नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। नई टीम में पार्टी ने आगामी चुनावी राज्यों को खास प्राथमिकता दी है। सबसे ज्यादा फोकस उत्तर प्रदेश पर दिखाई दे रहा है, जहां से आठ नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जगह मिली है। इसे आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी की रणनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।बीजेपी की नई टीम में उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब, उत्तराखंड और हरियाणा जैसे राज्यों को भी महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व मिला है। वहीं, अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देकर पार्टी ने संगठन में जातीय और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है। खास तौर पर उत्तर प्रदेश में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के नेताओं को जिम्मेदारी देकर पार्टी ने समाजवादी पार्टी के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण की काट तैयार करने का संकेत दिया है।
- यूपी से आठ नेताओं को मिली अहम जिम्मेदारी
- पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग पर खास फोकस
- ब्राह्मण और दलित चेहरे भी टीम में शामिल
- यूपी में PDA की काट की रणनीति
- पंजाब में सिख समुदाय पर बीजेपी का फोकस
- उत्तराखंड में ब्राह्मण-ठाकुर संतुलन
- हरियाणा से भी कई नेताओं को जिम्मेदारी
- दूसरे दलों से आए नेताओं को भी मौका
- गोवा और मणिपुर को नहीं मिला प्रतिनिधित्व
- चुनावी तैयारी के लिहाज से अहम फैसला
यूपी से आठ नेताओं को मिली अहम जिम्मेदारी
नितिन नबीन की नई टीम में उत्तर प्रदेश को सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व मिला है। प्रदेश से आठ नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जगह दी गई है। इनमें दो महामंत्री, दो उपाध्यक्ष और दो मंत्री समेत अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल हैं।बीजेपी की इस रणनीति को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राजनीतिक राज्य है और यहां होने वाले विधानसभा चुनाव का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ता है। लोकसभा चुनाव में पार्टी को मिले झटके के बाद बीजेपी अब प्रदेश में संगठन को नए सामाजिक समीकरणों के साथ मजबूत करने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।
पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग पर खास फोकस
नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से तीन ओबीसी चेहरों को जगह दी गई है। इसके अलावा दो मुस्लिम नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। प्रो. तारिक मंसूर और कुंवर बासित अली को अहम पद देकर पार्टी ने अल्पसंख्यक समुदाय तक अपनी पहुंच बढ़ाने का संकेत दिया है।कुंवर बासित अली संघ के मुस्लिम राष्ट्रीय मंच से जुड़े रहे हैं और बीजेपी के मुस्लिम संपर्क अभियान में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। वहीं, ओबीसी समाज की महिला नेताओं को भी राष्ट्रीय टीम में स्थान दिया गया है। इसे सामाजिक प्रतिनिधित्व के साथ-साथ महिला मतदाताओं तक पहुंच मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

ब्राह्मण और दलित चेहरे भी टीम में शामिल
बीजेपी ने केवल पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को भी नई टीम में पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया है। पूर्वांचल से आने वाले ब्राह्मण नेता और बस्ती से दो बार सांसद रहे हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।वहीं धौरहरा की पूर्व सांसद रेखा वर्मा को लगातार तीसरी बार राष्ट्रीय संगठन में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। अमेठी की पूर्व सांसद स्मृति ईरानी की भी लंबे समय बाद संगठन में वापसी हुई है।दलित और ओबीसी प्रतिनिधित्व को भी मजबूत किया गया है। बुलंदशहर के सांसद डॉ. भोला सिंह और ओबीसी चेहरा संगीता यादव को राष्ट्रीय टीम में मंत्री बनाया गया है। राज्यसभा सांसद अमरपाल मौर्या को ओबीसी मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।
यूपी में PDA की काट की रणनीति
बीजेपी की नई टीम में यूपी को मिले प्रतिनिधित्व को राजनीतिक नजरिए से काफी अहम माना जा रहा है। समाजवादी पार्टी का पीडीए फॉर्मूला पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समूहों को जोड़ने पर आधारित रहा है। ऐसे में बीजेपी की नई टीम में इन वर्गों के नेताओं को जगह देना पार्टी की अपनी सामाजिक पहुंच बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।पार्टी की कोशिश है कि पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों के साथ दलित और अल्पसंख्यक समुदायों में भी अपना आधार मजबूत किया जाए। इसके साथ ही ब्राह्मण और अन्य पारंपरिक समर्थक वर्गों को भी संगठन में प्रतिनिधित्व देकर संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।
पंजाब में सिख समुदाय पर बीजेपी का फोकस
पंजाब के लिए भी बीजेपी की नई टीम में महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश दिखाई देता है। पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। उन्हें पंजाब में पार्टी के प्रमुख सिख चेहरों में से एक माना जाता है।इसके अलावा अमृतसर से जुड़े तरुण चुघ को राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी और पंजाब से जुड़े वरिष्ठ नेता सौदान सिंह को राष्ट्रीय सह महामंत्री संगठन की जिम्मेदारी दी गई है। आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में आए राज्यसभा सांसद संदीप पाठक को भी राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है।मनप्रीत बादल को संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका दिए जाने को पंजाब के सिख समुदाय के बीच बीजेपी की पहुंच बढ़ाने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
उत्तराखंड में ब्राह्मण-ठाकुर संतुलन
उत्तराखंड में बीजेपी ने सामाजिक संतुलन का खास ध्यान रखा है। राज्य से तीन अनुभवी नेताओं को राष्ट्रीय टीम में जगह मिली है। पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि अनिल बलूनी को मीडिया संयोजक और आलोक भट्ट को सोशल मीडिया टीम में सह संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है।उत्तराखंड की राजनीति में ब्राह्मण और ठाकुर समुदाय का महत्वपूर्ण प्रभाव माना जाता है। ऐसे में दोनों प्रमुख सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देकर पार्टी ने संगठनात्मक और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की है।
हरियाणा से भी कई नेताओं को जिम्मेदारी
बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में हरियाणा से भी कई प्रमुख नेताओं को जगह मिली है। राज्यसभा सांसद और करनाल के पूर्व सांसद संजय भाटिया तथा हरियाणा बीजेपी के प्रभारी सतीश पूनिया को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है।गुरुग्राम निवासी और बीजेपी के पूर्व सोशल मीडिया प्रमुख अरुण यादव को राष्ट्रीय सोशल मीडिया सह संयोजक बनाया गया है। वहीं, पूर्व सांसद डॉ. सुधा यादव के बेटे और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सिद्धार्थ यादव को मीडिया सह संयोजक की जिम्मेदारी मिली है। हरियाणा के पूर्व प्रभारी बिप्लब कुमार देब को भी राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है।हालांकि पार्टी के वरिष्ठ जाट नेता ओमप्रकाश धनखड़ को नई राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिली है। यह फैसला भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।
दूसरे दलों से आए नेताओं को भी मौका
बीजेपी की नई टीम में दूसरे दलों से बीजेपी में आए नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। आम आदमी पार्टी से बीजेपी में आए संदीप पाठक और कांग्रेस से आए रोहन गुप्ता को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है।इससे संकेत मिलता है कि बीजेपी संगठन के विस्तार के साथ अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि से आए नेताओं को भी राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी देने की रणनीति पर काम कर रही है।
गोवा और मणिपुर को नहीं मिला प्रतिनिधित्व
नई टीम में जहां उत्तर प्रदेश को सबसे ज्यादा तवज्जो मिली, वहीं आगामी चुनाव वाले गोवा और मणिपुर से किसी नेता को राष्ट्रीय टीम में प्रतिनिधित्व नहीं मिला। दोनों राज्यों का संगठनात्मक प्रतिनिधित्व इस बार खाली रहा।दिलचस्प बात यह भी है कि बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन बिहार से आते हैं, लेकिन नई राष्ट्रीय टीम में बिहार को सिर्फ दो चेहरे मिले हैं। इससे राजनीतिक संदेश यह माना जा रहा है कि टीम के गठन में अध्यक्ष के गृहप्रदेश की तुलना में चुनावी जरूरत, सामाजिक समीकरण और संगठनात्मक रणनीति को अधिक महत्व दिया गया है।
चुनावी तैयारी के लिहाज से अहम फैसला
बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में राज्यों और सामाजिक समूहों का संतुलन बताता है कि पार्टी आगामी चुनावों को लेकर संगठनात्मक स्तर पर व्यापक तैयारी कर रही है। खासकर उत्तर प्रदेश में आठ नेताओं को जगह देना पार्टी के लिए राज्य की अहमियत को दर्शाता है।कुल मिलाकर, नितिन नबीन की नई टीम में उत्तर प्रदेश को सबसे ज्यादा तवज्जो देकर बीजेपी ने चुनावी रणनीति का स्पष्ट संकेत दिया है। पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के नेताओं को आगे बढ़ाने के साथ ब्राह्मण और अन्य पारंपरिक सामाजिक आधार को भी प्रतिनिधित्व देकर पार्टी ने संतुलन साधने की कोशिश की है। अब देखना होगा कि यह संगठनात्मक रणनीति आने वाले विधानसभा चुनावों में बीजेपी के लिए कितना प्रभावी साबित होती है।
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