E20 Petrol पर बड़ा खुलासा! वैज्ञानिक परीक्षणों में पूरी तरह सुरक्षित, पुराने वाहनों को लेकर भी दूर हुआ सबसे बड़ा डर

Editorial
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देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच शनिवार को उद्योग जगत के दिग्गजों ने एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा दावा किया। ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र के शीर्ष विशेषज्ञों ने कहा कि E20 पेट्रोल किसी जल्दबाजी में लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि वर्षों के वैज्ञानिक परीक्षण, रिसर्च और चरणबद्ध तैयारियों के बाद इसे देशभर में लागू किया गया है। विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि E20 केवल नए वाहनों के लिए ही नहीं, बल्कि पहले से सड़क पर चल रहे अधिकांश वाहनों के लिए भी सुरक्षित है।हाल के दिनों में सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं। कुछ लोगों का कहना था कि इससे इंजन को नुकसान हो सकता है, माइलेज कम हो सकता है या पुराने वाहनों के पार्ट्स जल्दी खराब हो सकते हैं। इन सभी सवालों पर उद्योग विशेषज्ञों ने विस्तार से जवाब देते हुए कहा कि उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़े और परीक्षण इन दावों का समर्थन नहीं करते।

‘E20 कोई प्रयोग नहीं, वर्षों की वैज्ञानिक तैयारी का परिणाम’

पूर्व Engineers India Limited (EIL) की चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक वर्तिका शुक्ला ने कहा कि E20 कार्यक्रम को किसी प्रयोग की तरह लागू नहीं किया गया। उनके अनुसार, भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण की शुरुआत कई वर्ष पहले हुई थी और इसे धीरे-धीरे बढ़ाया गया।उन्होंने बताया कि 2013-14 में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण लगभग 1.5 प्रतिशत था, जिसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाते हुए दिसंबर 2025 तक 20 प्रतिशत तक पहुंचाया गया। खास बात यह रही कि सरकार ने निर्धारित लक्ष्य को तय समय से करीब पांच वर्ष पहले ही हासिल कर लिया।वर्तिका शुक्ला ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी मूल्यांकन और विभिन्न विशेषज्ञ संस्थानों की सलाह को प्राथमिकता दी गई। इसलिए इसे अचानक लिया गया फैसला कहना सही नहीं होगा।

ARAI, SIAM और वाहन कंपनियों ने किए व्यापक परीक्षण

विशेषज्ञों ने बताया कि E20 कार्यक्रम को लागू करने से पहले देश की प्रमुख परीक्षण एजेंसियों और ऑटोमोबाइल कंपनियों ने व्यापक स्तर पर परीक्षण किए।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे—

  • ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI)
  • सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM)
  • देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां
  • ईंधन गुणवत्ता से जुड़ी तकनीकी एजेंसियां

विशेषज्ञों के मुताबिक, परीक्षण केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में भी वाहनों के प्रदर्शन, इंजन की क्षमता, ईंधन प्रणाली और पुर्जों की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया गया।

विदेशों के अनुभवों से भी ली गई सीख

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि भारत ने E20 नीति तैयार करते समय केवल घरेलू परीक्षणों पर भरोसा नहीं किया, बल्कि अमेरिका, ब्राजील, कनाडा और जर्मनी जैसे देशों के अनुभवों का भी अध्ययन किया।इन देशों में लंबे समय से इथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनुभवों और भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही देश में E20 कार्यक्रम को लागू किया गया।

Toyota का दावा- उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले होती है कड़ी जांच

Toyota Kirloskar Motor के कंट्री हेड एवं एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट अफेयर्स एंड गवर्नेंस) विक्रम गुलाटी ने कहा कि भारत में कोई भी वाहन या ईंधन बिना कड़े परीक्षण और प्रमाणन प्रक्रिया के बाजार में नहीं आता।उन्होंने कहा कि वाहन कंपनियां डिजाइन स्तर से लेकर अंतिम उत्पादन तक कई चरणों में परीक्षण करती हैं। इसके बाद स्वतंत्र तकनीकी एजेंसियां भी उनकी जांच करती हैं।विक्रम गुलाटी के मुताबिक, इथेनॉल एक उच्च गुणवत्ता वाला ईंधन है, जो बेहतर दहन क्षमता के साथ कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद करता है। उन्होंने यह भी कहा कि इथेनॉल कृषि आधारित स्रोतों से तैयार होता है, जिससे ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने में सहायता मिलती है।

Maruti Suzuki ने पुराने वाहनों को लेकर दूर की चिंता

E20 पेट्रोल को लेकर सबसे बड़ा सवाल पुराने वाहनों को लेकर उठ रहा था। इस पर Maruti Suzuki India के कॉरपोरेट अफेयर्स सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।उन्होंने कहा कि कंपनी ने E10 ईंधन के लिए डिजाइन किए गए वाहनों पर भी E20 पेट्रोल का विस्तृत परीक्षण किया।

उनके अनुसार—

  • इंजन में असामान्य घिसाव नहीं मिला।
  • किसी प्रकार की अतिरिक्त जंग (Corrosion) नहीं देखी गई।
  • ईंधन प्रणाली पर कोई गंभीर नकारात्मक प्रभाव सामने नहीं आया।
  • पुर्जों की उम्र पर भी कोई असामान्य असर दर्ज नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि वाहन निर्माण के दौरान पहले से ही पर्याप्त सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखा जाता है, इसलिए अधिकांश वाहनों में E20 के कारण किसी बड़ी तकनीकी समस्या की आशंका नहीं है।

Hero MotoCorp ने करोड़ों सर्विस रिकॉर्ड का दिया हवाला

दोपहिया वाहनों को लेकर भी कई तरह की आशंकाएं सामने आ रही थीं। इस पर Hero MotoCorp के मुख्य व्यवसाय अधिकारी आशुतोष वर्मा ने कहा कि कंपनी ने केवल लैब परीक्षण ही नहीं, बल्कि करोड़ों सर्विस रिकॉर्ड का भी विश्लेषण किया।उन्होंने बताया कि उपलब्ध आंकड़ों में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने वाले वाहनों में पहले की तुलना में अधिक नुकसान हुआ हो।उनके अनुसार, सर्विस डेटा भी इस बात की पुष्टि करता है कि सामान्य परिस्थितियों में E20 पेट्रोल सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों अहम है E20?

विशेषज्ञों ने कहा कि E20 कार्यक्रम का उद्देश्य केवल नया ईंधन उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना भी है।भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। वैश्विक स्तर पर युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।ऐसे में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ने से कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, कृषि आधारित इथेनॉल उत्पादन से किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई।

कार्बन उत्सर्जन घटाने का भी दावा

विशेषज्ञों का कहना है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में कार्बन उत्सर्जन कम करने में सहायक हो सकता है। इसी कारण दुनिया के कई देश वैकल्पिक और कम प्रदूषण वाले ईंधनों को बढ़ावा दे रहे हैं।हालांकि पर्यावरणीय लाभ वास्तविक परिस्थितियों, वाहन तकनीक और ईंधन की गुणवत्ता जैसे कई कारकों पर भी निर्भर करते हैं।

विशेषज्ञों का सामूहिक संदेश

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में उद्योग विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि E20 पेट्रोल को लेकर फैलाई जा रही कई आशंकाएं उपलब्ध वैज्ञानिक परीक्षणों से मेल नहीं खातीं। उनके अनुसार, यह ईंधन वर्षों के शोध, परीक्षण और गुणवत्ता मानकों के आधार पर तैयार किया गया है।विशेषज्ञों ने भरोसा जताया कि E20 न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने और भविष्य की टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि वाहन मालिकों को अपने निर्माता की आधिकारिक सलाह और वाहन के अनुरूप ईंधन संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।

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