डिजिटल लत पर ब्रिटेन का सबसे बड़ा वार! रात 12 बजे के बाद किशोरों के सोशल मीडिया अकाउंट होंगे लॉक

Editorial
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लंदन डिजिटल युग में सोशल मीडिया की बढ़ती लत और उसके किशोरों पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए ब्रिटेन सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी कर ली है। सरकार ने 16 और 17 वर्ष के किशोरों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने के लिए ‘मिडनाइट सोशल मीडिया कर्फ्यू’ लागू करने की योजना बनाई है। प्रस्तावित नियमों के तहत किशोरों के सोशल मीडिया अकाउंट रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक स्वतः बंद हो जाएंगे। इस दौरान वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।ब्रिटिश सरकार का मानना है कि देर रात तक सोशल मीडिया का उपयोग बच्चों की मानसिक सेहत, पढ़ाई, नींद और व्यवहार पर गंभीर असर डाल रहा है। इसी कारण सरकार डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में लगातार सख्त कदम उठा रही है।

क्या है ‘मिडनाइट सोशल मीडिया कर्फ्यू’?

नई योजना के अनुसार 16 और 17 वर्ष के किशोरों के सोशल मीडिया अकाउंट्स में डिफॉल्ट रूप से एक विशेष सुरक्षा सेटिंग लागू होगी। इसके तहत हर दिन रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक उनका अकाउंट स्वतः लॉक मोड में चला जाएगा।इस दौरान वे इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर), स्नैपचैट, टिकटॉक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं कर पाएंगे।सरकार का उद्देश्य किशोरों को देर रात मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर रखना है, ताकि वे पर्याप्त नींद ले सकें और मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकें।

डिफॉल्ट सेटिंग होगी, लेकिन विकल्प भी मिलेगा

सरकार ने प्रस्तावित नियमों में एक लचीलापन भी रखा है। यदि 16 या 17 वर्ष का किशोर चाहे, तो वह इस डिफॉल्ट नाइट कर्फ्यू सेटिंग को बंद कर सकता है और वयस्कों की तरह सोशल मीडिया का उपयोग जारी रख सकता है।हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश उपयोगकर्ता डिफॉल्ट सेटिंग्स में बदलाव नहीं करते। ऐसे में यह व्यवस्था बड़ी संख्या में किशोरों के रात के सोशल मीडिया उपयोग को सीमित कर सकती है।

16 साल से कम उम्र के बच्चों पर पहले ही लग चुका है प्रतिबंध

यह प्रस्ताव ब्रिटेन सरकार की डिजिटल सुरक्षा नीति का दूसरा चरण माना जा रहा है।सरकार इससे पहले घोषणा कर चुकी है कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर और भी कड़े नियम लागू किए जाएंगे। यह नई नीति मार्च 2027 से प्रभावी होने की योजना है।उस नीति का उद्देश्य कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव, ऑनलाइन शोषण, साइबर बुलिंग और हानिकारक कंटेंट से बचाना है।अब 16 और 17 वर्ष के किशोरों के लिए नाइट कर्फ्यू लागू करने का प्रस्ताव उसी नीति का विस्तार माना जा रहा है।

सरकार ने यह कदम क्यों उठाया?

ब्रिटिश सरकार के अनुसार कई शोध बताते हैं कि किशोर देर रात तक सोशल मीडिया चलाने के कारण पर्याप्त नींद नहीं ले पाते। इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई, मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता और शारीरिक विकास पर पड़ता है।विशेषज्ञों का कहना है कि देर रात तक मोबाइल स्क्रीन देखने से—

  • नींद की गुणवत्ता खराब होती है।
  • तनाव और चिंता बढ़ती है।
  • अवसाद (डिप्रेशन) का खतरा बढ़ सकता है।
  • पढ़ाई में ध्यान कम लगता है।
  • बच्चों की सामाजिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।
  • डिजिटल लत (Digital Addiction) बढ़ती है।

इन्हीं समस्याओं को देखते हुए सरकार सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी भी तय करना चाहती है।

सोशल मीडिया कंपनियों पर भी बढ़ेगा दबाव

नई नीति लागू होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अपने सिस्टम में ऐसे तकनीकी बदलाव करने होंगे, जिससे निर्धारित समय के दौरान किशोरों के अकाउंट स्वतः बंद हो जाएं।सरकार चाहती है कि टेक कंपनियां केवल मुनाफे पर ध्यान न दें, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य की जिम्मेदारी भी निभाएं।

दुनिया भर में बढ़ रही डिजिटल सुरक्षा की चिंता

ब्रिटेन अकेला ऐसा देश नहीं है जो बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठा रहा है।दुनिया के कई देशों में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर नए कानून बनाए जा रहे हैं। कई सरकारें सोशल मीडिया कंपनियों पर आयु सत्यापन (Age Verification), स्क्रीन टाइम कंट्रोल और बच्चों के लिए सुरक्षित कंटेंट सुनिश्चित करने का दबाव बना रही हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में डिजिटल सुरक्षा शिक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएगी।

अभिभावकों ने किया स्वागत

ब्रिटेन में इस प्रस्ताव को लेकर कई अभिभावकों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि बच्चों को देर रात मोबाइल से दूर रखना आसान नहीं होता। यदि यह सुविधा स्वतः लागू हो जाती है तो परिवारों को काफी मदद मिलेगी।हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि 16 और 17 वर्ष के किशोरों को स्वयं जिम्मेदारी सीखने का अवसर भी मिलना चाहिए और अत्यधिक नियंत्रण उचित नहीं होगा।

क्या इससे डिजिटल लत पर लगेगी लगाम?

शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि केवल तकनीकी प्रतिबंध ही पर्याप्त नहीं होंगे। बच्चों को डिजिटल अनुशासन, समय प्रबंधन और जिम्मेदार इंटरनेट उपयोग की शिक्षा भी देनी होगी।उनके अनुसार यदि अभिभावक, स्कूल और सरकार मिलकर काम करें, तभी सोशल मीडिया की लत को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है।

दुनिया के लिए बन सकता है नया मॉडल

ब्रिटेन की यह पहल दुनिया के अन्य देशों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है। यदि यह व्यवस्था सफल रहती है और किशोरों की मानसिक सेहत, पढ़ाई और जीवनशैली पर सकारात्मक असर पड़ता है, तो भविष्य में अन्य देश भी इसी तरह के नियम लागू करने पर विचार कर सकते हैं।फिलहाल ब्रिटेन सरकार की इस पहल ने डिजिटल दुनिया में एक नई बहस छेड़ दी है—क्या बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया पर समय-आधारित नियंत्रण जरूरी है, या फिर यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप माना जाएगा? इसका जवाब आने वाले समय में इस नीति के प्रभाव से सामने आएगा।

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