वाराणसी काशी में गंगा के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की स्थिति के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार से फोन पर बातचीत कर जमीनी हालात की जानकारी ली। वाराणसी के सांसद और प्रधानमंत्री मोदी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों, गंगा के जलस्तर और राहत शिविरों में की जा रही व्यवस्थाओं के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित लोगों को किसी भी तरह की परेशानी न हो और राहत एवं बचाव कार्यों में कोई कमी न रहने पाए।गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ वाराणसी के कई इलाकों में बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री की ओर से सीधे जिलाधिकारी से स्थिति की जानकारी लेने को प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- PM मोदी ने फोन पर डीएम से पूछी बाढ़ की स्थिति
- राहत शिविरों की व्यवस्थाओं पर खास जोर
- गंगा का बढ़ता जलस्तर बना चुनौती
- वाराणसी में 61 राहत शिविर और 21 बाढ़ चौकियां
- नाव से प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच रहे अधिकारी
- भोजन-पानी और सफाई की व्यवस्था पर निगरानी
- अतिरिक्त राहत सामग्री की जरूरत पर तत्काल कार्रवाई
- लगातार स्थिति पर नजर रखने के निर्देश
- बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता
PM मोदी ने फोन पर डीएम से पूछी बाढ़ की स्थिति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार से टेलीफोन पर बातचीत के दौरान वाराणसी में बाढ़ की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी ली। उन्होंने विशेष रूप से गंगा के बढ़ते जलस्तर, प्रभावित क्षेत्रों और वहां रहने वाले लोगों की स्थिति के बारे में पूछा।प्रधानमंत्री ने यह भी जाना कि प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित लोगों को किस तरह की मदद उपलब्ध कराई जा रही है। राहत शिविरों में पहुंचाए गए परिवारों की संख्या, भोजन-पानी की व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर भी जानकारी ली गई।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित लोगों की जरूरतों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए और राहत कार्यों में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।
राहत शिविरों की व्यवस्थाओं पर खास जोर
बाढ़ के बीच सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। प्रधानमंत्री ने राहत शिविरों में उपलब्ध व्यवस्थाओं के बारे में भी डीएम से जानकारी ली।उन्होंने भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि राहत शिविरों में रह रहे लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।प्रशासन को यह भी निर्देश दिया गया कि जिन क्षेत्रों में राहत सामग्री की अतिरिक्त आवश्यकता है, वहां तत्काल व्यवस्था की जाए। प्रभावित लोगों तक भोजन, पानी और जरूरी सामान समय पर पहुंचाया जाए।

गंगा का बढ़ता जलस्तर बना चुनौती
वाराणसी में बाढ़ की स्थिति का प्रमुख कारण गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी है। गंगा के बढ़ते पानी का असर निचले इलाकों पर पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में लोगों को अपने घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों का रुख करना पड़ा है।इसके साथ ही वरुणा नदी के जलस्तर में भी बढ़ोतरी से शहर के कुछ इलाकों में परेशानी बढ़ी है। प्रशासन लगातार संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए है।अधिकारियों की टीमें प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर रही हैं और जरूरत के अनुसार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
वाराणसी में 61 राहत शिविर और 21 बाढ़ चौकियां
बाढ़ की चुनौती से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक स्तर पर तैयारियां की हैं। प्रशासन की ओर से वाराणसी में 61 राहत शिविर और 21 बाढ़ चौकियां संचालित करने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा राहत और बचाव कार्यों के लिए 198 नावों की व्यवस्था की गई है।इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों तक प्रशासन और राहत टीमों की पहुंच बनाए रखना है। नावों के जरिए ऐसे इलाकों में भी पहुंचने की तैयारी है जहां सड़क मार्ग से जाना मुश्किल हो गया है।बाढ़ चौकियों के माध्यम से संवेदनशील इलाकों की निगरानी और राहत कार्यों के समन्वय पर भी जोर दिया जा रहा है।
नाव से प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच रहे अधिकारी
बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी भी प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। अधिकारियों ने नाव के जरिए आदि केशव से सरायमोहाना तक पहुंचकर बाढ़ प्रभावित लोगों से बातचीत की और उनकी समस्याओं की जानकारी ली।जिला प्रशासन की ओर से लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री और जरूरी सहायता पहुंचाई जा सके। जिन इलाकों में पानी अधिक है, वहां नावों के माध्यम से लोगों की आवाजाही और राहत कार्यों को संचालित किया जा रहा है।
भोजन-पानी और सफाई की व्यवस्था पर निगरानी
राहत शिविरों में रह रहे लोगों के लिए भोजन और पेयजल के साथ साफ-सफाई की व्यवस्था भी प्रशासन की प्राथमिकता में है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि राहत शिविरों में मूलभूत सुविधाओं की नियमित निगरानी की जाए।बाढ़ के दौरान स्वच्छ पानी और साफ-सफाई का विशेष महत्व होता है। इसी वजह से प्रशासन शिविरों में उपलब्ध सुविधाओं की लगातार समीक्षा कर रहा है।प्रधानमंत्री ने भी बातचीत के दौरान यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल आवश्यक सुविधाएं मिलें और किसी भी जरूरी वस्तु की कमी होने पर उसे तुरंत पूरा किया जाए।
अतिरिक्त राहत सामग्री की जरूरत पर तत्काल कार्रवाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां भी राहत सामग्री की अतिरिक्त जरूरत महसूस हो, वहां बिना देरी किए उसकी व्यवस्था की जाए।प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री तेजी से पहुंचाने के लिए प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आवश्यकता के अनुसार राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
लगातार स्थिति पर नजर रखने के निर्देश
प्रधानमंत्री ने जिलाधिकारी से बातचीत में बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों पर लगातार सतर्क नजर बनाए रखने को कहा। उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर किसी भी प्रकार की कमी न रहने देने और प्रभावित लोगों को अविलंब सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया।इससे पहले भी जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को लेकर कई स्तरों पर तैयारियां की गई हैं। अब प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासन ने राहत कार्यों में और तेजी लाने पर जोर दिया है।
बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता
वाराणसी में गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना और उन्हें समय पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। राहत शिविरों, बाढ़ चौकियों और नावों की व्यवस्था इसी दिशा में की गई है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सीधे जिलाधिकारी से स्थिति की जानकारी लेने के बाद प्रशासनिक अमला और अधिक सक्रिय हो गया है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।फिलहाल प्रशासन की नजर गंगा और वरुणा के जलस्तर के साथ-साथ निचले इलाकों की स्थिति पर बनी हुई है। राहत शिविरों में पहुंचाए गए लोगों की सुविधाओं की निगरानी की जा रही है और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने की तैयारी है। बाढ़ की स्थिति सामान्य होने तक प्रशासन की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय रहेंगी।
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