महिला आरक्षण और ‘दिमागी नक्सली’ बयान पर कांग्रेस का PM मोदी पर हमला, प्रह्लाद जोशी ने किया पलटवार

Editorial
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नई दिल्ली देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिए गए संबोधन के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी जुबानी जंग तेज हो गई है। प्रधानमंत्री के महिला आरक्षण को लेकर किए गए आह्वान और ‘दिमागी नक्सली’ वाले बयान पर कांग्रेस नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए उनके बयान को ‘बेईमानी भरी बात’ करार दिया। वहीं, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की केंद्र सरकार पर की गई टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा कि जनता तीन बार अपना फैसला सुना चुकी है।स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सामने आए इन बयानों के बाद एक बार फिर महिला आरक्षण, राजनीतिक विचारधारा और सरकार के कामकाज को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं।

महिला आरक्षण पर जयराम रमेश का PM मोदी पर हमला

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महिला आरक्षण को लेकर दिए बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ सितंबर 2023 में दोनों सदनों से सर्वसम्मति से पारित हुआ था। कांग्रेस नेता का आरोप है कि इसके बावजूद महिला आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू नहीं किया गया।जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री को यह याद रखना चाहिए कि महिला आरक्षण का विचार नया नहीं है। उनके मुताबिक, 73वें और 74वें संविधान संशोधन के जरिए स्थानीय निकायों में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की गई थी।रमेश ने दावा किया कि कांग्रेस लंबे समय से मौजूदा लोकसभा सीटों की संख्या के आधार पर 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण लागू करने की मांग करती रही है।

PM मोदी ने लाल किले से क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की नीति निर्माण प्रक्रिया में महिलाओं का नेतृत्व जरूरी है।प्रधानमंत्री ने पंचायतों, नगरपालिकाओं और नगर निगमों में महिला जनप्रतिनिधियों के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाएं स्थानीय स्तर पर नेतृत्व करते हुए विकास और जनसमस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे आगे आएं और लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में काम करें। प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से वे देश की नीतियां बनाने में और अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर क्या है विवाद?

नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 संसद से पारित हो चुका है। इसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। हालांकि, इसके प्रभावी क्रियान्वयन की प्रक्रिया परिसीमन और जनगणना से जुड़ी शर्तों के कारण राजनीतिक बहस का विषय बनी हुई है।कांग्रेस का कहना है कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से अलग करके जल्द लागू किया जाना चाहिए। कर्नाटक के मंत्री संतोष लाड ने भी कहा कि यदि महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग किया जाता है तो कांग्रेस इसका समर्थन करने के लिए तैयार है।उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने में कांग्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

‘वंदे मातरम’ को लेकर भी कांग्रेस ने साधा निशाना

महिला आरक्षण के अलावा जयराम रमेश ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय गीत की पहली दो पंक्तियों को अपनाने के फैसले के पीछे रवींद्रनाथ टैगोर की भूमिका थी।रमेश ने कहा कि टैगोर ने इस विषय पर जवाहरलाल नेहरू को पत्र लिखा था और वंदे मातरम की पहली दो पंक्तियों को अपनाने का सुझाव दिया था। कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री पर इतिहास और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया।कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री से माफी की मांग भी की गई।

‘दिमागी नक्सली’ बयान पर कांग्रेस का पलटवार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सली’ शब्द को लेकर भी कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। जयराम रमेश ने कहा कि पहले प्रधानमंत्री के विरोधियों को ‘शहरी नक्सली’ कहा जाता था और अब ‘दिमागी नक्सली’ शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है।कांग्रेस नेता ने इसे प्रधानमंत्री की कथित हताशा से जोड़ते हुए उन पर राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ तीखे शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाया। उन्होंने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए उन्हें ‘मास्टर अब्यूजर’ तक कह दिया।कांग्रेस का कहना है कि सरकार को राजनीतिक विरोधियों पर इस तरह की टिप्पणी करने के बजाय रोजगार, अर्थव्यवस्था, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर जवाब देना चाहिए।

खरगे के बयान पर प्रह्लाद जोशी का पलटवार

दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के केंद्र सरकार पर लगाए गए आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि देश की जनता कई बार चुनाव में अपना फैसला सुना चुकी है और उसने तय किया है कि किसने बेहतर काम किया और किसने नहीं।प्रह्लाद जोशी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वह राजनीतिक तुलना नहीं करना चाहते, लेकिन जनता का फैसला अपने आप में बहुत कुछ बताता है।दरअसल कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने सरकार पर मूलभूत अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अपेक्षित काम नहीं करने, संसद के प्रति जवाबदेही से बचने और समाज को बांटने वाली राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

कांग्रेस ने गिनाईं पिछली सरकारों की उपलब्धियां

मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी के लाल किले से दिए गए भाषण पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने केंद्र सरकार के विकास और बदलाव से जुड़े दावों पर सवाल उठाए और कहा कि कई महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं की नींव पूर्ववर्ती यूपीए सरकारों के दौरान रखी गई थी।खरगे ने मौजूदा सरकार की तुलना कांग्रेस के नेतृत्व वाली पिछली सरकारों से करते हुए दावा किया कि देश निर्माण और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में कांग्रेस सरकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में खरगे के साथ सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी मौजूद रहे।

स्वतंत्रता दिवस पर तेज हुई सियासी बयानबाजी

कुल मिलाकर 80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बाद महिला आरक्षण, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, वंदे मातरम और ‘दिमागी नक्सली’ बयान को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है।एक तरफ कांग्रेस प्रधानमंत्री के बयानों और सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा नेता सरकार के कामकाज और जनता के चुनावी फैसले को अपनी सबसे बड़ी ताकत बता रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के मंच से शुरू हुई यह सियासी बहस आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है।

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