नई दिल्ली बिहार और दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित बर्बरता और अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। इस मामले में बिहार सरकार और दिल्ली पुलिस ने अदालत के समक्ष अपने-अपने जवाब दाखिल किए हैं। बिहार सरकार ने अपने हलफनामे में सिवान में प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 से हवा में चार राउंड फायरिंग किए जाने की बात स्वीकार की है। हालांकि, सरकार का दावा है कि इस फायरिंग में कोई प्रदर्शनकारी घायल नहीं हुआ।वहीं दिल्ली पुलिस ने संसद मार्च के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने और स्थिति बिगड़ने के बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए थे।

सिवान में AK-47 से चलीं चार गोलियां
बिहार सरकार के जवाबी हलफनामे के मुताबिक, छात्र प्रदर्शन के दौरान सिवान के जेपी चौक के पास एक पुलिसकर्मी भीड़ के बीच फंस गया था। सरकार के अनुसार, अपनी सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी ने AK-47 से हवा में चार राउंड फायर किए।सरकार ने स्पष्ट किया कि इन गोलियों से किसी प्रदर्शनकारी के घायल होने की जानकारी नहीं है। हालांकि, पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उसे कथित अनुचित व्यवहार के मामले में निलंबित किया गया और विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।बिहार सरकार के मुताबिक, AK-47 से हुई फायरिंग की घटना की बैलिस्टिक जांच भी की जा रही है। यानी यह भी जांच का विषय है कि मौके पर किस हथियार से कितनी गोलियां चलीं और घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।
पिस्टल से भी चलीं दो गोलियां
हलफनामे में बिहार सरकार ने हाथी चौक की घटना का भी जिक्र किया है। सरकार के अनुसार, भीड़ को नियंत्रित करने और हटाने के दौरान एक ASI ने पिस्टल से दो राउंड फायर किए। इस घटना में तीन प्रदर्शनकारियों को हथियार से मामूली चोटें आईं।सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ये तीनों प्रदर्शनकारी AK-47 की गोली से घायल नहीं हुए थे। इस मामले में भी घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर उठे सवालों के बीच बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से इनकार किया है। सरकार का कहना है कि कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों की ओर से हिंसा की गई और पुलिस तथा सरकारी कर्मचारियों को भी निशाना बनाया गया।

69 FIR, करीब 500 गिरफ्तारियां
बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 22 से 25 जुलाई के बीच राज्य में प्रदर्शन से जुड़े मामलों में 69 FIR दर्ज की गईं। करीब 500 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी हलफनामे में दी गई है।सरकार के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सरकारी कर्मचारियों को चोटें आईं। छपरा में दो BDO, तीन इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और 11 कांस्टेबल घायल हुए। सरकार का दावा है कि राज्यभर में कुल 157 पुलिसकर्मी और सात सरकारी कर्मचारी घायल हुए।हलफनामे के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर रिहा किया गया। इसके अलावा जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की ओर से 75 नाबालिगों को भी रिहा किया गया।
दिल्ली पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप नकारे
संसद मार्च और दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। पुलिस के अनुसार, संसद की ओर मार्च करने की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड की कई परतें तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की।दिल्ली पुलिस ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान हालात हिंसक हो गए थे। पुलिस के मुताबिक, करीब तीन किलोमीटर के क्षेत्र में 5,000 से अधिक पुलिसकर्मी 30 हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ को संभाल रहे थे।पुलिस का दावा है कि संघर्ष की घटनाओं में 240 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि करीब 200 प्रदर्शनकारी या आम लोग भी घायल हुए। दिल्ली पुलिस ने कहा कि इतनी बड़ी भीड़ और तनावपूर्ण परिस्थितियों के बीच की गई कार्रवाई को सीधे तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग नहीं कहा जा सकता।
नाखून लगी लाठी के आरोप पर भी सफाई
प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा नाखून लगी लाठी इस्तेमाल किए जाने के आरोपों पर भी दिल्ली पुलिस ने अपना पक्ष रखा है। पुलिस ने इस आरोप से इनकार करते हुए कहा कि वीडियो में नाखून लगी एक लाठी दिखाई देती है, लेकिन वह पुलिसकर्मी के हाथ में नहीं थी। पुलिस के मुताबिक, वह लाठी एक प्रदर्शनकारी के पास थी।दिल्ली पुलिस ने कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सामान्य लाठी का इस्तेमाल पुलिस की अनुमत प्रक्रिया का हिस्सा है। पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर सादे कपड़ों में मौजूद अधिकारियों को लेकर भी सफाई दी है।पुलिस के अनुसार, स्पेशल ब्रांच, स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस के ‘स्पॉटर्स’ भीड़ के बीच मौजूद थे। इनका उद्देश्य प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों और मौके की स्थिति पर नजर रखना था। दिल्ली पुलिस ने कहा कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों और भीड़ वाले कार्यक्रमों में इस तरह की व्यवस्था सामान्य तौर पर की जाती है।
फेशियल रिकग्निशन को लेकर दिल्ली पुलिस का जवाब
प्रदर्शन स्थल पर फेशियल रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठे थे। दिल्ली पुलिस ने अदालत में कहा कि इस तकनीक का इस्तेमाल गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित या रिकॉर्ड वाले लोगों की पहचान के लिए किया गया।पुलिस ने दावा किया कि केवल चेहरे की पहचान के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती। पहले मौके पर उसकी मौजूदगी और अन्य तथ्यों की पुष्टि की जाती है, इसके बाद ही आगे की कार्रवाई होती है।दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन से जुड़े 2,873 लोगों पर हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, दुष्कर्म और POCSO जैसे गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हैं। पुलिस ने कहा कि इन मामलों की जांच विशेष जांच दल की ओर से की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के सामने अब जांच और जवाबदेही का सवाल
छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई, बल प्रयोग, गिरफ्तारियों और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। बिहार सरकार और दिल्ली पुलिस दोनों ने अपने हलफनामों में अपनी कार्रवाई का बचाव किया है, लेकिन साथ ही कहा है कि इस्तेमाल किए गए बल की वैधता और परिस्थितियों की जांच अदालत द्वारा गठित समिति के सामने की जा सकती है।मामले में अब यह महत्वपूर्ण होगा कि सुप्रीम कोर्ट पुलिस की कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों के आरोप और सरकारों द्वारा दिए गए जवाबों का किस तरह मूल्यांकन करता है। अदालत के सामने एक ओर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पुलिस की जिम्मेदारी है, तो दूसरी ओर शांतिपूर्ण प्रदर्शन और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा का सवाल भी महत्वपूर्ण है।
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