नई दिल्ली देश की राजनीति में एक बार फिर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तेज होता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात होने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। खरगे ने ऐलान किया कि वह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात को लेकर कांग्रेस की ओर से पत्र भी भेजे जाने की बात कही गई है।खरगे ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस नेता मुख्य न्यायाधीश के सामने कोई मांग रखने या दबाव बनाने नहीं जाएंगे। उनका कहना है कि वे हाथ जोड़कर अपनी बात रखेंगे और देश में मौजूदा परिस्थितियों को लेकर अपनी चिंता से उन्हें अवगत कराएंगे। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात और इसके संभावित संदेश को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
‘हाथ जोड़कर करेंगे गुजारिश’, CJI से मिलने की तैयारी
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के मुताबिक, उन्होंने और राहुल गांधी ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र लिखा है। दोनों नेता सोमवार को उनसे मुलाकात कर देश के मौजूदा हालात पर अपनी बात रखना चाहते हैं। खबर के अनुसार, मुलाकात के लिए शाम चार से पांच बजे के बीच का समय तय किया गया है।खरगे ने कहा कि इस मुलाकात का उद्देश्य मुख्य न्यायाधीश को परिस्थितियों से अवगत कराना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस की ओर से किसी तरह की मांग नहीं रखी जाएगी। वे विनम्रता के साथ अपनी बात कहेंगे और मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध करेंगे कि देश में जो कुछ हो रहा है, उस पर उनकी चिंताओं को सुना जाए।कांग्रेस अध्यक्ष के बयान से साफ है कि पार्टी इस मुलाकात को देश के मौजूदा राजनीतिक और लोकतांत्रिक माहौल से जुड़े सवाल उठाने के अवसर के रूप में देख रही है। मुलाकात में किन विशिष्ट मुद्दों पर चर्चा होगी और मुख्य न्यायाधीश की ओर से क्या प्रतिक्रिया आएगी, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

पीएम मोदी और अमित शाह पर खरगे का सीधा हमला
मल्लिकार्जुन खरगे ने देश के हालात को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लेते हुए कहा कि देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात बनाए जा रहे हैं। खरगे का आरोप है कि मौजूदा परिस्थितियों के लिए केंद्र सरकार का रवैया जिम्मेदार है।कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी इन परिस्थितियों के खिलाफ आवाज उठा रही है। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिकों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाना विपक्ष की जिम्मेदारी है।खरगे के इस बयान ने केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर कांग्रेस मौजूदा हालात को लेकर चिंता जता रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार पर लगाए गए इन आरोपों को खरगे के राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए। इन आरोपों के समर्थन में खबर में कोई स्वतंत्र निष्कर्ष सामने नहीं रखा गया है।

32 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने पुलिस बल की भारी तैनाती का जिक्र करते हुए भी सरकार पर निशाना साधा। खरगे के अनुसार, हाल में करीब 32 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। उन्होंने इस संख्या को आधार बनाकर सवाल उठाया कि आखिर सरकार को किस बात का डर है।खरगे ने पुलिस बल की तैनाती को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़ते हुए इसे सरकार की आशंकाओं का संकेत बताया। उनके बयान का मकसद यह दिखाना था कि विपक्ष के विरोध और उसकी गतिविधियों को लेकर किस स्तर की सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है। पुलिसकर्मियों की तैनाती की बताई गई संख्या और उसके पीछे के कारणों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। इसलिए इसे खरगे के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी भी सुरक्षा व्यवस्था के पीछे की वजहों को समझने के लिए संबंधित अधिकारियों का पक्ष और आधिकारिक जानकारी भी महत्वपूर्ण होगी।
इंडिया ब्लॉक का मार्च, CJI को ज्ञापन देने की तैयारी
मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक ने सोमवार को दिल्ली में मार्च निकालने और मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपने की योजना की जानकारी दी है। संबंधित रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई जा रही है।विपक्ष की ओर से मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इन मुद्दों पर अपनी चिंताएं सामने रखना चाहते हैं। हालांकि, सोमवार को प्रस्तावित मार्च और खरगे-राहुल गांधी की मुलाकात से जुड़े कार्यक्रमों का अंतिम स्वरूप तथा उनकी विस्तृत कार्यवाही संबंधित पक्षों की आधिकारिक जानकारी से ही स्पष्ट होगी।इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी प्रक्रिया, लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका और विपक्ष के विरोध के तरीकों को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष अपनी मांगों को किस तरह आगे बढ़ाता है और संबंधित संस्थाओं की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
CJI से मुलाकात पर टिकी राजनीतिक नजरें
मल्लिकार्जुन खरगे का यह बयान ऐसे समय आया है, जब केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर राजनीतिक मतभेद सामने आ रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने अपनी बात रखने के लिए मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की घोषणा की है और इसे किसी मांग के बजाय विनम्र अनुरोध बताया है।अब सोमवार को प्रस्तावित मुलाकात पर सबकी नजरें रहेंगी। यह जानना अहम होगा कि खरगे और राहुल गांधी मुख्य न्यायाधीश के सामने किन मुद्दों को प्रमुखता से रखते हैं और मुलाकात के बाद कांग्रेस की ओर से क्या जानकारी साझा की जाती है।देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात होने का आरोप कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लगाया है। यह उनका राजनीतिक दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि अलग से आवश्यक है। इतना जरूर है कि मुख्य न्यायाधीश से प्रस्तावित मुलाकात और इंडिया ब्लॉक के मार्च ने राष्ट्रीय राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
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