
नीट यूजी 2026 पेपर लीक विवाद और परीक्षा रद्द किए जाने के बाद चौतरफा घिरी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने सुप्रीम कोर्ट में एक बड़ा हलफनामा दाखिल कर परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह बदलने का दावा किया है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) की याचिकाओं पर जवाब देते हुए एनटीए ने कोर्ट को बताया कि एजेंसी के भीतर बड़े पैमाने पर संरचनात्मक और सुरक्षा सुधार लागू किए जा चुके हैं। इस बड़े पुनर्गठन के तहत एनटीए में डायरेक्टर और जॉइंट डायरेक्टर स्तर के 16 नए वरिष्ठ पद सृजित किए गए हैं। इसके साथ ही दो जॉइंट सेक्रेटरी स्तर के अधिकारियों को अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के पद पर तैनात किया गया है, जिनमें से एक तकनीकी संचालन और दूसरे परीक्षा की अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालेंगे। इससे पहले मार्च 2026 में ही एक सचिव स्तर के अधिकारी को एनटीए का नया महानिदेशक नियुक्त किया जा चुका है।सुप्रीम कोर्ट को सौंपे गए दस्तावेज के मुताबिक, आगामी परीक्षाओं को फुलप्रूफ बनाने के लिए 17 अप्रैल 2026 को हाई-पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी (HPSC) की एक बेहद अहम बैठक हुई थी। इस बैठक में परीक्षा से पहले, परीक्षा के दौरान और उसके बाद के लिए कई कड़े सुरक्षा उपायों की सिफारिश की गई थी। अब देश के सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी सिस्टम की जांच अनिवार्य कर दी गई है और उसकी फुटेज को कम से कम 90 दिनों तक सुरक्षित रखना होगा। इतना ही नहीं, किसी भी अप्रत्याशित गड़बड़ी को रोकने के लिए परीक्षा से ठीक एक सप्ताह पहले सभी केंद्रों का विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा और परीक्षा खत्म होने के बाद सीसीटीवी फुटेज का फॉरेंसिक विश्लेषण भी कराया जाएगा, ताकि लाइव परीक्षा के दौरान छूट गई किसी भी संदिग्ध गतिविधि या धांधली को बाद में पकड़ा जा सके। इसके अलावा केंद्रों पर मॉक ड्रिल, पावर बैकअप की जांच और मौसम की आपात स्थितियों से निपटने के लिए अलग से कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं।

एनटीए ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा के मोड को बदलने का भी एक बड़ा संकेत दिया है। हलफनामे में साफ कहा गया है कि नीट यूजी 2026 परीक्षा संपन्न होने के बाद हाई-पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ एक समीक्षा बैठक करेगी। इस बैठक में इस बात पर अंतिम मुहर लग सकती है कि भविष्य में नीट की परीक्षा को मौजूदा पेन-एंड-पेपर मोड से हटाकर पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) मोड में शिफ्ट किया जाए या नहीं। एनटीए को और अधिक पेशेवर और पारदर्शी बनाने के लिए इस बार आईआईटी, यूजीसी, सीबीएसई, केवीएस और इग्नू जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के शीर्ष विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है, जो पूरी परीक्षा संचालन प्रणाली की निगरानी कर रहे हैं।जमीनी स्तर पर सुरक्षा और निगरानी को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए एनटीए ने पूरे देश में स्टेट लेवल कोऑर्डिनेशन कमेटी (SLCC) और डिस्ट्रिक्ट लेवल कोऑर्डिनेशन कमेटी (DLCC) का एक बड़ा जाल बिछाया है। 3 मई 2026 को आयोजित हुई नीट यूजी परीक्षा तक देशभर में 18 राज्य स्तरीय और 621 जिला स्तरीय समितियां पूरी तरह सक्रिय हो चुकी थीं। इन हाई-टेक समितियों में केवल एनटीए के लोग ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस बल, खुफिया एजेंसियों और नेशनल इन्फॉरमैटिक्स सेंटर (NIC) के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है, ताकि पल-पल की रिपोर्टिंग और तगड़ा समन्वय सुनिश्चित किया जा सके। पेपर लीक के दाग को धोने के लिए एनटीए द्वारा उठाए गए इन कड़े और बड़े कदमों के बाद अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जहां इस मामले में जल्द ही एक निर्णायक सुनवाई होने की उम्मीद है।
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