फर्रुखाबाद में गंगा खतरे के निशान पर, रामगंगा भी बढ़ी

Editorial
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रिपोर्ट :दीपचंद्र दीक्षित

फर्रुखाबाद जिले में गंगा और रामगंगा नदियों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंचकर बना हुआ है, जबकि रामगंगा नदी के जलस्तर में भी लगातार बढ़ाव दर्ज किया गया है। जलस्तर की स्थिति को देखते हुए बाढ़ नियंत्रण विभाग और प्रशासन ने तटीय इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।सोमवार को बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट में गंगा और रामगंगा नदियों के जलस्तर की स्थिति सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार लोहिया सेतु पांचालघाट पर गंगा का जलस्तर सुबह और शाम दोनों समय 137.10 मीटर दर्ज किया गया। गंगा का चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर और खतरे का निशान 137.10 मीटर निर्धारित है। ऐसे में गंगा का जलस्तर फिलहाल खतरे के निशान पर बना हुआ है।

खतरे के निशान पर गंगा का जलस्तर

फर्रुखाबाद में गंगा नदी के जलस्तर पर प्रशासन की लगातार नजर बनी हुई है। लोहिया सेतु यानी पांचालघाट पर सोमवार सुबह गंगा का जलस्तर 137.10 मीटर दर्ज किया गया। शाम को भी जलस्तर इसी स्तर पर रहा।गंगा का चेतावनी स्तर 136.60 मीटर है, जबकि खतरे का निशान 137.10 मीटर निर्धारित है। वर्तमान जलस्तर खतरे के निशान के बराबर होने के कारण नदी के आसपास के तटीय और निचले इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी भी निचले क्षेत्रों के लिए परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में बाढ़ नियंत्रण विभाग नदी के जलस्तर में होने वाले हर बदलाव पर नजर रख रहा है।

रामगंगा नदी के जलस्तर में भी बढ़ाव

गंगा के साथ-साथ रामगंगा नदी का जलस्तर भी बढ़ा है। बाढ़ नियंत्रण विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक बहमदत्त द्विवेदी सेतु पर रामगंगा का जलस्तर सोमवार सुबह 136.80 मीटर दर्ज किया गया था। शाम तक इसमें पांच सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई और जलस्तर 136.85 मीटर पहुंच गया।रामगंगा नदी का चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर और खतरे का निशान 137.10 मीटर है। इस लिहाज से रामगंगा का जलस्तर अभी खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन चेतावनी बिंदु से ऊपर बना हुआ है।रामगंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी होने पर नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में परेशानी बढ़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से संबंधित विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

फर्रुखाबाद में गंगा खतरे के निशान पर, रामगंगा भी बढ़ी
फर्रुखाबाद में गंगा खतरे के निशान पर, रामगंगा भी बढ़ी

नदियों में छोड़े जा रहे पानी पर भी नजर

बाढ़ नियंत्रण कक्ष की रिपोर्ट के अनुसार नरौरा स्केप से गंगा नदी में 99,297 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। वहीं रामगंगा नदी में विभिन्न बैराजों से पानी की मात्रा भी दर्ज की गई है।रिपोर्ट के मुताबिक खो बैराज से 5,427 क्यूसेक, हरेली बैराज से 393 क्यूसेक और रामनगर बैराज से 15,340 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। इन स्रोतों से रामगंगा नदी में कुल 21,168 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया।नदियों में पानी की आवक और जलस्तर की स्थिति बाढ़ की संभावित स्थिति को प्रभावित कर सकती है। इसलिए प्रशासन बैराजों से आने वाले पानी और नदियों के जलस्तर की निगरानी कर रहा है।

तटीय क्षेत्रों में बढ़ाई गई निगरानी

गंगा का जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंचने के बाद नदी के आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीमें जलस्तर पर लगातार नजर रख रही हैं।निचले इलाकों में किसी भी तरह की स्थिति बनने पर तत्काल कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है।प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां पूरी रखना है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को भी जलस्तर में होने वाले बदलाव की जानकारी देने और सावधानी बरतने पर जोर दिया जा रहा है।

बढ़ते जलस्तर से ग्रामीणों की चिंता बढ़ी

गंगा और रामगंगा के किनारे बसे इलाकों में नदी का बढ़ता जलस्तर लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। खासकर वे क्षेत्र जो निचले इलाकों में आते हैं, वहां रहने वाले ग्रामीण जलस्तर पर लगातार नजर रख रहे हैं।हालांकि फिलहाल प्रशासन की ओर से किसी बड़े खतरे या व्यापक बाढ़ की स्थिति की जानकारी नहीं दी गई है। लेकिन गंगा के खतरे के निशान पर बने रहने और रामगंगा के चेतावनी बिंदु से ऊपर बहने के कारण सतर्कता जरूरी है।

प्रशासन की स्थिति पर पैनी नजर

फर्रुखाबाद में बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के बाद प्रशासन और सिंचाई विभाग की निगरानी और बढ़ गई है। अधिकारियों का ध्यान गंगा और रामगंगा दोनों नदियों के जलस्तर, पानी की आवक और तटीय क्षेत्रों की स्थिति पर है।फिलहाल गंगा 137.10 मीटर के खतरे के निशान पर बनी हुई है, जबकि रामगंगा का जलस्तर 136.85 मीटर दर्ज किया गया है। आने वाले समय में नदियों का जलस्तर बढ़ता है या घटता है, यह पानी की आवक और मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा।ऐसे में फर्रुखाबाद के तटीय क्षेत्रों के लोगों के लिए अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है और बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

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