वाराणसी अब तक साइबर अपराध की खबरें बैंक खातों से पैसे उड़ाने, फर्जी कॉल और ऑनलाइन ठगी तक सीमित थीं। लेकिन वाराणसी में साइबर अपराध ने पहली बार ऐसा खूनी रूप दिखाया जिसने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया। महज 26 लाख रुपये हड़पने के लिए साइबर ठगों ने एक किराना कारोबारी की गोली मारकर हत्या करवा दी। यह मामला इसलिए भी बेहद गंभीर माना जा रहा है क्योंकि पूर्वांचल में पहली बार साइबर ठगी की साजिश को अंजाम देने के लिए सुपारी किलर का इस्तेमाल किया गया।करीब 20 दिन तक पुलिस को चकमा देने वाले इस गिरोह का पर्दाफाश आखिरकार एक ऑरा कार ने किया। सीसीटीवी कैमरों में बार-बार दिख रही इसी कार ने पुलिस को आरोपियों तक पहुंचा दिया। इसके बाद मुठभेड़ में शूटर समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

26 लाख देख बदली नियत, रच दी हत्या की साजिश
पुलिस जांच के मुताबिक, रोहनिया थाना क्षेत्र के अवलेशपुर स्थित सौरभ विहार कॉलोनी निवासी किराना व्यवसायी जितेंद्र पटेल की हत्या कोई पुरानी रंजिश नहीं, बल्कि सुनियोजित साइबर क्राइम का हिस्सा थी।करीब छह महीने पहले आरोपी आयुष पटेल और गियांशु पटेल पेटीएम केवाईसी अपडेट करने के बहाने जितेंद्र की दुकान पर पहुंचे थे। मोबाइल अपडेट के दौरान उन्होंने यह पता लगा लिया कि व्यापारी के बैंक खाते में करीब 26 लाख रुपये जमा हैं। यहीं से दोनों की नीयत बदल गई और व्यापारी का मोबाइल लूटकर पूरा बैंक खाता खाली करने की साजिश रच डाली।जब मोबाइल लूटने का मौका नहीं मिला तो आरोपियों ने हत्या की योजना बना डाली।
पहले रेकी, फिर मुंगेर से मंगवाई पिस्टल
आयुष और गियांशु ने अपने साथ अमन सेठ, मनीष सिंह और सुशील पटेल उर्फ गोलू को जोड़ा। बिहार के मुंगेर से अवैध पिस्टल खरीदी गई और कई दिनों तक व्यापारी की गतिविधियों की रेकी की गई।6 जून को हत्या की पहली कोशिश की गई, लेकिन व्यापारी समय से पहले घर पहुंच गया। इसके बाद 8 जून की रात आरोपियों ने दोबारा हमला किया।
घर से 100 मीटर पहले मारी गोली
वारदात वाली रात जितेंद्र पटेल अपनी बाइक से घर लौट रहे थे। घर से महज 100 मीटर पहले बिना नंबर की रोनिन बाइक पर पहुंचे शूटर सुशील पटेल ने उन पर गोली चला दी।पहली गोली पीठ में लगी, लेकिन घायल व्यापारी जान बचाने के लिए घर की ओर दौड़ पड़ा। इसके बाद शूटर ने सिर में दूसरी गोली मारने की कोशिश की, लेकिन निशाना चूक गया। वारदात के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए।पूरी घटना के दौरान दूसरी तरफ हुंडई ऑरा कार में बैठे आरोपी पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रहे थे।
2000 सीसीटीवी कैमरों ने खोला राज
हत्या की गुत्थी सुलझाना पुलिस के लिए आसान नहीं था। बिना नंबर की बाइक और अंधेरे के कारण आरोपियों की पहचान नहीं हो पा रही थी।तब वाराणसी पुलिस और एसओजी ने लगभग 2000 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसी दौरान हर रूट पर एक सफेद ऑरा कार लगातार रोनिन बाइक के साथ दिखाई दी।कार के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर पुलिस पहले अमन सेठ तक पहुंची और फिर पूरा गिरोह बेनकाब हो गया।
मुठभेड़ में दबोचे गए शूटर
पुलिस ने पहले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसके बाद मुख्य शूटर सुशील पटेल और गियांशु पटेल करसड़ा इलाके में पुलिस से मुठभेड़ के दौरान घायल होकर पकड़े गए।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुशील पटेल, गियांशु पटेल, आयुष पटेल, अमन सेठ और मनीष सिंह के रूप में हुई है। सभी की उम्र 19 से 23 वर्ष के बीच है।
‘रोनिन गैंग’ का हुआ खुलासा
पूछताछ में सामने आया कि गिरोह के सभी सदस्य रोनिन बाइक का इस्तेमाल करते थे। इसी वजह से पुलिस ने इस गिरोह को “रोनिन गैंग” नाम दिया है।पुलिस ने इनके कब्जे से 1.78 लाख रुपये नकद, दो रोनिन बाइक, 20 मोबाइल फोन, 29 डेबिट कार्ड, 116 क्यूआर कोड, 10 पेटीएम मशीनें, नौ सिम कार्ड, लैपटॉप, पासबुक, चेकबुक, वाई-फाई डोंगल, अवैध पिस्टल और तमंचा बरामद किए हैं।
‘जामताड़ा’ देखकर बने साइबर अपराधी
पूछताछ में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। आरोपियों ने साइबर अपराध पर आधारित वेब सीरीज ‘जामताड़ा’ देखकर जल्दी अमीर बनने का सपना देखा था।आईटीआई, बीए, बीएससी और इंटर पास इन युवकों ने पहले छोटी-मोटी साइबर ठगी शुरू की। बाद में पेटीएम एजेंट बनकर दुकानदारों की केवाईसी करने लगे।वे खासतौर पर ऐसे बुजुर्ग दुकानदारों को निशाना बनाते थे, जिन्हें डिजिटल तकनीक की कम जानकारी होती थी। केवाईसी के बहाने मोबाइल अपने कब्जे में लेकर फर्जी लोन पास कराते, सिम बदलते और बैंक खातों से रकम निकाल लेते थे।
25 वारदातों का खुलासा
पुलिस जांच में सामने आया कि यह गैंग पिछले छह महीनों में वाराणसी, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, अयोध्या और चंदौली समेत कई जिलों में करीब 25 साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम दे चुका है।
साइबर क्राइम का बदलता चेहरा
वाराणसी की यह वारदात सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि साइबर अपराध की बदलती और खतरनाक तस्वीर है। अब अपराधी केवल मोबाइल हैक या बैंक खाते खाली करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि करोड़ों की ठगी के लिए हत्या जैसे जघन्य अपराध करने से भी नहीं हिचक रहे।फिलहाल पुलिस ने पूरे गिरोह को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है, लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया है कि डिजिटल अपराध अब केवल ऑनलाइन नहीं रहा, बल्कि जरूरत पड़ने पर यह बंदूक की नली तक भी पहुंच चुका है।
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