नई दिल्ली NEET UG परीक्षा की सुरक्षा और पेपर लीक से जुड़े मामले में एक बार फिर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में परीक्षा की गोपनीय सामग्री की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने सवाल उठाया कि जब परीक्षा सुधारों के लिए पहले ही विशेषज्ञ समिति की ओर से 101 सिफारिशें दी जा चुकी थीं, तो दोबारा पेपर लीक जैसी स्थिति क्यों बनी?FAIMA ने कहा है कि केवल परीक्षा केंद्रों और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के उपाय बताना पर्याप्त नहीं है। परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री तक अधिकृत रूप से पहुंच रखने वाले लोगों के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए कानून में भी स्पष्ट और कड़े प्रावधान होने चाहिए।
NTA के सुरक्षा उपायों पर FAIMA ने उठाए सवाल
19 अगस्त को FAIMA ने सुप्रीम कोर्ट में NTA के हलफनामे के जवाब में अपनी दलील पेश की। संगठन की ओर से अधिवक्ता तन्वी दुबे ने जवाब दाखिल किया।FAIMA का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक उपाय जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्रश्नपत्र तैयार करने, जांचने या उसकी गोपनीय प्रक्रिया से जुड़े किसी अधिकृत व्यक्ति द्वारा नियमों का उल्लंघन न हो।संगठन ने ऐसे मामलों को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखने और दोषियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करने की मांग की है।
पेपर तैयार करने वालों पर भी हो कड़ा कानून
FAIMA ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Act, 2026 में विशेष प्रावधान किए जाने की मांग की है। संगठन के मुताबिक यदि प्रश्नपत्र तैयार करने, जांचने या परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े किसी अधिकृत व्यक्ति ने गोपनीय सामग्री को गलत तरीके से इस्तेमाल किया, तो इसे गंभीर अपराध माना जाना चाहिए।FAIMA ने कहा कि यदि कोई अधिकृत व्यक्ति प्रश्नपत्र या अन्य गोपनीय परीक्षा सामग्री को कॉपी करता है, किसी दूसरे व्यक्ति को भेजता है, साझा करता है या अनधिकृत व्यक्ति के सामने उसका खुलासा करता है, तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।संगठन का मानना है कि ऐसे प्रावधान परीक्षा प्रणाली में काम करने वाले लोगों की जवाबदेही तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशों का क्या हुआ?
FAIMA ने सुप्रीम कोर्ट के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लेकर उठाया है। NEET UG विवाद के बाद शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में हाई लेवल कमेटी बनाई थी।FAIMA के अनुसार इस समिति ने 2024 में अपनी रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें परीक्षा प्रक्रिया से संबंधित 101 सिफारिशें शामिल थीं। इनमें परीक्षा से पहले, परीक्षा के दौरान और परीक्षा के बाद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उपाय बताए गए थे।अब संगठन का सवाल है कि जब परीक्षा सुधारों के लिए पहले से इतनी विस्तृत सिफारिशें मौजूद थीं, तो उनके पूर्ण क्रियान्वयन की स्थिति क्या है? अगर पहले की सिफारिशों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता, तो क्या परीक्षा सुरक्षा से जुड़े मौजूदा सवालों को रोका जा सकता था?
नई टास्क फोर्स पर भी सवाल
FAIMA ने परीक्षा सुधारों के लिए बनाई गई नई हाई-पावर्ड टास्क फोर्स को लेकर भी सवाल उठाया है। संगठन ने जानना चाहा कि पहले से मौजूद विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करने के बजाय नई व्यवस्था की जरूरत क्यों पड़ी।FAIMA का कहना है कि छात्रों के लिए यह जानना जरूरी है कि 2024 में दी गई 101 सिफारिशों पर अब तक कितना अमल हुआ है।संगठन ने इस बात पर भी जोर दिया कि हर परीक्षा विवाद के बाद नई समिति बनाने के बजाय पहले से तैयार सुधारों को प्रभावी तरीके से जमीन पर उतारा जाना चाहिए।
NTA के पुनर्गठन की मांग
NEET UG पेपर लीक मामले से जुड़ी कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। FAIMA की याचिका में NTA के पुनर्गठन या उसकी जगह एक मजबूत और स्वायत्त परीक्षा संस्था बनाने की मांग भी शामिल है।संगठन का तर्क है कि NEET UG जैसी देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) भी कर रहा है। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था की खामियों और जिम्मेदारी तय करने को लेकर अदालत की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
छात्रों के भविष्य पर पड़ता है सीधा असर
NEET UG में देशभर से लाखों विद्यार्थी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा से जुड़ी किसी भी अनियमितता का सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ सकता है।FAIMA ने कहा कि छात्रों को बार-बार परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाने वाली परिस्थितियों का सामना नहीं करना चाहिए। संगठन के मुताबिक परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों का भरोसा बनाए रखना सबसे जरूरी है।
2024 में भी सुप्रीम कोर्ट ने लिया था संज्ञान
2024 में NEET UG प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई की थी। अदालत ने उस समय परीक्षा रद्द करने से इनकार किया था, लेकिन परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक जैसी घटनाओं से निपटने को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे।अब 2026 में एक बार फिर NEET UG Paper Leak, NTA Security और परीक्षा सुधार का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के सामने है। FAIMA की दलीलों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पहले ही 101 सिफारिशें मौजूद थीं, तो उनके क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति क्या है और परीक्षा व्यवस्था को भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं से कैसे सुरक्षित बनाया जाएगा।फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर छात्रों, अभिभावकों और मेडिकल शिक्षा जगत की नजर बनी हुई है। आने वाले समय में अदालत और केंद्र सरकार की ओर से परीक्षा सुरक्षा को लेकर उठाए जाने वाले कदम NEET UG की पूरी व्यवस्था के लिए अहम साबित हो सकते हैं।
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