पोस्टरबाजी का खौफनाक सच! बाल-बाल बची महिला

Editorial
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मुंबई सुनने में यह सम्मान जैसा लगता है, लेकिन सोचिए अगर वह शॉल किसी नेता के हाथों से नहीं, बल्कि आसमान से आपके ऊपर आ गिरे तो? यह सुनकर अजीब जरूर लगेगा, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो कुछ ऐसा ही डरावना सच बयां कर रहा है।वीडियो में दो लोग बाइक पर आराम से अपने गंतव्य की ओर जा रहे हैं। अचानक फुटओवर ब्रिज पर लगा एक विशाल बैनर तेज हवा के कारण टूटकर सीधे उनके ऊपर आ गिरता है। बाइक चला रहा व्यक्ति किसी तरह संतुलन बनाए रखता है, लेकिन पीछे बैठी महिला पूरी तरह उस बैनर में लिपट जाती है। कुछ पल के लिए ऐसा दृश्य बनता है मानो बैनर पर छपे नेता जी स्वयं महिला को सम्मान स्वरूप शॉल ओढ़ा रहे हों। देखने वालों के लिए यह दृश्य भले ही कुछ सेकंड का हो, लेकिन अगर बाइक थोड़ी और असंतुलित हो जाती तो यह हादसा जानलेवा साबित हो सकता था।वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कोई इसे सिस्टम की लापरवाही बता रहा है तो कोई नेताओं की फोटोबाजी पर सवाल उठा रहा है। लेकिन इस वायरल वीडियो ने एक बेहद गंभीर मुद्दे को फिर से देश के सामने खड़ा कर दिया है।

हर शहर में बैनरों का जंगल

देश का शायद ही कोई शहर, कस्बा या चौराहा ऐसा होगा जहां बिजली के खंभों, फुटओवर ब्रिज, डिवाइडर, पेड़ों और सरकारी संपत्तियों पर नेताओं के पोस्टर और बैनर न लगे हों। किसी नेता का जन्मदिन हो, स्वागत समारोह हो, धार्मिक आयोजन हो, राजनीतिक रैली हो या फिर किसी को शुभकामनाएं देनी हों—हर मौके पर विशाल होर्डिंग और बैनर लगा दिए जाते हैं।इनमें से बड़ी संख्या ऐसे बैनरों की होती है जिन्हें बिना अनुमति लगाया जाता है। कई बार इन्हें रस्सियों और तारों के सहारे जैसे-तैसे बांध दिया जाता है। तेज हवा, बारिश या आंधी आते ही यही बैनर लोगों के लिए खतरा बन जाते हैं।

फोटो की राजनीति, जनता की सुरक्षा पर भारी

आज राजनीतिक प्रतिस्पर्धा केवल भाषणों तक सीमित नहीं रह गई है। नेताओं की मौजूदगी दिखाने का सबसे आसान तरीका बड़े-बड़े पोस्टर और होर्डिंग बन गए हैं। ऐसा लगता है कि हर आयोजन में फोटो लगाना ही पहचान और ताकत का प्रतीक बन चुका है।विडंबना यह है कि जिन पोस्टरों के जरिए जनता तक पहुंचने की कोशिश की जाती है, वही पोस्टर कई बार जनता की जान के लिए खतरा बन जाते हैं। सड़क किनारे लगे भारी फ्लेक्स और लोहे के फ्रेम तेज हवा में गिर जाएं तो किसी वाहन चालक, पैदल यात्री या राहगीर की जान भी जा सकती है।

पहले भी हो चुके हैं कई हादसे

देश के अलग-अलग राज्यों में कई बार तेज आंधी और बारिश के दौरान होर्डिंग गिरने से लोगों की मौत और गंभीर चोटों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद हर चुनाव, हर त्योहार और हर राजनीतिक कार्यक्रम के बाद शहरों में अवैध बैनरों की संख्या फिर बढ़ जाती है।स्थानीय प्रशासन कुछ दिनों तक अभियान चलाता है, लेकिन समय बीतते ही फिर वही हालात लौट आते हैं। सवाल यह है कि जब अवैध होर्डिंग और बैनर लगाने पर नियम बने हुए हैं तो उनका पालन क्यों नहीं कराया जाता?

कौन है जिम्मेदार?

सबसे बड़ा सवाल जिम्मेदारी का है। क्या केवल बैनर लगाने वाला जिम्मेदार है? क्या अनुमति देने वाली एजेंसियां जिम्मेदार हैं? क्या स्थानीय निकायों की कोई जवाबदेही नहीं बनती? या फिर राजनीतिक दबाव के कारण कार्रवाई नहीं हो पाती?अगर किसी अवैध बैनर के गिरने से किसी की जान चली जाए तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। केवल बैनर हटाने की औपचारिक कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि ऐसे मामलों में सख्त दंड का प्रावधान भी प्रभावी तरीके से लागू होना चाहिए।

प्रशासन को उठाने होंगे ठोस कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों में लगे सभी बड़े होर्डिंग और बैनरों का नियमित सुरक्षा ऑडिट होना चाहिए। जिन बैनरों की अनुमति समाप्त हो चुकी है, उन्हें तत्काल हटाया जाए। फुटओवर ब्रिज, फ्लाईओवर, बिजली के खंभों और सार्वजनिक स्थलों पर बिना अनुमति लगाए गए सभी पोस्टर और फ्लेक्स तत्काल हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाना चाहिए।साथ ही, जिन लोगों या संगठनों द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है, उनके खिलाफ आर्थिक दंड के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

यह मजाक नहीं, जान का सवाल है

वायरल वीडियो देखने के बाद लोग भले ही सोशल मीडिया पर मजाक कर रहे हों कि “नेता जी ने महिला को शॉल ओढ़ा दी”, लेकिन असलियत यह है कि यह घटना किसी बड़े हादसे में बदल सकती थी। कुछ सेकंड की यह लापरवाही किसी परिवार की पूरी जिंदगी बदल सकती थी।जनता को भी जागरूक होने की जरूरत है। जहां कहीं भी खतरनाक तरीके से लगे बैनर या होर्डिंग दिखाई दें, उनकी सूचना संबंधित नगर निगम या प्रशासन को दी जानी चाहिए।लोकतंत्र में नेताओं की पहचान उनके काम से होनी चाहिए, न कि सड़कों पर टंगे हजारों पोस्टरों से। जनता का सम्मान विशाल बैनरों से नहीं, बल्कि सुरक्षित सड़कें और जिम्मेदार व्यवस्था देने से होता है।क्योंकि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो अगली बार किसी के ऊपर केवल बैनर नहीं गिरेगा… किसी परिवार की पूरी दुनिया उजड़ सकती है।

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