उरई उत्तर प्रदेश के उरई जिले के कोटरा कस्बे में शुक्रवार की सुबह ऐसा दर्द लेकर आई, जिसने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया। रातभर जिन बेटों के घर लौटने का इंतजार मांएं दरवाजे पर बैठकर करती रहीं, सुबह उनके लौटने की खबर नहीं, बल्कि मौत की सूचना मिली। मुहर्रम का जुलूस देखकर लौट रहे तीन दोस्तों की तेज रफ्तार मौरंग से भरे डंपर की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। देखते ही देखते तीन घरों की खुशियां मातम में बदल गईं और पूरा कस्बा चीख-पुकार से गूंज उठा।यह हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं था, बल्कि तीन परिवारों के सपनों, उम्मीदों और भविष्य को एक ही पल में खत्म कर देने वाला मंजर था। सड़क पर बिखरे खून के निशान, टूटी हुई बाइक और रोते-बिलखते परिजन इस बात की गवाही दे रहे थे कि मौत कितनी बेरहमी से आई।
- मुहर्रम देखकर लौट रहे थे, मौत रास्ते में इंतजार कर रही थी
- दो की मौके पर मौत, तीसरे ने अस्पताल में तोड़ा दम
- रातभर दरवाजे पर बैठी रहीं मांएं… सुबह पहुंची मौत की खबर
- मेहनत से परिवार का सहारा बने थे तीनों युवक
- तस्वीरों से लिपटकर रोती रहीं मांएं
- एक साथ उठे तीन जनाजे, रो पड़ा पूरा कस्बा
- हेलमेट नहीं पहना था, चालक फरार
- रफ्तार बनी तीन परिवारों की सबसे बड़ी दुश्मन

मुहर्रम देखकर लौट रहे थे, मौत रास्ते में इंतजार कर रही थी
जानकारी के मुताबिक कोटरा कस्बे के रहने वाले अरबाज शाह (20), सोराब खान (23) और बरकत शाह उर्फ अनीस (22) गुरुवार रात एट में निकले मुहर्रम के ताजिया और छड़ देखने गए थे। रात करीब दो बजे तीनों एक ही बाइक से वापस अपने घर लौट रहे थे।कोटरा पहुंचने से कुछ ही पहले एट-कोटरा मार्ग पर सामने से आ रहे मौरंग से भरे तेज रफ्तार डंपर ने उनकी बाइक को जबरदस्त टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और तीनों युवक कई फीट दूर सड़क पर जा गिरे।
दो की मौके पर मौत, तीसरे ने अस्पताल में तोड़ा दम
हादसे में बरकत शाह और सोराब खान ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। गंभीर रूप से घायल अरबाज शाह को पहले स्थानीय अस्पताल, फिर झांसी मेडिकल कॉलेज और बाद में ग्वालियर रेफर किया गया। डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन जिंदगी की जंग हारकर उसने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।तीनों युवकों की मौत की खबर जैसे ही कोटरा कस्बे पहुंची, पूरे इलाके में मातम छा गया। लोगों की आंखों में सिर्फ आंसू थे और जुबान पर एक ही सवाल—“आखिर इन मासूम युवकों का कसूर क्या था?”
रातभर दरवाजे पर बैठी रहीं मांएं… सुबह पहुंची मौत की खबर
इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू उन मांओं का इंतजार था, जो पूरी रात अपने बेटों के घर लौटने की राह देखती रहीं। किसी मां ने बेटे के लिए खाना संभालकर रखा था, तो कोई दरवाजे की आहट सुनते ही बाहर झांक रही थी।लेकिन सुबह दरवाजे पर बेटा नहीं, पुलिस पहुंची। जैसे ही मौत की खबर मिली, घरों में चीख-पुकार मच गई। माताओं की आंखों के सामने उनके जवान बेटे कफन में लिपटे हुए थे। यह मंजर देखकर वहां मौजूद लोगों की भी आंखें भर आईं।
मेहनत से परिवार का सहारा बने थे तीनों युवक
अरबाज शाह एक मेहनती बाइक मिस्त्री था। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उठाने के लिए वह दिन-रात मेहनत करता था। उसके हाथों में हुनर था और आंखों में परिवार के बेहतर भविष्य का सपना।सोराब खान भी बाइक मिस्त्री था। कस्बे में दोनों की दोस्ती मिसाल मानी जाती थी। दोनों अक्सर साथ काम करते और साथ ही नजर आते थे।वहीं बरकत शाह उर्फ अनीस ट्रक चालक था। वह परिवार की जिम्मेदारियों का सबसे बड़ा सहारा था। बरकत और सोराब आपस में फुफेरे भाई थे। एक ही हादसे में दोनों की मौत ने पूरे परिवार को झकझोर दिया।

तस्वीरों से लिपटकर रोती रहीं मांएं
सोराब की मां मुन्नी देवी बेटे की तस्वीर सीने से लगाकर बार-बार बेसुध हो रही थीं। बरकत की मां नफीसा की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वहीं अरबाज के परिजन बार-बार यही कहते रहे कि कुछ घंटे पहले तक जो बेटा हंसते हुए घर से निकला था, अब वह हमेशा के लिए खामोश हो गया।घर के आंगन में पसरा सन्नाटा, रिश्तेदारों की सिसकियां और हर तरफ गूंजता मातम पूरे कस्बे को रुला रहा था।
एक साथ उठे तीन जनाजे, रो पड़ा पूरा कस्बा
जब तीनों युवकों के जनाजे एक साथ उठे तो कोटरा कस्बे का शायद ही कोई व्यक्ति ऐसा रहा हो जिसकी आंखें नम न हुई हों। हर गली, हर मोहल्ले में सिर्फ इसी हादसे की चर्चा थी।बुजुर्गों का कहना था कि उन्होंने वर्षों में इतना दर्दनाक मंजर कभी नहीं देखा। ऐसा लग रहा था मानो पूरे कस्बे ने एक साथ अपने तीन बेटे खो दिए हों।
हेलमेट नहीं पहना था, चालक फरार
पुलिस के अनुसार हादसे के समय तीनों युवक हेलमेट नहीं पहने हुए थे। दुर्घटना के बाद डंपर चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया।सूचना मिलते ही थाना प्रभारी निरीक्षक विमलेश कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने डंपर को कब्जे में लेकर मुकदमा दर्ज कर लिया है। फरार चालक की तलाश के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और कई टीमों को लगाया गया है।
रफ्तार बनी तीन परिवारों की सबसे बड़ी दुश्मन
यह हादसा एक बार फिर साबित करता है कि तेज रफ्तार और लापरवाही सड़क पर किसी की भी जिंदगी छीन सकती है। अगर भारी वाहनों की गति पर नियंत्रण हो, सड़क सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए और दोपहिया वाहन चालक हेलमेट पहनें, तो कई अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।उरई के कोटरा कस्बे में हुई यह दर्दनाक घटना सिर्फ तीन युवकों की मौत नहीं, बल्कि तीन परिवारों के सपनों का अंत है। जो मांएं रातभर बेटों के लौटने का इंतजार करती रहीं, उन्हें सुबह सिर्फ कफन में लिपटी लाशें मिलीं। इस हादसे ने पूरे इलाके को गम में डुबो दिया है और एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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