बरेली उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में जनसुनवाई शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी (डीएम) ने जुलाई माह में प्राप्त शिकायतों और उनके फीडबैक की समीक्षा के बाद 9 अधिकारियों का वेतन रोकने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही 26 अधिकारियों से स्पष्टीकरण (शो कॉज नोटिस) भी तलब किया गया है।प्रशासन की इस कार्रवाई को सरकारी कार्यप्रणाली में जवाबदेही तय करने और शिकायतों के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण की दिशा में एक सख्त संदेश माना जा रहा है।
- फीडबैक रिपोर्ट के बाद हुआ बड़ा फैसला
- 9 अधिकारियों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोका गया
- 26 अधिकारियों से मांगा गया स्पष्टीकरण
- जनसुनवाई व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर
- समयबद्ध निस्तारण पर विशेष फोकस
- शिकायतकर्ता की संतुष्टि होगी सबसे बड़ा पैमाना
- अधिकारियों को दी गई चेतावनी
- जनता को मिलेगा बेहतर प्रशासन
- सुशासन की दिशा में अहम कदम
फीडबैक रिपोर्ट के बाद हुआ बड़ा फैसला
जिला प्रशासन द्वारा नियमित रूप से जनसुनवाई और शिकायत निस्तारण की समीक्षा की जाती है। जुलाई माह के दौरान प्राप्त शिकायतों पर जब फीडबैक लिया गया तो कई मामलों में शिकायतकर्ताओं ने असंतोष जताया।समीक्षा में सामने आया कि कुछ विभागों में शिकायतों का समय पर निस्तारण नहीं हुआ, जबकि कुछ मामलों में बिना संतोषजनक कार्रवाई किए शिकायतों का निस्तारण दर्शा दिया गया। इसी आधार पर डीएम ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।
9 अधिकारियों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोका गया
जांच में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर 9 अधिकारियों का वेतन रोकने का निर्णय लिया गया। प्रशासन का मानना है कि सरकारी अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी आम नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध और निष्पक्ष समाधान करना है।यदि शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही होती है तो इसका सीधा असर जनता के प्रशासन पर भरोसे पर पड़ता है। इसी वजह से प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया।
26 अधिकारियों से मांगा गया स्पष्टीकरण
वेतन रोकने के अलावा 26 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं।इन अधिकारियों से पूछा गया है कि शिकायतों के निस्तारण में देरी या गुणवत्ता संबंधी कमियां क्यों पाई गईं। प्रशासन उनके जवाब का परीक्षण करेगा और उसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
जनसुनवाई व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जनसुनवाई केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह आम जनता और प्रशासन के बीच विश्वास का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर शिकायत को गंभीरता से लें, मौके पर जांच करें और शिकायतकर्ता को संतुष्ट करने योग्य कार्रवाई सुनिश्चित करें।

समयबद्ध निस्तारण पर विशेष फोकस
डीएम ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में किसी भी शिकायत के निस्तारण में अनावश्यक देरी न हो। प्रत्येक मामले में तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई पूरी की जाए और उसकी सही रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड की जाए।उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतों का केवल कागजी निस्तारण स्वीकार नहीं किया जाएगा, बल्कि शिकायतकर्ता के फीडबैक को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
शिकायतकर्ता की संतुष्टि होगी सबसे बड़ा पैमाना
प्रशासन का मानना है कि किसी भी शिकायत का वास्तविक समाधान तभी माना जाएगा, जब शिकायतकर्ता कार्रवाई से संतुष्ट हो।इसी उद्देश्य से फीडबैक प्रणाली को और मजबूत किया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अधिकारी केवल रिकॉर्ड पूरा करने के बजाय वास्तविक समस्याओं का समाधान करें।
अधिकारियों को दी गई चेतावनी
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि किसी अधिकारी द्वारा शिकायत निस्तारण में लापरवाही बरती जाती है तो उसके खिलाफ और कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।डीएम ने कहा कि पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध सेवा देना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जनता को मिलेगा बेहतर प्रशासन
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से अधिकारियों में जवाबदेही बढ़ेगी और सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा।जनसुनवाई व्यवस्था मजबूत होने से लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
सुशासन की दिशा में अहम कदम
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार शिकायत निस्तारण प्रणाली को मजबूत बनाने पर जोर दे रही है। जिलास्तर पर की जा रही नियमित समीक्षा और फीडबैक आधारित कार्रवाई इसी नीति का हिस्सा मानी जा रही है।बरेली में डीएम द्वारा उठाया गया यह कदम अन्य विभागों और अधिकारियों के लिए भी स्पष्ट संदेश है कि जनता की शिकायतों में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। बरेली में जनसुनवाई शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पर डीएम की सख्त कार्रवाई ने प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही का स्पष्ट संदेश दिया है। 9 अधिकारियों का वेतन रोकना और 26 अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगना यह दर्शाता है कि शिकायतों के समाधान में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले समय में इस कार्रवाई का सकारात्मक प्रभाव जनसुनवाई व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यशैली पर देखने को मिल सकता है।
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