रामलला के खजाने में सेंध? SIT रिपोर्ट से मचा भूचाल, ट्रस्ट के बड़े नामों पर उठे सवाल”

Editorial
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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी और चोरी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी, कमीशनखोरी, नियुक्तियों में अनियमितताओं और दान राशि की गणना प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेरफेर की आशंका जताई गई है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य और साक्ष्य शामिल हैं, जिनसे राम मंदिर ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एसआईटी ने छह दिनों तक अयोध्या में रहकर मंदिर परिसर, दान संग्रह व्यवस्था, कर्मचारियों की नियुक्तियों और चढ़ावे की गणना प्रक्रिया की गहन जांच की। मंगलवार को लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन ने संयुक्त रूप से यह गोपनीय रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को सौंपी। अब इस रिपोर्ट को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी जांच के घेरे में

सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में राम मंदिर ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका और निगरानी पर सवाल उठाए गए हैं। इनमें महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। जांच टीम का मानना है कि कुछ मामलों में लापरवाही हुई, जबकि कुछ बिंदुओं पर भूमिका की विस्तृत जांच की आवश्यकता है। रिपोर्ट में इन पदाधिकारियों के रिश्तेदारों और करीबी लोगों का भी उल्लेख किया गया है। विशेष रूप से टिन्नू यादव, सोम और अन्य परिचितों के नाम सामने आने की चर्चा है। एसआईटी ने इस पूरे नेटवर्क की जांच को आगे बढ़ाने की सिफारिश की है।

25 से 30 लोगों की भूमिका का दावा

जांच में कथित तौर पर 25 से 30 लोगों की भूमिका सामने आई है। सूत्रों का कहना है कि चढ़ावा चोरी के इस पूरे मामले में कई कर्मचारी और अन्य लोग शामिल हो सकते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख होने की चर्चा है कि कुछ मामलों में कमीशनखोरी के आरोपों की जांच की गई और उससे संबंधित गवाहों के बयान तथा दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और विस्तृत जांच जारी है।

आखिर कैसे हुआ चढ़ावे में कथित गबन?

जांच में सामने आया कि राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती का काम भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की निगरानी में किया जाता था। इसके लिए आउटसोर्सिंग कंपनी के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। एसआईटी को संदेह है कि नियुक्तियों की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई। आरोप है कि कई ऐसे लोगों को काम पर रखा गया जो प्रभावशाली व्यक्तियों के करीबी या रिश्तेदार थे। इससे पूरे सिस्टम पर कुछ लोगों का नियंत्रण बढ़ गया। सूत्रों के अनुसार, दानपात्रों से निकाली गई राशि को पहले एक स्थान पर इकट्ठा किया जाता था। इसके बाद गिनती की प्रक्रिया शुरू होती थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसी चरण में रकम का कथित रूप से हेरफेर किया गया। क्योंकि पहले से किसी को यह जानकारी नहीं होती थी कि कुल चढ़ावा कितना है, इसलिए अंतिम आंकड़े में बदलाव कर रकम पार करने की आशंका बनी रहती थी।

महाकुंभ और माघ मेले में बढ़ा चढ़ावा, बढ़ी गड़बड़ी की आशंका

जांच में यह भी सामने आया है कि पिछले वर्ष महाकुंभ और इस वर्ष माघ मेले के दौरान अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई थी। लाखों श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंचे और चढ़ावे की राशि में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई।सूत्रों का दावा है कि इसी दौरान सबसे ज्यादा गड़बड़ी होने की आशंका है। जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ दिनों में लाखों रुपये तक की रकम कथित तौर पर गायब की गई। हालांकि गबन की कुल राशि को लेकर अभी कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।सोशल मीडिया पर 200 करोड़ से लेकर 1400 करोड़ रुपये तक की रकम के गबन के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जांच एजेंसियों ने अब तक किसी भी राशि की पुष्टि नहीं की है।

ट्रस्ट के पुनर्गठन और ऑडिट की सिफारिश

एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा की सिफारिश की है। साथ ही मंदिर में पिछले कई वर्षों के वित्तीय लेन-देन का स्वतंत्र और विस्तृत ऑडिट कराने का सुझाव दिया गया है।जांच टीम का मानना है कि केवल चोरी की घटनाओं की जांच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि नियुक्तियों, सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और दान राशि की गणना प्रक्रिया में मौजूद खामियों को भी दूर करना होगा।

अगले दो सप्ताह में आएगी विस्तृत रिपोर्ट

एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान रिपोर्ट प्रारंभिक जांच पर आधारित है। अभी कई दस्तावेजों और गवाहों की जांच बाकी है। अगले दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें और अधिक तथ्य, साक्ष्य और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट हो सकती है।राम मंदिर देश की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। ऐसे में चढ़ावे की रकम में कथित हेरफेर और चोरी के आरोपों ने करोड़ों श्रद्धालुओं को चिंतित कर दिया है। अब सभी की निगाहें सरकार और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं होगा, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े संस्थान में जवाबदेही और पारदर्शिता की सबसे बड़ी परीक्षा भी होगी।

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