पीएम मोदी की सोने को लेकर अपील:क्यों कर रहे सोना न खरीदने की अपील? जानें वजह

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नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर देशवासियों से अपील की है कि अगर जरूरत न हो तो सोना खरीदने से बचें। पीएम मोदी ने 1 सितंबर 2026 को अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर करते हुए देश की मजबूत आर्थिक विकास दर का जिक्र किया और लोगों से गैर-जरूरी सोने की खरीदारी नहीं करने की अपील की। पीएम मोदी की यह अपील ऐसे समय आई है, जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं।पीएम मोदी ने अपने संदेश में भारत की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत GDP Growth का उल्लेख किया। इसके बाद उन्होंने लोगों से कहा कि अगर सोना खरीदना जरूरी नहीं है, तो उसे खरीदने से बचना चाहिए। उन्होंने इस अपील को ‘विकसित भारत @2047’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य से भी जोड़ा।

पीएम मोदी ने क्यों की सोना न खरीदने की अपील?

भारत में सोने की मांग काफी अधिक है, लेकिन घरेलू जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है। जब भारत विदेशों से सोना खरीदता है, तो इसके लिए बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा यानी डॉलर खर्च होता है। सोने का आयात बढ़ने पर देश से डॉलर का बहिर्वाह भी बढ़ सकता है।यही वजह है कि सरकार गैर-जरूरी सोने की खरीद को कम करने की अपील करती रही है। अगर सोने के आयात पर होने वाला खर्च कम होता है तो विदेशी मुद्रा पर दबाव घट सकता है और देश के व्यापार संतुलन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने पिछले कारोबारी वर्ष में करीब 72 अरब डॉलर का सोना आयात किया था। ऐसे में सोने की भारी मांग का असर देश की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा बाजार पर भी पड़ सकता है।

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रुपये पर भी पड़ सकता है असर

सोने की ज्यादा खरीदारी का संबंध भारतीय रुपये की मजबूती और कमजोरी से भी जोड़ा जाता है। भारत को सोने के अलावा कच्चे तेल समेत कई जरूरी वस्तुओं का भी बड़े पैमाने पर आयात करना पड़ता है। इन आयातों के लिए डॉलर में भुगतान किया जाता है।यदि एक ही समय में सोने और कच्चे तेल जैसे आयातों पर डॉलर की मांग बढ़ती है, तो विदेशी मुद्रा बाजार में दबाव बढ़ सकता है। इससे रुपये की कीमत पर असर पड़ने की आशंका रहती है।रुपये में कमजोरी आने पर विदेशों से आने वाली कई वस्तुओं की कीमत बढ़ सकती है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, ऊर्जा और कुछ अन्य आयातित उत्पाद शामिल हो सकते हैं। इस तरह मुद्रा पर दबाव का असर लंबे समय में आम लोगों के खर्च पर भी पड़ सकता है।

व्यापार घाटे को कम करने की कोशिश

पीएम मोदी की सोना न खरीदने की अपील का एक महत्वपूर्ण पहलू व्यापार घाटा भी है। आसान भाषा में समझें तो जब किसी देश का आयात उसके निर्यात से अधिक होता है, तो व्यापार घाटे की स्थिति बनती है।भारत सोने और कच्चे तेल जैसी कई वस्तुओं का बड़े पैमाने पर आयात करता है। यदि गैर-जरूरी सोने का आयात कम होता है तो देश से बाहर जाने वाली विदेशी मुद्रा को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।इसी कारण सरकार और आर्थिक विशेषज्ञ समय-समय पर सोने के अनावश्यक आयात को कम करने पर जोर देते रहे हैं।

महंगे कच्चे तेल के बीच क्यों अहम है यह अपील?

मौजूदा समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। कच्चे तेल के लिए भी डॉलर में भुगतान करना पड़ता है।ऐसे में अगर तेल और सोने दोनों के आयात पर डॉलर की मांग बढ़ती है तो विदेशी मुद्रा बाजार पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है। इसका असर रुपये की विनिमय दर और देश के आयात बिल पर पड़ सकता है।यही कारण है कि सोने की गैर-जरूरी खरीद को कम करने की अपील को केवल निवेश या आभूषण खरीदने के फैसले के तौर पर नहीं, बल्कि व्यापक आर्थिक संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

इस साल दूसरी बार पीएम मोदी ने की ऐसी अपील

खास बात यह है कि पीएम मोदी की ओर से इस साल सोना खरीदने को लेकर ऐसी अपील पहली बार नहीं की गई है। इससे पहले मई 2026 में पश्चिम एशिया संकट के दौरान भी उन्होंने लोगों से कुछ समय के लिए सोने की खरीदारी से बचने की अपील की थी।अब सितंबर में एक बार फिर प्रधानमंत्री ने गैर-जरूरी सोने की खरीद को लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने इसे देश की आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता के व्यापक लक्ष्य से जोड़कर पेश किया।

क्या इसका मतलब सोने में निवेश बिल्कुल न करें?

पीएम मोदी की अपील का अर्थ यह नहीं है कि देश में किसी को भी सोना नहीं खरीदना चाहिए। उनका संदेश मुख्य रूप से गैर-जरूरी या अनावश्यक खरीदारी को लेकर है।सोना भारतीय परिवारों में लंबे समय से बचत, आभूषण और निवेश का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। हालांकि, किसी भी निवेश का फैसला व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, जरूरत, जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।इसलिए प्रधानमंत्री की अपील को एक व्यापक आर्थिक संदेश के तौर पर समझना जरूरी है, न कि व्यक्तिगत निवेश की सलाह के रूप में।

7.8% GDP Growth के बीच पीएम का संदेश

पीएम मोदी ने अपने वीडियो की शुरुआत भारत की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत आर्थिक विकास दर हासिल करने पर देशवासियों को बधाई देते हुए की। इसके बाद उन्होंने सोने की गैर-जरूरी खरीद को कम करने की अपील की।यानी प्रधानमंत्री का संदेश दो महत्वपूर्ण बातों पर केंद्रित रहा—एक तरफ भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर उत्साह और दूसरी तरफ वैश्विक परिस्थितियों के बीच अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए नागरिकों की भूमिका।पीएम मोदी की ‘सोना न खरीदने’ की अपील के पीछे सोने के आयात, विदेशी मुद्रा की मांग, रुपये की मजबूती और व्यापार घाटे जैसे आर्थिक पहलू जुड़े हुए हैं। ऐसे समय में जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, सरकार घरेलू स्तर पर गैर-जरूरी आयात को नियंत्रित करने और अर्थव्यवस्था पर बाहरी दबाव कम रखने पर जोर दे रही है।

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