S-400 Deal: मोदी-पुतिन मुलाकात के बीच 50 हजार करोड़ का प्रस्ताव

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शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात ने एक बार फिर भारत-रूस रणनीतिक रिश्तों को सुर्खियों में ला दिया है। दोनों नेताओं के बीच बातचीत के केंद्र में ऊर्जा, व्यापार और रक्षा सहयोग जैसे अहम मुद्दे रहे। इसी बीच रूस की ओर से भारत को पांच अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव चर्चा में है। रिपोर्टों के मुताबिक इस प्रस्ताव की अनुमानित कीमत 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। हालांकि, यह अभी प्रस्ताव और प्रक्रिया के स्तर पर है, इसे अंतिम रक्षा सौदा नहीं माना जा सकता।भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग काफी पुराना है। लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दोनों देशों के रिश्तों का महत्व और बढ़ गया है। एक ओर रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है, दूसरी ओर भारत अपनी रक्षा जरूरतों के साथ-साथ घरेलू रक्षा उत्पादन को भी मजबूत करने पर जोर दे रहा है।

पांच अतिरिक्त S-400 को लेकर क्या है मामला?

रिपोर्टों के अनुसार रूस ने भारत के उस टेंडर के जवाब में प्रस्ताव दिया है, जिसमें पांच अतिरिक्त S-400 सिस्टम हासिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। रक्षा मंत्रालय को रूस का जवाब मिल चुका है और प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है। इसकी अनुमानित लागत ₹50,000 करोड़ से ज्यादा बताई गई है।अगर यह प्रस्ताव आगे चलकर मंजूर होता है, तो भारत की मौजूदा और प्रस्तावित S-400 संख्या बढ़ सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक भारत ने पहले पांच S-400 स्क्वाड्रन के लिए रूस के साथ समझौता किया था और उनमें से चार की डिलीवरी हो चुकी है। पांचवें सिस्टम की डिलीवरी भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रही है।इसलिए नई खरीद को भारत की वायु सुरक्षा व्यवस्था में अतिरिक्त क्षमता जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

मोदी-पुतिन मुलाकात ने बढ़ाई चर्चा

SCO सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की द्विपक्षीय मुलाकात हुई। दोनों नेताओं के बीच ऊर्जा, व्यापार और रक्षा सहयोग समेत कई मुद्दों पर बातचीत हुई।रूस के साथ भारत के रिश्ते केवल रक्षा तक सीमित नहीं हैं। तेल, गैस, परमाणु ऊर्जा, व्यापार और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच सहयोग है। ऐसे में S-400 का प्रस्ताव व्यापक भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के संदर्भ में देखा जा रहा है।

मोदी-पुतिन मुलाकात के बीच 50 हजार करोड़ का प्रस्ताव
मोदी-पुतिन मुलाकात के बीच 50 हजार करोड़ का प्रस्ताव

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा S-400 पर फोकस

पांच अतिरिक्त S-400 की प्रक्रिया की चर्चा ऐसे समय हो रही है जब भारत की रक्षा योजना में एयर डिफेंस को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार मार्च 2026 में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने पांच अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन की खरीद की प्रक्रिया को मंजूरी दी थी। यह कदम ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की एयर डिफेंस व्यवस्था के अनुभवों के बाद सामने आया।हालांकि किसी भी रक्षा प्रणाली की वास्तविक भूमिका और प्रभाव को लेकर आधिकारिक आंकड़ों और सैन्य आकलनों को प्राथमिकता देना जरूरी है। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को अंतिम तथ्य मानने से बचना चाहिए।

क्या है टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का एंगल?

रूस की ओर से सामने आए प्रस्ताव में स्थानीय उत्पादन और सपोर्ट सुविधाओं से जुड़े विकल्पों की भी चर्चा रिपोर्टों में हुई है। यह पहल भारत की उस व्यापक नीति से जुड़ती है, जिसमें रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में घरेलू उत्पादन और तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।भारत अब केवल तैयार रक्षा उपकरण खरीदने के बजाय तकनीक, रखरखाव, स्थानीय निर्माण और दीर्घकालिक औद्योगिक क्षमता को भी महत्व देता है। इससे भविष्य में भारतीय रक्षा उद्योग को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

S-400 के साथ प्रोजेक्ट कुशा भी अहम

भारत अपनी घरेलू एयर डिफेंस क्षमता विकसित करने के लिए प्रोजेक्ट कुशा पर भी काम कर रहा है। इसका उद्देश्य लंबी दूरी की वायु रक्षा के क्षेत्र में स्वदेशी क्षमता विकसित करना है।यही वजह है कि रूस से अतिरिक्त S-400 खरीद की खबर को भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति से अलग करके नहीं देखा जा सकता। एक तरफ तत्काल और मौजूदा जरूरतों के लिए विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता बनी हुई है, तो दूसरी तरफ देश में स्वदेशी तकनीक विकसित करने की कोशिश भी जारी है।इस तरह भारत की रक्षा रणनीति में विदेशी प्रणालियों और घरेलू विकास, दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश दिखाई देती है।

क्या अमेरिका के प्रतिबंधों का पड़ेगा असर?

भारत-रूस रक्षा संबंधों पर अमेरिका और पश्चिमी देशों की नजर लंबे समय से रही है। रूस से बड़े रक्षा सौदों को लेकर अमेरिका की प्रतिबंध नीति भी चर्चा में रही है।हालांकि भारत ने अपनी विदेश नीति में रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर दिया है। नई दिल्ली का रुख रहा है कि उसके रक्षा और ऊर्जा संबंधों को राष्ट्रीय हितों के आधार पर देखा जाना चाहिए।ऐसे में S-400 से जुड़ा कोई भी संभावित नया सौदा केवल भारत-रूस संबंधों का विषय नहीं होगा, बल्कि इसका असर व्यापक भू-राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

S-500 और Su-57 पर भी नजर?

S-400 के अलावा रूस के साथ भारत के रक्षा सहयोग को लेकर S-500 और Su-57 जैसे दूसरे प्लेटफॉर्म की संभावित चर्चा की खबरें भी सामने आई हैं। हालांकि इन मामलों में अलग-अलग रिपोर्टों में अलग दावे हैं और इन्हें पक्के सौदे के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।इससे इतना जरूर संकेत मिलता है कि भारत-रूस रक्षा बातचीत का दायरा केवल मौजूदा प्रणालियों तक सीमित नहीं है और दोनों देश भविष्य के रक्षा सहयोग के विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।

भारत-रूस रिश्ते में रक्षा के साथ शांति का संदेश

दिलचस्प बात यह है कि मोदी-पुतिन मुलाकात के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध का मुद्दा भी सामने आया। प्रधानमंत्री मोदी ने युद्ध समाप्त करने और शांति की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया।इससे भारत की कूटनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है। एक तरफ भारत रूस के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को जारी रख रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह युद्ध के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति की वकालत भी करता है।

50 हजार करोड़ की डील अभी क्यों है महत्वपूर्ण?

पांच अतिरिक्त S-400 की प्रस्तावित खरीद अगर आगे बढ़ती है तो यह भारत की रक्षा खरीद के लिहाज से बड़ा सौदा होगा। लेकिन फिलहाल इसे प्रस्तावित डील कहना ही सही है, क्योंकि रिपोर्टों के मुताबिक रूसी प्रस्ताव अभी रक्षा मंत्रालय के स्तर पर प्रक्रिया में है।कुल मिलाकर मोदी-पुतिन की SCO मुलाकात और पांच अतिरिक्त S-400 के प्रस्ताव ने भारत-रूस रक्षा संबंधों को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। करीब 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक के इस प्रस्ताव के साथ तकनीकी सहयोग, स्थानीय उत्पादन और भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं। आने वाले समय में सरकार के फैसले से साफ होगा कि यह प्रस्ताव किस रूप में आगे बढ़ता है।

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