आगरा में रिश्तों, भरोसे और संपत्ति से जुड़े एक चौंकाने वाले मामले ने सभी को हैरान कर दिया है। एक महिला पर आरोप है कि उसने फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर पहले युवक से शादी की, फिर उसके परिवार की संपत्ति अपने नाम कराने की साजिश रची और बाद में उसी युवक को दुष्कर्म के मामले में फंसाकर जेल तक भिजवा दिया। मामले में अदालत के आदेश पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में आधार कार्ड और शैक्षिक प्रमाणपत्रों में जन्मतिथि संबंधी गंभीर विसंगतियां सामने आने के बाद पूरे प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है। मामला आगरा के एत्माद्दौला क्षेत्र का है, जहां निवासी कालीचरन ने अदालत का दरवाजा खटखटाकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुमकुम नाम की युवती ने सुनियोजित तरीके से उनके बेटे बंटी के संपर्क में आकर पहले उससे दोस्ती की और फिर धीरे-धीरे परिवार की आर्थिक स्थिति तथा संपत्तियों की पूरी जानकारी हासिल कर ली। शिकायत के अनुसार, यह केवल प्रेम संबंध का मामला नहीं था, बल्कि इसके पीछे संपत्ति हड़पने की एक बड़ी साजिश रची गई थी। कालीचरन का आरोप है कि 21 मई 2020 को कुमकुम के पिता महेश ने उनके बेटे बंटी के खिलाफ बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उस समय परिवार को लगा कि मामला सामान्य पारिवारिक विवाद का है, लेकिन बाद में घटनाक्रम ने ऐसा मोड़ लिया जिसने पूरे परिवार को मुश्किलों में डाल दिया। आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज होने के लगभग एक महीने बाद कुमकुम ने कथित रूप से फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज तैयार कराए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उसने प्रयागराज स्थित आर्य समाज मंदिर में बंटी से विवाह कर लिया। शादी के बाद कुमकुम परिवार के साथ रहने लगी और धीरे-धीरे घर के अंदर अपना प्रभाव बढ़ाने लगी। शिकायत के अनुसार, परिवार को इस दौरान उसके इरादों पर कोई संदेह नहीं हुआ। लेकिन बाद में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने परिवार को झकझोर कर रख दिया। आरोप है कि 5 अगस्त 2021 को कुमकुम ने कालीचरन को यह कहकर फतेहाबाद तहसील बुलाया कि कुछ सरकारी औपचारिकताओं और पेंशन कार्ड से संबंधित कार्य पूरे करने हैं। कालीचरन का कहना है कि वहां उन्हें वास्तविक दस्तावेजों की जानकारी दिए बिना कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करा लिए गए। परिवार का आरोप है कि इसी प्रक्रिया के दौरान उनकी पैतृक कृषि भूमि का बैनामा करवा लिया गया। इस पूरे लेन-देन में बंटी और राजेंद्र नाम के व्यक्ति को भी शामिल किया गया था। हैरानी की बात यह है कि कालीचरन को इस कथित बैनामे की जानकारी कई वर्षों तक नहीं हो सकी। उन्हें फरवरी 2026 में पता चला कि उनकी जमीन किसी और के नाम दर्ज हो चुकी है। इसके बाद परिवार ने दस्तावेजों की जांच कराई तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुमकुम ने परिवार की एक अन्य संपत्ति, यानी प्लॉट को भी अपने नाम कराने का प्रयास किया। कालीचरन का कहना है कि उनकी पत्नी भूदेवी पर दबाव बनाकर और उन्हें डराकर यह काम कराया गया। परिवार का आरोप है कि पूरी कार्रवाई सुनियोजित तरीके से की गई ताकि धीरे-धीरे उनकी संपत्तियों पर कब्जा जमाया जा सके। मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब 14 फरवरी 2026 को कुमकुम ने बंटी के खिलाफ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज करा दी। इस मुकदमे के बाद बंटी को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा और उसे जेल भी जाना पड़ा। परिवार का आरोप है कि यह मुकदमा दबाव बनाने और आर्थिक लाभ हासिल करने के उद्देश्य से दर्ज कराया गया था। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुमकुम की ओर से पांच लाख रुपये की मांग की गई थी। हालांकि घटनाक्रम में बड़ा मोड़ तब आया जब 19 फरवरी को कुमकुम ने अदालत में बंटी के पक्ष में बयान दिए। अदालत में दिए गए इन बयानों ने पहले दर्ज कराए गए आरोपों पर सवाल खड़े कर दिए। बाद में इन्हीं बयानों के आधार पर बंटी को 26 मार्च को जेल से रिहा कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने जांच एजेंसियों और अदालत का ध्यान दस्तावेजों की सत्यता की ओर आकर्षित किया। अदालत की प्रारंभिक जांच के दौरान सामने आया कि कुमकुम द्वारा इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां मौजूद हैं। आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि और स्कूल प्रमाणपत्र में अंकित जन्मतिथि अलग-अलग पाई गई। जांच में यह भी आशंका जताई गई कि कुछ दस्तावेज कथित रूप से गलत जानकारी देकर तैयार कराए गए थे। इन्हीं दस्तावेजों का उपयोग विवाह, कानूनी कार्रवाई और संपत्ति से जुड़े मामलों में किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।अदालत के आदेश पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और अब पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कैसे हुई, संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही और क्या वास्तव में किसी सुनियोजित साजिश के तहत पूरे परिवार को निशाना बनाया गया। फिलहाल यह मामला आगरा में चर्चा का विषय बना हुआ है और हर किसी की नजर पुलिस जांच के अगले कदम पर टिकी हुई है।
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