सहारनपुर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में कथित लापरवाही और भूमि नामांतरण प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता के आरोपों ने राजस्व विभाग में हलचल मचा दी है। सदर तहसील में तैनात रजिस्ट्रार कानूनगो हरिओम पर हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना करने और खसरा संख्या 25 की भूमि के नामांतरण में नियमों की अनदेखी करने के आरोप लगे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी (डीएम) ने कानूनगो से स्पष्टीकरण तलब कर जवाब मांगा है। इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।जानकारी के अनुसार पूरा मामला खसरा संख्या 25 की एक विवादित भूमि से जुड़ा है। आरोप है कि संबंधित भूमि के तीन वैध वारिस होने के बावजूद नामांतरण की प्रक्रिया में केवल एक व्यक्ति का नाम दर्ज कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह कार्रवाई न केवल राजस्व अभिलेखों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों की भी अवहेलना है।
हाईकोर्ट के आदेश के पालन पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार संबंधित भूमि विवाद लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन था। मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजस्व अधिकारियों को निर्धारित नियमों के तहत निष्पक्ष कार्रवाई करने और सभी पात्र वारिसों के अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।आरोप है कि इन निर्देशों के बावजूद नामांतरण की प्रक्रिया में अपेक्षित सावधानी नहीं बरती गई। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि तीन उत्तराधिकारियों के स्थान पर केवल एक व्यक्ति का नाम दर्ज कर दिया गया, जिससे अन्य वारिसों के अधिकार प्रभावित हुए। इसी आधार पर पूरे मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से की गई।

राजस्व विभाग में मचा हड़कंप
मामले के सामने आने के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप की स्थिति बन गई है। विभागीय अधिकारियों ने पूरे प्रकरण की फाइलों और अभिलेखों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक स्तर पर यह देखा जा रहा है कि नामांतरण की प्रक्रिया किन परिस्थितियों में पूरी की गई और क्या संबंधित अधिकारियों ने न्यायालय के आदेशों का सही तरीके से पालन किया।सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं।
डीएम ने मांगा स्पष्टीकरण
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने सदर तहसील में तैनात रजिस्ट्रार कानूनगो हरिओम से विस्तृत जवाब तलब किया है। उनसे पूछा गया है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नामांतरण की प्रक्रिया में कथित अनियमितता क्यों हुई और किन आधारों पर केवल एक व्यक्ति का नाम दर्ज किया गया।प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि कानूनगो के जवाब का परीक्षण करने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि उनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया तो विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
नामांतरण प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
राजस्व मामलों के जानकारों का कहना है कि उत्तराधिकार के मामलों में सभी वैध वारिसों का रिकॉर्ड में उल्लेख किया जाना आवश्यक होता है। यदि किसी न्यायालय का स्पष्ट आदेश मौजूद हो तो उसका अक्षरशः पालन करना संबंधित अधिकारियों की कानूनी जिम्मेदारी होती है।ऐसी स्थिति में यदि किसी पात्र वारिस का नाम दर्ज नहीं किया जाता है तो इससे भविष्य में बड़े कानूनी विवाद खड़े हो सकते हैं। यही कारण है कि इस मामले को प्रशासन भी गंभीरता से ले रहा है।

अभिलेखों की होगी गहन जांच
सूत्रों के अनुसार अब संबंधित खसरे, खतौनी, नामांतरण आदेश, उत्तराधिकार संबंधी दस्तावेज और न्यायालय के आदेशों की विस्तार से जांच की जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि कहीं किसी स्तर पर दस्तावेजों में त्रुटि, लापरवाही या जानबूझकर नियमों की अनदेखी तो नहीं की गई।यदि जांच में किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
प्रशासन की सख्त निगरानी
जिलाधिकारी स्तर पर पूरे प्रकरण की निगरानी की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।राजस्व विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में नामांतरण सहित सभी मामलों में न्यायालय के आदेशों और राजस्व नियमों का पूरी पारदर्शिता के साथ पालन किया जाए।
शिकायतकर्ताओं को निष्पक्ष जांच की उम्मीद
शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस मामले की जांच नहीं होती तो अन्य वैध वारिसों के अधिकारों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता था।वहीं स्थानीय लोगों का भी कहना है कि राजस्व मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि छोटी सी लापरवाही भी वर्षों तक चलने वाले भूमि विवादों का कारण बन सकती है।
जवाब के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल सभी की निगाहें रजिस्ट्रार कानूनगो हरिओम के स्पष्टीकरण पर टिकी हैं। डीएम कार्यालय को जवाब मिलने के बाद उसकी विधिक और प्रशासनिक समीक्षा की जाएगी। यदि जांच में हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना, सरकारी अभिलेखों में अनियमितता या सेवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, निलंबन अथवा अन्य कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।सहारनपुर का यह मामला एक बार फिर यह संदेश देता है कि न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही प्रशासनिक अधिकारियों के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस पूरे प्रकरण में क्या अंतिम कार्रवाई करता है।
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