बैद्यनाथ मंदिर, देवघर:बाबा बैद्यनाथ धाम का इतिहास, महत्व, ज्योतिर्लिंग और कैसे पहुंचें

Editorial
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झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। आस्था, अध्यात्म और धार्मिक परंपराओं के लिहाज से यह स्थान भगवान शिव के भक्तों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे बैद्यनाथ धाम, बाबा धाम और देवघर के नाम से भी जाना जाता है। जिला प्रशासन के अनुसार, बाबा बैद्यनाथ मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। देवघर को भगवान और देवी-देवताओं का निवास स्थान माना जाता है।सावन के महीने में इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और बाबा बैद्यनाथ के ज्योतिर्लिंग पर गंगाजल अर्पित करते हैं। खासतौर पर सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर देवघर तक कांवड़ यात्रा करने की परंपरा यहां की धार्मिक पहचान का प्रमुख हिस्सा है।

बाबा बैद्यनाथ मंदिर कहां स्थित है?

बाबा बैद्यनाथ मंदिर झारखंड के देवघर जिले में स्थित है। देवघर शहर को बैद्यनाथ धाम और बाबा धाम के नाम से भी जाना जाता है। यह संथाल परगना क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। जिला प्रशासन के मुताबिक देवघर का नाम ही देवताओं के निवास यानी ‘देवघर’ से जुड़ा हुआ है।देवघर केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए शहर में कई अन्य दर्शनीय स्थल भी हैं। हालांकि, इन सभी में सबसे प्रमुख आकर्षण बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर ही है।

12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है बाबा बैद्यनाथ धाम

हिंदू धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का विशेष महत्व है। बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग इन्हीं पवित्र ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। देवघर जिला प्रशासन भी बाबा बैद्यनाथ मंदिर को भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में एक और महत्वपूर्ण हिंदू तीर्थस्थल के रूप में दर्ज करता है।ज्योतिर्लिंग को भगवान शिव के प्रकाशस्वरूप से जोड़ा जाता है। यही कारण है कि देशभर से शिवभक्त बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और पूजा के लिए देवघर पहुंचते हैं।देवघर की धार्मिक विशेषता यह भी है कि यहां ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ की परंपरा एक ही क्षेत्र में जुड़ी हुई है। जिला प्रशासन के इतिहास संबंधी विवरण में देवघर को 51 शक्तिपीठों में से एक के रूप में भी उल्लेखित किया गया है।

बाबा बैद्यनाथ मंदिर का इतिहास कितना पुराना है?

बाबा बैद्यनाथ धाम का इतिहास बेहद प्राचीन माना जाता है। देवघर जिला प्रशासन के अनुसार, बैद्यनाथधाम की उत्पत्ति का इतिहास प्राचीनता में खोया हुआ है और इस क्षेत्र का उल्लेख संस्कृत ग्रंथों में हरितकीवन या केतकीवन जैसे नामों से मिलता है।मंदिर के निर्माणकर्ता के बारे में निश्चित जानकारी उपलब्ध नहीं है। हालांकि, मंदिर के अग्रभाग के कुछ हिस्सों के निर्माण का संबंध पुराण मल से बताया जाता है, जो गिद्धौर के महाराजा के पूर्वज माने जाते हैं। प्रशासनिक इतिहास विवरण में इसका समय वर्ष 1596 के आसपास बताया गया है।इस वजह से मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण धरोहर है।

कैसा है बाबा बैद्यनाथ मंदिर का स्वरूप?

बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर का मुख्य मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। जिला प्रशासन के अनुसार मुख्य मंदिर पूर्व दिशा की ओर मुख किए हुए एक साधारण पत्थर की संरचना है, जिसकी शिखर संरचना लगभग 72 फीट ऊंची बताई गई है। मंदिर के शीर्ष पर तीन क्रमिक स्वर्ण कलश और पंचशूल की विशेष संरचना का उल्लेख मिलता है।मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के अलावा कई अन्य मंदिर भी हैं। 2026 के श्रावणी मेले की तैयारियों से संबंधित जिला प्रशासन की सूचना में पूरे मंदिर परिसर में 22 मंदिरों का उल्लेख किया गया है।

सावन में क्यों उमड़ती है लाखों श्रद्धालुओं की भीड़?

बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रावणी मेला सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में से एक है। सावन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से कांवड़िए और श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं।कांवड़ यात्रा की एक खास परंपरा यह है कि श्रद्धालु सुल्तानगंज में गंगा से जल भरते हैं और उसे कांवड़ में लेकर पैदल देवघर पहुंचते हैं। देवघर जिला प्रशासन के अनुसार सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ मंदिर तक यह यात्रा लगभग 109 किलोमीटर की बताई गई है। देवघर पहुंचने के बाद कांवड़िए शिवगंगा में स्नान करके बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर गंगाजल अर्पित करते हैं।यात्रा के दौरान ‘बोल बम’ के जयकारों से पूरा मार्ग भक्तिमय हो जाता है। सावन में बाबा धाम का वातावरण शिवभक्ति से पूरी तरह सराबोर दिखाई देता है।

2026 में भी श्रावणी मेले की खास तैयारियां

वर्ष 2026 के श्रावणी मेले को लेकर भी देवघर प्रशासन की ओर से मंदिर परिसर में व्यवस्थाएं की गई हैं। जिला प्रशासन की सूचनाओं के मुताबिक मंदिर और प्रवेश द्वारों की सजावट, बिजली की आकर्षक सज्जा और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े कई कार्यों की योजना बनाई गई।श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर के विभिन्न स्थानों पर मिस्ट कूलिंग सिस्टम लगाने की योजना भी बनाई गई थी। इसके लिए संस्कार मंडप, उमा भवन, शीघ्र दर्शनम होल्डिंग प्वाइंट, सुविधा केंद्र, नाथबाड़ी, नेहरू पार्क और कतार परिसर जैसे स्थानों का उल्लेख किया गया।

बाबा बैद्यनाथ धाम कैसे पहुंचें?

देवघर पहुंचने के लिए हवाई, रेल और सड़क—तीनों विकल्प उपलब्ध हैं।

हवाई मार्ग: देवघर एयरपोर्ट के माध्यम से शहर पहुंचा जा सकता है।

रेल मार्ग: देवघर के आसपास प्रमुख रेलवे स्टेशन उपलब्ध हैं। जिला प्रशासन के अनुसार देवघर जंक्शन करीब 3 किलोमीटर, बैद्यनाथधाम जंक्शन करीब 2 किलोमीटर और जसीडीह जंक्शन करीब 7 किलोमीटर की दूरी पर है।

सड़क मार्ग: मंदिर देवघर शहर के भीतर स्थित है और बस सेवा के जरिए भी यहां पहुंचा जा सकता है। जिला प्रशासन की जानकारी के अनुसार मंदिर बस स्टैंड से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर है।

पर्यटन के विकास पर भी जोर

बाबा बैद्यनाथ धाम को धार्मिक पर्यटन के साथ बेहतर सुविधाओं से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार की PRASHAD योजना के तहत विकास परियोजना भी स्वीकृत की गई थी। पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2018-19 में बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर के विकास के लिए 36.79 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई थी। मंत्रालय के दस्तावेज में परियोजना के भौतिक रूप से पूरा होने की जानकारी भी दी गई है।इसका उद्देश्य तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए धार्मिक स्थल से जुड़ी सुविधाओं और पर्यटन ढांचे को बेहतर बनाना है।

देवघर यात्रा क्यों है खास?

अगर आप धार्मिक पर्यटन, शिव मंदिरों और आध्यात्मिक स्थलों की यात्रा करना चाहते हैं तो बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर एक महत्वपूर्ण गंतव्य है। यहां ज्योतिर्लिंग के दर्शन के साथ श्रावण के दौरान कांवड़ यात्रा का अद्भुत धार्मिक अनुभव भी मिलता है।देवघर की पहचान सिर्फ एक मंदिर तक सीमित नहीं है। यह सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा, आस्था, कांवड़ यात्रा और आध्यात्मिक संस्कृति का बड़ा केंद्र है। यही वजह है कि सावन हो या साल का कोई अन्य समय, बाबा बैद्यनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बनी रहती है।

!!ॐ हौं जूं सः ॐ नमः शिवाय वैद्यनाथाय अमृतकलशाय महेश्वराय नमः!!

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