बांदा में बाढ़ पीड़ितों से कथित वसूली का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। क्षतिग्रस्त मकानों को सरकारी सहायता के लिए पात्र दिखाने के नाम पर कथित रूप से पैसे मांगने के आरोप में महिला लेखपाल संध्या सिंह को निलंबित कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि लेखपाल पर प्राइवेट व्यक्ति के माध्यम से अवैध वसूली कराने के आरोप लगे थे। मामले से जुड़ा वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की।एसडीएम अतर्रा ने शिकायत और सामने आए तथ्यों के आधार पर महिला लेखपाल संध्या सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग में भी हड़कंप मचा हुआ है।
बाढ़ पीड़ितों से पैसे मांगने का आरोप
जानकारी के मुताबिक बांदा में हाल ही में आई बाढ़ के कारण कई इलाकों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बाढ़ के पानी से कई मकानों और घरेलू सामान को नुकसान पहुंचने की शिकायतें सामने आईं। प्रभावित परिवारों को सरकारी स्तर पर राहत और सहायता उपलब्ध कराने के लिए क्षति का आकलन और पात्र लाभार्थियों का सत्यापन कराया जा रहा था।इसी प्रक्रिया के दौरान महिला लेखपाल संध्या सिंह पर गंभीर आरोप लगाए गए। आरोप है कि क्षतिग्रस्त मकानों को सरकारी सहायता के लिए पात्र दिखाने के नाम पर लोगों से कथित तौर पर पैसे की मांग की जा रही थी।पीड़ितों और स्थानीय लोगों की शिकायत के अनुसार, कथित वसूली सीधे न करके एक प्राइवेट व्यक्ति के माध्यम से कराए जाने की बात सामने आई। हालांकि पूरे मामले की विस्तृत जांच के बाद ही आरोपों की पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।

वीडियो वायरल होने के बाद मचा हड़कंप
मामले से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान इस ओर गया। वीडियो में कथित तौर पर बाढ़ प्रभावित लोगों से पैसे लिए जाने से जुड़ी बातचीत या गतिविधि दिखाई देने का दावा किया गया।वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी।इसके बाद एसडीएम अतर्रा ने कार्रवाई करते हुए महिला लेखपाल संध्या सिंह को निलंबित कर दिया।
क्षतिग्रस्त मकानों को पात्र दिखाने के नाम पर वसूली का आरोप
बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए प्रशासन द्वारा क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वे और सत्यापन कराया जाता है। इसी प्रक्रिया में पात्र परिवारों की सूची तैयार की जाती है, जिसके आधार पर उन्हें निर्धारित सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।आरोप है कि इसी प्रक्रिया का फायदा उठाकर कुछ लोगों से पैसे की मांग की गई। शिकायत के अनुसार, क्षतिग्रस्त मकान को पात्र दिखाने या राहत के लिए नाम शामिल कराने के नाम पर कथित तौर पर वसूली की जा रही थी।बाढ़ जैसी आपदा के समय प्रभावित परिवार पहले से ही आर्थिक और मानसिक परेशानियों से जूझ रहे होते हैं। ऐसे में सरकारी सहायता दिलाने के नाम पर पैसे मांगने की शिकायत को प्रशासन ने गंभीरता से लिया।
प्राइवेट व्यक्ति के जरिए अवैध उगाही का आरोप
महिला लेखपाल पर यह भी आरोप लगाया गया कि कथित वसूली के लिए एक प्राइवेट व्यक्ति का सहारा लिया जा रहा था। स्थानीय स्तर पर सामने आई शिकायतों के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति कथित तौर पर लोगों से संपर्क कर पैसे की मांग करता था।हालांकि इस संबंध में सामने आए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन द्वारा लेखपाल को निलंबित किए जाने के बाद अब मामले की जांच में यह भी देखा जा सकता है कि कथित वसूली में और कौन-कौन लोग शामिल थे और पैसे मांगने के पीछे क्या पूरा नेटवर्क था।
एसडीएम अतर्रा ने की कार्रवाई
वीडियो वायरल होने और शिकायतों के बाद एसडीएम अतर्रा ने मामले को गंभीरता से लिया। प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए महिला लेखपाल संध्या सिंह को निलंबित कर दिया गया।प्रशासन की इस कार्रवाई से यह संदेश भी गया है कि सरकारी राहत योजनाओं में किसी तरह की अनियमितता या लाभार्थियों से अवैध वसूली की शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।निलंबन की कार्रवाई के बाद अब पूरे मामले की जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी। जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ आगे भी विभागीय या कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
बाढ़ पीड़ितों के बीच कार्रवाई की चर्चा
महिला लेखपाल के निलंबन की खबर सामने आने के बाद बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में इसकी चर्चा तेज हो गई। स्थानीय लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई का स्वागत किया और कहा कि आपदा के समय पीड़ित परिवारों को राहत देने के बजाय उनसे पैसे की मांग किया जाना गंभीर मामला है।लोगों की मांग है कि बाढ़ से हुए नुकसान का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए और वास्तविक पात्र परिवारों को बिना किसी परेशानी के सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाए। साथ ही राहत वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
सरकारी सहायता में पारदर्शिता पर जोर
बाढ़ या किसी अन्य प्राकृतिक आपदा के बाद प्रभावित लोगों को सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसमें राजस्व विभाग के कर्मचारियों की भूमिका भी अहम रहती है। ऐसे में यदि सर्वे या सत्यापन के दौरान किसी तरह की वसूली की शिकायत सामने आती है तो उससे पूरी राहत व्यवस्था पर सवाल खड़े हो सकते हैं।बांदा में महिला लेखपाल के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद प्रशासन के सामने अब यह चुनौती भी है कि बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत और मुआवजे की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो।फिलहाल संध्या सिंह के निलंबन के बाद मामले की आगे की जांच और कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। प्रशासन की ओर से जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे कदम उठाए जाने की उम्मीद है।बांदा में बाढ़ पीड़ितों से कथित वसूली का मामला सामने आने के बाद महिला लेखपाल का निलंबन प्रशासन की सख्ती को दर्शाता है। वीडियो वायरल होने के बाद हुई इस कार्रवाई ने राहत वितरण में पारदर्शिता और सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है।
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