रिपोर्ट : दीपचंद दीक्षित
फर्रुखाबाद ग्राम पंचायत रामपुर डफरपुर में किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर चल रहा भारतीय किसान यूनियन (श्रमिक जनशक्ति) का अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार को 11वें दिन भी जारी रहा। आंदोलन को और तेज करते हुए संगठन के जिलाध्यक्ष और ग्राम प्रधान नरोत्तम सिंह राजपूत भूख हड़ताल पर बैठ गए। किसानों ने प्रशासन पर उनकी मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए जल्द समाधान की मांग की है।धरना स्थल पर हुई बैठक में किसानों ने कहा कि लंबे समय से क्षेत्र की समस्याओं को लेकर अधिकारियों को जानकारी दी जा रही है, लेकिन अब तक कोई सक्षम अधिकारी धरना स्थल पर पहुंचकर किसानों से वार्ता करने नहीं आया। इससे आंदोलन कर रहे किसानों और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
11वें दिन भी जारी रहा किसानों का आंदोलन
रामपुर डफरपुर ग्राम पंचायत में किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर शुरू किया गया अनिश्चितकालीन धरना अब 11वें दिन में पहुंच गया है। किसानों का कहना है कि उनकी मांगें स्थानीय स्तर से लेकर प्रशासन तक लगातार पहुंचाई जा रही हैं, लेकिन समाधान की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।आंदोलनकारियों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रख रहे हैं। इसके बावजूद यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता है तो आंदोलन को आगे और व्यापक किया जाएगा।मंगलवार को धरना स्थल पर किसानों की बैठक हुई, जिसमें आंदोलन की अगली रणनीति पर चर्चा की गई।

जिलाध्यक्ष नरोत्तम सिंह राजपूत भूख हड़ताल पर बैठे
किसानों के आंदोलन को धार देते हुए भारतीय किसान यूनियन (श्रमिक जनशक्ति) के जिलाध्यक्ष और ग्राम प्रधान नरोत्तम सिंह राजपूत भूख हड़ताल पर बैठ गए।उन्होंने कहा कि जब तक क्षेत्रवासियों और किसानों की सभी प्रमुख मांगों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए संगठन हर स्तर पर संघर्ष करने को तैयार है।नरोत्तम सिंह राजपूत ने प्रशासन से किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेने और धरना स्थल पर पहुंचकर वार्ता करने की मांग की।
प्रशासन पर उपेक्षा का लगाया आरोप
धरना स्थल पर मौजूद किसानों ने स्थानीय प्रशासन, एलआईयू और अन्य माध्यमों से आंदोलन की जानकारी दिए जाने के बावजूद किसी सक्षम अधिकारी के मौके पर नहीं पहुंचने का आरोप लगाया।किसानों का कहना है कि वे कई दिनों से धरने पर बैठे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं पर प्रशासन की ओर से प्रभावी बातचीत नहीं हुई है। इससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है।आंदोलनकारियों ने कहा कि यदि प्रशासन किसानों की समस्याओं को लेकर जल्द कोई ठोस कदम उठाता है तो समाधान की दिशा में बातचीत आगे बढ़ सकती है। वहीं, प्रशासन की ओर से मामले में क्या कार्रवाई की जा रही है, इस संबंध में आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
सड़क जाम की चेतावनी
किसानों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन भेजकर चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे सड़क जाम सहित अन्य लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।बैठक में किसानों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि प्रशासन का रवैया नहीं बदला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसानों ने कहा कि उनकी मांगों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन का दायरा बढ़ाया जा सकता है।हालांकि किसानों ने आंदोलन को लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाने की बात कही है।
किसानों ने उठाईं ये प्रमुख मांगें
धरना दे रहे किसानों और ग्रामीणों ने कई स्थानीय और किसान हित से जुड़ी मांगें प्रशासन के सामने रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- किसानों को हर 15 दिन पर राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए।
- पात्र किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ दिलाया जाए।
- ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक प्रमुख चौराहे और तिराहे पर सोलर लाइट लगाई जाए।
- किसानों के बिजली बिल माफ किए जाएं।
- गांवों में नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
किसानों का कहना है कि इन मांगों का सीधा संबंध ग्रामीणों के दैनिक जीवन, खेती और बुनियादी सुविधाओं से है। इसलिए प्रशासन को इन पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।
आंदोलन तेज करने की रणनीति
धरना स्थल पर हुई बैठक में किसानों ने आगे की रणनीति पर चर्चा की। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि प्रशासन की ओर से जल्द कोई सकारात्मक पहल नहीं होती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।किसानों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक क्षेत्र की समस्याओं पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा।वहीं भूख हड़ताल शुरू होने के बाद प्रशासन के सामने आंदोलन को लेकर चुनौती बढ़ गई है। अब किसानों की मांगों पर प्रशासन किस तरह प्रतिक्रिया देता है और क्या अधिकारियों की ओर से धरना स्थल पर वार्ता के लिए कोई पहल होती है, इस पर सभी की नजर है।
किसानों और प्रशासन के बीच वार्ता पर टिकी नजर
फर्रुखाबाद के रामपुर डफरपुर में चल रहा किसानों का धरना अब 11 दिन पूरे कर चुका है। जिलाध्यक्ष के भूख हड़ताल पर बैठने और सड़क जाम की चेतावनी के बाद आंदोलन ने नया रूप ले लिया है।किसानों की मांग है कि प्रशासन उनकी समस्याओं का जल्द समाधान करे और संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में वार्ता कराई जाए। दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।फिलहाल किसानों ने साफ कर दिया है कि मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। ऐसे में फर्रुखाबाद किसान आंदोलन, किसानों की भूख हड़ताल और प्रशासन के अगले कदम पर क्षेत्र के लोगों की नजर बनी हुई है।
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