दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में संसद मार्च के दौरान हुए हंगामे और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि “भारतीय जनता पार्टी की सरकार अब लोकतांत्रिक सरकार की तरह नहीं, बल्कि अहंकार की सरकार की तरह काम कर रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की समस्याएं सुनने के बजाय उन्हें सड़कों पर लाठियों और आंसू गैस से जवाब दे रही है।संसद परिसर के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि आज देश का युवा अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार उनकी आवाज सुनने के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध को कुचलना किसी भी सरकार के लिए शुभ संकेत नहीं है।
“युवाओं की आवाज दबाना लोकतंत्र के लिए खतरा”
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर लाखों छात्र परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं तो सरकार का पहला कर्तव्य उनकी बात सुनना है। लेकिन मौजूदा सरकार संवाद के बजाय टकराव का रास्ता चुन रही है।उन्होंने कहा कि संसद के बाहर छात्रों पर बल प्रयोग करना इस बात का प्रमाण है कि सरकार आलोचना सुनने को तैयार नहीं है। लोकतंत्र में असहमति को जगह मिलनी चाहिए, क्योंकि यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।
“अगर परीक्षा में गड़बड़ी हुई तो जिम्मेदार कौन?”
सपा प्रमुख ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि परीक्षा कराने की जिम्मेदारी सरकार की होती है। यदि कहीं चूक हुई है तो जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय सवाल उठाने वालों को ही निशाना बना रही है।
“मंत्री नहीं हटेंगे, लेकिन छात्रों पर लाठी चलेगी?”
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार अपने मंत्रियों को बचाने में लगी हुई है, जबकि छात्र न्याय की मांग कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं तो सरकार को आत्ममंथन करना चाहिए। छात्रों की मांगों पर विचार करने के बजाय पुलिस कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
“रोजगार मिलता तो युवा सड़क पर नहीं होते”
उन्होंने बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यदि युवाओं को समय पर रोजगार और अवसर मिले होते तो आज उन्हें अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने की नौबत नहीं आती।अखिलेश ने कहा कि देश का युवा भविष्य चाहता है, संघर्ष नहीं। लेकिन सरकार युवाओं की उम्मीदों को पूरा करने में असफल रही है।
सरकार पर लगाया अहंकार का आरोप
सपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा सरकार जनता की सरकार की तरह नहीं, बल्कि अहंकार की सरकार की तरह व्यवहार कर रही है।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हर विरोध को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लेती है और फिर उसे दबाने का प्रयास करती है। लोकतंत्र में सरकार का काम जनता की बात सुनना होता है, न कि असहमति को बलपूर्वक रोकना।
गांधी का किया जिक्र
अपने बयान में अखिलेश यादव ने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का लोकतांत्रिक इतिहास संवाद, सत्याग्रह और शांतिपूर्ण विरोध की परंपरा पर आधारित रहा है।उन्होंने कहा कि जब विरोध की आवाज सुनी जाती है तभी लोकतंत्र मजबूत होता है। यदि सरकार केवल दमन का रास्ता अपनाएगी तो इससे जनता और सत्ता के बीच दूरी बढ़ेगी।
संसद मार्च के दौरान बढ़ा राजनीतिक तापमान
दिल्ली में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के संसद मार्च के दौरान हुए घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल भी गर्मा दिया है। विपक्षी दल लगातार सरकार से छात्रों की मांगों पर बातचीत करने की अपील कर रहे हैं, जबकि सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दे रही है।संसद परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनावपूर्ण स्थिति भी देखने को मिली।

अब निगाहें सरकार की अगली रणनीति पर
अखिलेश यादव के इस बयान के बाद विपक्ष ने सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश तेज कर दी है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।फिलहाल शिक्षा व्यवस्था, छात्रों की मांगों और विरोध प्रदर्शनों को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। ऐसे में सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार संवाद का रास्ता अपनाती है या फिर टकराव की स्थिति और आगे बढ़ती है।
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