दी उपलब्ध कराई गई।मरीज की मौत की वास्तविक चिकित्सकीय वजह भी जांच और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी। इसलिए अभी किसी एक व्यक्ति या प्रक्रिया को सीधे मौत के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज उपलब्ध कराने को लेकर लगातार सवाल उठते रहते हैं। हालांकि किसी एक घटना के आधार पर पूरे उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को खराब बताना भी तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा, लेकिन बहराइच की इस घटना ने अस्पतालों में मरीजों की निगरानी, स्टाफ की जिम्मेदारी और आपातकालीन सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े किए हैं।सबसे अहम सवाल यही है कि गंभीर स्थिति वाले मरीज की देखभाल के दौरान जिम्मेदारी किसकी थी और मरीज की हालत बिगड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता किस स्तर पर उपलब्ध कराई गई।
परिवार को जांच से उम्मीद
शैलेंद्र शर्मा की मौत के बाद परिवार में शोक का माहौल है। उनकी पत्नी रिचा शर्मा खुद पुलिस विभाग में कार्यरत हैं। परिवार ने इलाज के दौरान हुई कथित लापरवाही को लेकर सवाल उठाए हैं और पूरे मामले की जांच की मांग की है।अब निगाहें जांच कमेटी की रिपोर्ट पर हैं। जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि अस्पताल में इलाज की प्रक्रिया में कहीं लापरवाही हुई थी या मरीज की गंभीर स्थिति के बावजूद तमाम चिकित्सकीय प्रयासों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।
मौत की वजह पर निष्कर्ष जांच के बाद ही
बहराइच मेडिकल कॉलेज की इस घटना में फिलहाल दो पक्ष सामने हैं। एक ओर महिला सिपाही और परिवार इलाज में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, जबकि अस्पताल प्रशासन इन आरोपों को सही नहीं मान रहा है। ऐसे में निष्पक्ष जांच ही पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकती है।फिलहाल इतना स्पष्ट है कि महिला सिपाही के पति शैलेंद्र शर्मा की मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हुई है और उनकी पत्नी ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सफाईकर्मी द्वारा विगो लगाए जाने का आरोप भी जांच का हिस्सा है, लेकिन उसे सीधे मौत का कारण मानना अभी जल्दबाजी होगी।
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