हूतियों ने फिर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें, मोखा बंदरगाह पर हमला; लाल सागर में बढ़ा तनाव, क्या है खतरा?

Editorial
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सना यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थित बलों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। लाल सागर के तट पर स्थित मोखा बंदरगाह को बुधवार को हूती समूह ने एक बार फिर बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। सरकार समर्थित मीडिया के अनुसार, हमले में दो मिसाइलें बंदरगाह के समुद्री घाट से टकराईं, जिससे वहां की सुविधाओं को नुकसान पहुंचा। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हमले में तत्काल किसी के मारे जाने की खबर नहीं है।यह हमला ऐसे समय हुआ है जब मोखा और इसके आसपास के इलाकों में पिछले कुछ दिनों से हूतियों की सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। इससे पहले मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन हमलों में सरकारी सैनिकों समेत कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की जानकारी दी गई है। लगातार हो रहे हमलों ने यमन में बने सापेक्षिक सुकून के बीच फिर से बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है।

मोखा बंदरगाह पर हूतियों ने क्यों किया हमला?

हूती समूह का दावा है कि मोखा में उसके हालिया हमलों का निशाना सऊदी अरब समर्थित यमनी बलों के ठिकाने और सैनिकों के जमावड़े थे। हूतियों का आरोप है कि ये बल उनके नियंत्रण वाले इलाकों के खिलाफ सैन्य अभियान की तैयारी कर रहे हैं।हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरिया के अनुसार, मोखा और मारिब में सैनिकों के जमावड़े, हथियारों के भंडार और कमांड सेंटरों को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया गया। संगठन ने इन हमलों को सटीक बताते हुए नुकसान और हताहतों का दावा किया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल नहीं हुई है और सऊदी अरब या यमनी सरकार की ओर से भी सभी दावों की पुष्टि सामने नहीं आई है।

बाब अल-मंदब में वाणिज्यिक जहाज पर हमला

लाल सागर में चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि मंगलवार को बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक वाणिज्यिक जहाज को भी मिसाइल हमले का सामना करना पड़ा। सरकार समर्थित तटरक्षक बल के अनुसार, ‘तिहामा’ नाम के जहाज पर लगातार मिसाइल हमले किए गए।रिपोर्ट के मुताबिक हमले के बाद जहाज में आग लग गई और उसे भारी नुकसान पहुंचा। घटना में छह लोगों की मौत और 10 अन्य के घायल होने की जानकारी दी गई। मृतकों में जहाज के चार चालक दल के सदस्य शामिल बताए गए हैं, जिनमें तीन पाकिस्तानी और एक इंडोनेशियाई नागरिक था। इसके अलावा सरकार समर्थित नौसैनिक बल के दो सदस्यों की भी मौत की जानकारी सामने आई है।बचाव दल और सरकारी बलों ने अभियान चलाकर घायलों को जहाज से बाहर निकाला और उन्हें इलाज के लिए भेजा। इस घटना ने लाल सागर से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।

क्या फिर बढ़ सकता है यमन का तनाव?

यमन में लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के बीच 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से लागू हुई युद्धविराम व्यवस्था के बाद हिंसा में अपेक्षाकृत कमी आई थी। हालांकि हाल के दिनों में मिसाइल और ड्रोन हमलों की बढ़ती घटनाएं इस सापेक्षिक शांति के लिए चुनौती बन रही हैं।अगर हमले लगातार जारी रहते हैं तो यमन के अलग-अलग गुटों के बीच तनाव फिर व्यापक सैन्य टकराव में बदल सकता है। खासकर मोखा, मारिब और बाब अल-मंदब जैसे रणनीतिक इलाकों में सैन्य गतिविधियों के बढ़ने से स्थिति और जटिल हो सकती है।

लाल सागर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है बाब अल-मंदब?

बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। इसके जरिए एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच बड़ी मात्रा में व्यापारिक जहाज आवाजाही करते हैं।इस समुद्री मार्ग में अस्थिरता का असर केवल यमन या आसपास के देशों तक सीमित नहीं रहता। अगर जहाजों पर हमले बढ़ते हैं और कंपनियां इस रास्ते से दूरी बनाने लगती हैं तो उन्हें लंबा वैकल्पिक समुद्री मार्ग अपनाना पड़ सकता है। इससे माल ढुलाई का समय और लागत बढ़ सकती है।ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से भी यह क्षेत्र बेहद अहम है। लाल सागर और आसपास के समुद्री मार्गों में तनाव बढ़ने पर तेल, गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं की वैश्विक सप्लाई पर दबाव पड़ सकता है।

क्या समुद्री कारोबार पर पड़ेगा असर?

लाल सागर में लगातार हमलों का सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कारोबार पर पड़ सकता है। व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षा जोखिम बढ़ने की स्थिति में कंपनियां अपने मार्ग बदलने या अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था अपनाने पर मजबूर हो सकती हैं।मार्ग बदलने से जहाजों को लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। इसका असर ईंधन खर्च, बीमा प्रीमियम और माल पहुंचाने के समय पर पड़ सकता है। अंततः इसका प्रभाव वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और उपभोक्ता बाजारों तक पहुंच सकता है।

हूती हमलों का क्षेत्रीय असर क्या होगा?

हूतियों की गतिविधियां पहले से ही यमन के भीतर राजनीतिक और सैन्य संघर्ष का हिस्सा रही हैं। लेकिन जब हमले लाल सागर और बाब अल-मंदब जैसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग तक पहुंचते हैं, तो उनका प्रभाव क्षेत्रीय सीमाओं से बाहर निकल जाता है।सऊदी समर्थित यमनी बलों के साथ तनाव बढ़ने की स्थिति में सैन्य कार्रवाई का दायरा भी बढ़ सकता है। इससे यमन में मानवीय स्थिति और खराब होने का खतरा रहेगा। दूसरी ओर, लाल सागर में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ सकता है।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मोखा और बाब अल-मंदब में हालिया हमले कुछ दिनों की सैन्य गतिविधि तक सीमित रहेंगे या इनके जरिए यमन में संघर्ष का नया दौर शुरू होगा। अगर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रहते हैं, तो लाल सागर में जहाजों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चुनौती यह होगी कि क्षेत्र में तनाव को और बढ़ने से कैसे रोका जाए। यमन में स्थायी राजनीतिक समाधान और युद्धविराम की व्यवस्था को मजबूत करना ही लंबे समय में स्थिति को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी रास्ता हो सकता है।Houthis Missile Attack ने एक बार फिर लाल सागर और यमन के आसपास सुरक्षा संकट की चिंता बढ़ा दी है। मोखा बंदरगाह पर बैलिस्टिक मिसाइल हमला और बाब अल-मंदब से गुजर रहे वाणिज्यिक जहाज पर हमले की घटना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में जोखिम अभी खत्म नहीं हुआ है।अगर तनाव बढ़ता है तो इसका असर यमन की सुरक्षा स्थिति के साथ-साथ लाल सागर के समुद्री व्यापार, वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में हूतियों और सरकार समर्थित बलों की गतिविधियों के साथ-साथ बाब अल-मंदब में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

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