पहली बारिश में बह गया ‘विकास’! सीतापुर के थानापट्टी में सड़क नहीं, कीचड़ का दलदल; ग्रामीण बोले—’वोट के बाद कोई नहीं आता’

Editorial
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रिपोर्ट: गौरव सिंह

सीतापुर चुनावी मंचों से विकास के बड़े-बड़े दावे करना आसान है, लेकिन जब ज़मीन पर हकीकत देखने की बारी आती है तो तस्वीर बिल्कुल अलग दिखाई देती है। ऐसी ही एक तस्वीर उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के विकास खंड कसमंडा के थानापट्टी गांव से सामने आई है। यह गांव कमलापुर कस्बे से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, लेकिन यहां पहुंचने वाला रास्ता देखकर ऐसा लगता है मानो यह कोई दूर-दराज़ का दुर्गम इलाका हो।बरसात की पहली तेज़ बारिश ने वर्षों से अधूरी पड़ी सड़क की असलियत फिर सबके सामने ला दी है। सड़क जगह-जगह गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। कीचड़ इतना अधिक है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। दोपहिया वाहन फिसल रहे हैं और चारपहिया वाहनों का निकलना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल यही हाल होता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि केवल आश्वासन देकर चले जाते हैं।

चुनाव आते ही याद आता है गांव, फिर पांच साल तक नहीं होती सुध

ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय नेता गांव-गांव जाकर विकास के वादे करते हैं। पक्की सड़क, बेहतर सुविधाएं, जल निकासी और मूलभूत विकास की बातें होती हैं। लेकिन चुनाव खत्म होते ही सारे वादे भी मानो इस सड़क की तरह कीचड़ में दब जाते हैं।लोगों का कहना है कि वर्षों से सड़क की मरम्मत या निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। हर बारिश के बाद सड़क की हालत और बदतर हो जाती है, जिससे लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है।

स्कूल जाने वाले बच्चों की बढ़ी मुश्किल

सबसे ज्यादा परेशानी छोटे-छोटे बच्चों को उठानी पड़ रही है। इसी रास्ते से रोज़ छात्र-छात्राएं स्कूल जाते हैं। बारिश के बाद कई जगह सड़क पूरी तरह दलदल में बदल जाती है। बच्चे फिसलते हुए स्कूल पहुंचते हैं। कई बार उनके कपड़े और किताबें तक खराब हो जाती हैं।अभिभावकों का कहना है कि उन्हें हर दिन डर लगा रहता है कि कहीं उनका बच्चा किसी गड्ढे में गिरकर घायल न हो जाए। शिक्षा के अधिकार की बात तो होती है, लेकिन स्कूल तक पहुंचने के लिए सुरक्षित सड़क उपलब्ध नहीं कराई जा रही।

किसानों और मजदूरों की बढ़ी परेशानी

यह सड़क केवल ग्रामीणों की आवाजाही का रास्ता नहीं, बल्कि किसानों की जीवनरेखा भी है। किसान इसी मार्ग से अपनी फसल मंडी तक पहुंचाते हैं। खराब सड़क के कारण ट्रैक्टर और अन्य वाहन फंस जाते हैं, जिससे समय और पैसा दोनों का नुकसान होता है।रोज़गार के लिए शहर जाने वाले मजदूरों को भी इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। कई बार वाहन बीच रास्ते में फंस जाते हैं और लोग समय पर अपने काम तक नहीं पहुंच पाते।

बीमारों और गर्भवती महिलाओं के लिए बना खतरा

ग्रामीणों का कहना है कि सबसे बड़ी चिंता तब होती है जब किसी मरीज को अस्पताल ले जाना पड़ता है। खराब सड़क के कारण एंबुलेंस को गांव तक पहुंचने में दिक्कत होती है। बरसात के दिनों में मरीजों को चारपाई या निजी साधनों से मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी गंभीर मरीज या गर्भवती महिला को तत्काल अस्पताल ले जाना पड़े, तो यह सड़क उनकी जान के लिए खतरा बन सकती है।

बारिश ने खोली विकास कार्यों की हकीकत

पहली ही बारिश ने यह साफ कर दिया है कि विकास के दावे ज़मीनी स्तर पर कितने खोखले हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते सड़क का निर्माण या मरम्मत कर दी जाती, तो आज उन्हें इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।लोगों का कहना है कि कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। नतीजा यह है कि आज भी गांव के लोग उसी बदहाल सड़क पर चलने को मजबूर हैं।

 

जनता पूछ रही है—विकास आखिर कहां है?

ग्रामीणों का कहना है कि विकास केवल भाषणों, पोस्टरों और सोशल मीडिया तक सीमित नहीं होना चाहिए। असली विकास तब माना जाएगा, जब गांव की सड़कें बेहतर हों, बच्चों को सुरक्षित रास्ता मिले और मरीज समय पर अस्पताल पहुंच सकें।स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर गांव से सिर्फ एक किलोमीटर दूर स्थित सड़क का यह हाल है, तो दूरदराज़ के गांवों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

चुनाव में जनता देगी जवाब?

ग्रामीणों का कहना है कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत जनता का वोट है। यदि वर्षों तक समस्याएं जस की तस बनी रहें और जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के समय दिखाई दें, तो जनता भी अपने मतदान के जरिए जवाब देने का अधिकार रखती है।लोगों का कहना है कि अब समय केवल वादे सुनने का नहीं, बल्कि ज़मीन पर काम देखने का है। यदि विकास नहीं होगा, तो आने वाले चुनाव में जनता अपना फैसला भी उसी आधार पर करेगी।

प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि थानापट्टी गांव की इस सड़क का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और जल्द से जल्द पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए। साथ ही जल निकासी की भी समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि हर बारिश के बाद लोगों को इस समस्या का सामना न करना पड़े।फिलहाल गांव के लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि इस बार उनकी आवाज़ जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचेगी और वर्षों से चली आ रही यह समस्या आखिरकार खत्म होगी। क्योंकि सड़क सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं होती, बल्कि किसी भी गांव के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक प्रगति की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है।

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