नागेश्वर ज्योतिर्लिंग द्वारका, गुजरात:भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक का इतिहास

Editorial
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गुजरात के देवभूमि द्वारका में स्थित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव को समर्पित देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। द्वारका शहर और बेट द्वारका के बीच स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नागेश्वर उन 12 प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों में शामिल है, जहां भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति मानी जाती है। गुजरात पर्यटन और देवभूमि द्वारका जिला प्रशासन की वेबसाइट भी इसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल करती हैं।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग कहां स्थित है?

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले में स्थित है। यह मंदिर द्वारका शहर से करीब 16 से 18 किलोमीटर की दूरी पर द्वारका और बेट द्वारका जाने वाले मार्ग पर स्थित बताया गया है। गुजरात पर्यटन के अनुसार नागेश्वर मंदिर द्वारका शहर से लगभग 18 किलोमीटर दूर है, जबकि जिला प्रशासन की वेबसाइट इसे द्वारका रेलवे स्टेशन से करीब 16 किलोमीटर की दूरी पर बताती है।यह स्थान इसलिए भी खास है क्योंकि एक ही धार्मिक यात्रा में श्रद्धालु द्वारकाधीश मंदिर, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग और बेट द्वारका जैसे महत्वपूर्ण स्थलों के दर्शन कर सकते हैं। देवभूमि द्वारका को गुजरात के प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों में गिना जाता है और यहां भगवान कृष्ण तथा भगवान शिव से जुड़े कई महत्वपूर्ण तीर्थ मौजूद हैं।

 

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा दारुक और सुप्रिया की है। गुजरात पर्यटन के अनुसार मान्यता है कि दारुक नामक राक्षस ने शिव भक्त सुप्रिया को बंदी बना लिया था। संकट की स्थिति में सुप्रिया ने भगवान शिव का स्मरण करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप किया।भक्त की पुकार सुनकर भगवान शिव प्रकट हुए और दारुक का अंत किया। इसी धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां स्वयं प्रकट शिवलिंग का प्राकट्य हुआ और यह स्थान भगवान शिव की उपासना का प्रमुख केंद्र बन गया।नागेश्वर से जुड़ी एक अन्य प्राचीन कथा दारुकावन से संबंधित बताई जाती है। देवभूमि द्वारका जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार नागेश्वर को प्राचीन समय में ‘दारुकावन’ से जोड़ा जाता है और इससे संबंधित कथा में ऋषियों तथा भगवान शिव की दिव्य लीला का वर्णन मिलता है।इन कथाओं का मूल धार्मिक और पौराणिक परंपराओं में है, इसलिए इन्हें ऐतिहासिक घटनाओं के बजाय धार्मिक मान्यताओं के रूप में समझना उचित है।

क्यों खास है नागेश्वर ज्योतिर्लिंग?

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की सबसे बड़ी विशेषता इसका 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल होना है। हिंदू धर्म में ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के उन पवित्र स्वरूपों को कहा जाता है, जहां शिव की विशेष दिव्य उपस्थिति मानी जाती है।देवभूमि द्वारका जिला प्रशासन के अनुसार नागेश्वर मंदिर के गर्भगृह में ज्योतिर्लिंग स्थित है और मंदिर परिसर में भगवान शिव की लगभग 25 मीटर ऊंची बैठी हुई प्रतिमा भी प्रमुख आकर्षण है। मंदिर के आसपास बड़ा बगीचा और तालाब भी मौजूद है।मंदिर का वातावरण अपेक्षाकृत शांत और आध्यात्मिक माना जाता है। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु यहां भगवान शिव के दर्शन, पूजा और प्रार्थना के लिए पहुंचते हैं।

नागेश्वर मंदिर और शिवरात्रि

महाशिवरात्रि नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। इस अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की जानकारी देवभूमि द्वारका जिला प्रशासन देता है। शिवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक उत्सव और विशेष पूजा का माहौल रहता है।सामान्य दिनों में भी शिव भक्त यहां पहुंचते हैं, लेकिन महाशिवरात्रि के दौरान धार्मिक गतिविधियां विशेष रूप से बढ़ जाती हैं। श्रद्धालु भगवान शिव का अभिषेक और पूजन कर अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना करते हैं।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन का सही समय

गुजरात पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार नागेश्वर मंदिर के लिए विजिटिंग टाइम सुबह से शाम तक (Dawn–Dusk) बताया गया है। हालांकि धार्मिक पर्वों, स्थानीय व्यवस्थाओं या विशेष आयोजनों के दौरान समय में बदलाव संभव हो सकता है। इसलिए यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन या मंदिर प्रबंधन से नवीनतम जानकारी की पुष्टि करना बेहतर रहता है।यात्रा के लिहाज से गुजरात पर्यटन ने नवंबर से फरवरी के बीच का समय बेहतर बताया है। महाशिवरात्रि भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष अवसर माना जाता है।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे पहुंचें?

सड़क मार्ग से

नागेश्वर मंदिर द्वारका से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। गुजरात पर्यटन के अनुसार मंदिर द्वारका शहर से लगभग 18 किलोमीटर दूर है। जिला प्रशासन के अनुसार द्वारका से नागेश्वर तक सड़क मार्ग से लगभग 16 किलोमीटर की दूरी है।द्वारका पहुंचने के बाद स्थानीय टैक्सी, कैब या अन्य उपलब्ध स्थानीय परिवहन के माध्यम से नागेश्वर मंदिर जाया जा सकता है।

ट्रेन से

नजदीकी प्रमुख रेलवे कनेक्शन द्वारका रेलवे स्टेशन है। जिला प्रशासन की जानकारी के अनुसार रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी करीब 16 किलोमीटर है।

हवाई मार्ग से

हवाई यात्रा करने वाले श्रद्धालु जामनगर या पोरबंदर एयरपोर्ट तक पहुंचकर आगे सड़क मार्ग से द्वारका और नागेश्वर जा सकते हैं। गुजरात पर्यटन भी इन हवाई अड्डों को द्वारका क्षेत्र के लिए प्रमुख एयर कनेक्शन के रूप में बताता है।

नागेश्वर के आसपास घूमने की जगहें

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की यात्रा को द्वारका दर्शन के साथ जोड़ना काफी सुविधाजनक माना जाता है। आसपास कई धार्मिक और पर्यटन स्थल हैं।

1. द्वारकाधीश मंदिर

भगवान कृष्ण को समर्पित द्वारकाधीश मंदिर, जिसे जगत मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, द्वारका का प्रमुख धार्मिक स्थल है। गुजरात पर्यटन के अनुसार यह मंदिर चार धाम परंपरा से जुड़े प्रमुख तीर्थों में द्वारका की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

2. बेट द्वारका

बेट द्वारका द्वारका क्षेत्र का महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थल है। देवभूमि द्वारका जिला प्रशासन के अनुसार यह मुख्य द्वारका शहर से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित द्वीप है और यहां कई धार्मिक स्थल मौजूद हैं।

3. गोपी तालाब

नागेश्वर के आसपास गोपी तालाव तीर्थ भी महत्वपूर्ण स्थान है। गुजरात पर्यटन के अनुसार यह स्थान भगवान कृष्ण और गोपियों से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण प्रसिद्ध है।

4. द्वारका बीच

अरब सागर के किनारे स्थित द्वारका बीच भी पर्यटकों को आकर्षित करता है। धार्मिक यात्रा के साथ समुद्र तट का शांत वातावरण यात्रा को अलग अनुभव देता है।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग यात्रा के दौरान क्या ध्यान रखें?

नागेश्वर एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, इसलिए यहां दर्शन के दौरान मंदिर की स्थानीय व्यवस्थाओं और धार्मिक नियमों का पालन करना चाहिए। भीड़ वाले पर्वों, विशेषकर महाशिवरात्रि के दौरान यात्रा का कार्यक्रम पहले से बनाना उपयोगी हो सकता है।यात्रा के लिए मौसम भी महत्वपूर्ण है। गुजरात पर्यटन के अनुसार नवंबर से फरवरी का समय नागेश्वर घूमने के लिए बेहतर माना गया है।साथ ही मंदिर के दर्शन समय, प्रवेश व्यवस्था और स्थानीय परिवहन से जुड़ी जानकारी यात्रा से पहले दोबारा जांच लेना उचित है, क्योंकि ये व्यवस्थाएं समय-समय पर बदल सकती हैं।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का धार्मिक महत्व

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। शिव भक्तों के लिए यहां दर्शन करना आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा माना जाता है। ‘नागेश्वर’ नाम भी भगवान शिव के नागों से जुड़े स्वरूप की धार्मिक कल्पना को दर्शाता है।द्वारका की कृष्ण भक्ति और नागेश्वर की शिव भक्ति का संगम इस क्षेत्र को और खास बनाता है। एक ओर द्वारकाधीश मंदिर भगवान कृष्ण की नगरी की धार्मिक पहचान प्रस्तुत करता है, वहीं दूसरी ओर नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव की उपासना का प्रमुख केंद्र है।

!!ॐ नागेश्वराय नमः!!

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