रिपोर्ट : रमजान अंगडी
विजयपुर/कर्नाटक कर्नाटक के विजयपुर जिले के चढ़चन तालुका स्थित शिगणापुर गांव में नागपंचमी के अवसर पर एक अनोखी घटना सामने आई। यहां नागदेव की पूजा कर रहे भक्तों के बीच उस समय उत्सुकता और श्रद्धा का माहौल बन गया, जब पूजा स्थल के आसपास एक जीवित नाग दिखाई दिया। पूजा में शामिल भक्तों ने इसे नागदेव के दर्शन से जोड़कर देखा और श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की।जानकारी के अनुसार, नागपंचमी के अवसर पर शिगणापुर गांव में महिलाओं और ग्रामीणों की ओर से विशेष धार्मिक आयोजन किया गया था। गांव की माताएं अपने हाथों से बनाई गई नाग की मूर्तियां लेकर पूजा स्थल पर पहुंचीं। परंपरा के अनुसार इन मूर्तियों पर दूध चढ़ाकर नागदेव की पूजा की जा रही थी। इसी दौरान देवी लक्ष्मी और श्री रुद्रमहायोगी के परिसर में अचानक एक जीवित नाग दिखाई देने की बात सामने आई।
नागदेव की मूर्ति पर दूध चढ़ाते समय दिखा सांप
स्थानीय लोगों के मुताबिक, जब श्रद्धालु नागदेव की प्रतिमाओं पर दूध अर्पित कर रहे थे, तभी पूजा स्थल के पास एक नाग दिखाई दिया। बताया गया कि नाग कुछ समय तक वहां मौजूद रहा और इसके बाद धीरे-धीरे वहां से चला गया। अचानक जीवित नाग को देखकर वहां मौजूद श्रद्धालुओं में कौतूहल पैदा हो गया।भक्तों ने इस घटना को धार्मिक आस्था से जोड़ते हुए इसे नागदेव का आशीर्वाद और शुभ दर्शन माना। कई श्रद्धालुओं ने नाग के सामने श्रद्धापूर्वक पूजा की। लोगों का कहना था कि नागपंचमी के दिन नागदेव की पूजा के दौरान जीवित नाग का दिखाई देना उनके लिए विशेष अनुभव रहा।हालांकि इस घटना को लेकर किसी चमत्कार की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों की धार्मिक मान्यताओं और आस्था के कारण उन्होंने इस घटना को विशेष महत्व दिया।

नागपंचमी पर नाग पूजा की विशेष परंपरा
हिंदू धर्म में नागपंचमी का पर्व नाग देवताओं की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। सावन मास में मनाए जाने वाले इस पर्व पर देश के अलग-अलग हिस्सों में नागदेव की पूजा की जाती है। कई स्थानों पर लोग नाग की प्रतिमा या चित्र बनाकर उनकी पूजा करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में नागपंचमी का पर्व विशेष धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाता है।शिगणापुर गांव में भी इस अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से नाग की मूर्तियां तैयार कीं। इन मूर्तियों को पूजा स्थल पर ले जाकर विधि-विधान से पूजा की गई। दूध, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर नागदेव से परिवार की सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना की गई।स्थानीय परंपराओं में नाग को प्रकृति और कृषि से भी जोड़ा जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सांपों को खेतों और पर्यावरण के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जाता है। नागपंचमी के अवसर पर नागों के प्रति सम्मान और उनके संरक्षण का संदेश भी धार्मिक परंपराओं के माध्यम से सामने आता है।
जीवित नाग दिखने से बढ़ी श्रद्धालुओं की उत्सुकता
पूजा के दौरान अचानक नाग दिखाई देने से वहां मौजूद लोगों का ध्यान उसकी ओर चला गया। श्रद्धालुओं ने बताया कि नाग कुछ समय तक परिसर में रहा और फिर वहां से निकल गया। इस दौरान लोगों ने इसे धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना।ग्रामीणों के बीच इस घटना की चर्चा भी होने लगी। भक्तों का कहना था कि उन्होंने नागपंचमी के दिन नागदेव के प्रत्यक्ष दर्शन किए। धार्मिक आस्था के कारण कई लोगों ने इसे अपने लिए शुभ संकेत माना।पूजा में शामिल महिलाओं ने भी इस घटना को विशेष बताया। उनका कहना था कि जिस समय नागदेव की मूर्तियों पर दूध चढ़ाकर पूजा की जा रही थी, उसी समय जीवित नाग का दिखाई देना उनके लिए भावनात्मक और श्रद्धा से जुड़ा अनुभव रहा।
आस्था के साथ वन्यजीवों के प्रति सावधानी भी जरूरी
सांप दिखाई देने की ऐसी घटनाओं में धार्मिक आस्था के साथ सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, सांप अपने प्राकृतिक व्यवहार के तहत किसी स्थान पर आ सकते हैं। इसलिए उन्हें पकड़ने, छेड़ने या उनके करीब जाने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखना चाहिए। यदि किसी पूजा स्थल या आबादी वाले क्षेत्र में सांप दिखाई दे तो प्रशिक्षित वन्यजीव बचाव दल या संबंधित विभाग की मदद लेना उचित होता है।शिगणापुर की इस घटना ने नागपंचमी की धार्मिक आस्था के साथ-साथ लोगों की जिज्ञासा भी बढ़ा दी है। भक्तों के लिए यह दिन पहले से ही विशेष था, लेकिन पूजा के दौरान जीवित नाग दिखाई देने के बाद उनकी श्रद्धा और उत्सुकता और बढ़ गई।स्थानीय लोगों के अनुसार, नागपंचमी के इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और नागदेव की पूजा कर परिवार की सुख-शांति की कामना की। जीवित नाग के दिखाई देने की घटना अब गांव में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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