लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी कुकरेल नाइट सफारी परियोजना को आखिरकार सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। देश की सर्वोच्च अदालत ने लखनऊ के कुकरेल रिजर्व फॉरेस्ट में प्रस्तावित नाइट सफारी और आधुनिक नेचर पार्क के निर्माण को सशर्त मंजूरी देते हुए स्पष्ट किया है कि विकास कार्यों को पूरी तरह रोकना उचित नहीं है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सभी मानकों का कड़ाई से पालन किया जाना अनिवार्य होगा।प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना समय की आवश्यकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना के विरोध में अपनी आपत्तियां दर्ज कराने वाले पक्षकार अपनी बात परियोजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के समक्ष रख सकते हैं, ताकि पर्यावरणीय चिंताओं पर भी उचित विचार किया जा सके।

1510 करोड़ रुपये की ड्रीम परियोजना
कुकरेल नाइट सफारी परियोजना उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी पर्यटन और पर्यावरणीय परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।करीब 1510 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली इस परियोजना का उद्देश्य लखनऊ को अंतरराष्ट्रीय स्तर के ईको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करना है।सरकार का लक्ष्य है कि परियोजना का निर्माण कार्य दो वर्षों के भीतर पूरा कर लिया जाए।
900 एकड़ में विकसित होगी नाइट सफारी
प्रस्तावित परियोजना लगभग 900 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित की जाएगी।सरकार का दावा है कि यह केवल एक नाइट सफारी नहीं होगी, बल्कि आधुनिक वन्यजीव संरक्षण, प्राकृतिक पर्यटन और पर्यावरण शिक्षा का बड़ा केंद्र बनेगी।परियोजना में हरियाली को प्राथमिकता देते हुए बड़ी संख्या में पौधारोपण, प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण और स्थानीय जैव विविधता को सुरक्षित रखने की योजना तैयार की गई है।

क्या होगा खास?
कुकरेल नाइट सफारी को आधुनिक अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने की योजना बनाई गई है।
प्रस्तावित सुविधाओं में शामिल हैं—
- अत्याधुनिक नाइट सफारी
- वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र
- ईको पार्क
- प्रकृति व्याख्या केंद्र
- बच्चों के लिए प्रकृति शिक्षा क्षेत्र
- पर्यावरण जागरूकता केंद्र
- आधुनिक विजिटर फैसिलिटी
- इलेक्ट्रिक वाहनों से सफारी
- हरित ऊर्जा आधारित सुविधाएं
- पर्यावरण अनुकूल बुनियादी ढांचा
सरकार का कहना है कि पूरी परियोजना में प्राकृतिक वन क्षेत्र और जैव विविधता को अधिकतम सुरक्षित रखने का प्रयास किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि किसी भी विकास परियोजना को केवल आशंकाओं के आधार पर पूरी तरह रोक देना उचित नहीं होगा।
हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि—
- पर्यावरणीय नियमों का पूरी सख्ती से पालन किया जाए।
- वन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सभी कानून लागू रहेंगे।
- निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान हो।
- विशेषज्ञों की निगरानी में परियोजना आगे बढ़े।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी पक्ष को परियोजना को लेकर आपत्ति है तो वह अपनी आपत्तियां और सुझाव परियोजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है।

पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन पर जोर
कुकरेल परियोजना को लेकर लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों ने चिंता जताई थी।उनका कहना था कि रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य से जैव विविधता और वन्यजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।वहीं उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष था कि परियोजना पूरी तरह पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप विकसित की जा रही है और इसका उद्देश्य जंगल को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि उसे संरक्षित करते हुए ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देना है।सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हुए विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को समान महत्व दिया।
लखनऊ के पर्यटन को मिलेगी नई पहचान
विशेषज्ञों का मानना है कि कुकरेल नाइट सफारी बनने के बाद लखनऊ देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी नई पहचान बना सकता है।
इस परियोजना से—
- घरेलू और विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।
- स्थानीय रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
- होटल, परिवहन और अन्य पर्यटन व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा।
- पर्यावरण शिक्षा और वन्यजीव संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ेगी।
यह परियोजना राजधानी लखनऊ को आधुनिक ईको-टूरिज्म के मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
दो साल में पूरा करने का लक्ष्य
राज्य सरकार ने परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य तय किया है।यदि निर्माण कार्य निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ता है, तो अगले दो वर्षों के भीतर कुकरेल नाइट सफारी आम लोगों के लिए खोल दी जाएगी।इसके लिए आधारभूत ढांचे, सड़क संपर्क, हरित क्षेत्र विकास और पर्यटक सुविधाओं पर तेजी से काम किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजना को मिली नई रफ्तार
सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को कानूनी स्तर पर बड़ी राहत मिल गई है। हालांकि अदालत ने साफ कर दिया है कि विकास की रफ्तार पर्यावरण संरक्षण की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार परियोजना को किस तरह पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए आगे बढ़ाती है। यदि निर्धारित समय सीमा में यह परियोजना पूरी होती है, तो कुकरेल नाइट सफारी न केवल लखनऊ बल्कि पूरे उत्तर भारत के प्रमुख ईको-टूरिज्म आकर्षणों में शामिल हो सकती है।
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