
प्रयागराज के साउथ मलाका सब्जी मंडी चौराहे की उस बंद दुकान में इतवार की शाम जो कुछ हुआ, वह सिर्फ चार कत्ल नहीं थे… वह इंसानी रिश्तों का ऐसा खूनी जनाजा था जिसे सुनकर रूह कांप जाए। पुलिस चौकी से महज 50 मीटर की दूरी पर एक ही घर के भीतर चार लाशें तड़प रही थीं, और इस खौफनाक नरसंहार की जो इनसाइड स्टोरी पुलिस ने महज 12 घंटे में बेनकाब की है, उसने समाज को सुन्न कर दिया है। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले कत्लेआम का मास्टरमाइंड कोई नामी बदमाश या पुराना दुश्मन नहीं था, बल्कि उसी घर का बड़ा बेटा अभिषेक था। जुए-कर्ज के दलदल में डूबे और पिता द्वारा संपत्ति से बेदखल किए जा चुके इस कलयुगी बेटे ने डेढ़ करोड़ के जेवरातों की भूख में अपनी ही मां, बाप और सगी बहन की बलि चढ़ा दी। लेकिन कुदरत का इंसाफ देखिए, जिस दोस्त के साथ मिलकर उसने इस खूनी खेल की स्क्रिप्ट लिखी थी, उसी दोस्त ने दौलत के बंटवारे में गद्दारी करते हुए उसे भी तड़पा-तड़पा कर मौत के घाट उतार दिया।

कत्ल के उस खौफनाक इतवार की शुरुआत बीयर, सिगरेट और कचौड़ी के दौर से हुई थी। अभिषेक ने अपने दोस्त शनि गुप्ता को दुकान पर बुलाया। दोनों ने साथ बैठकर जाम छलकाए और सिगरेट के धुएं के बीच उस खौफनाक साजिश को अंतिम रूप दिया जो पूरे हंसते-खेलते परिवार को निगलने वाली थी। शाम करीब पांच बजे जैसे ही अभिषेक की 22 वर्षीय बहन मीनाक्षी हमेशा की तरह नीचे दुकान खोलने आई और उसने सीढ़ियों का दरवाजा खोला, अंधेरे में घात लगाए बैठे सगे भाई अभिषेक ने लोहे की रॉड से उसके सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिया। शनि ने उसे पीछे से धक्का दिया और दोनों तड़पती हुई मीनाक्षी को घसीटते हुए ऊपर ले गए, जहां चंद मिनटों में उसकी सांसें थम गईं। बहन को ठिकाने लगाने के बाद इन दोनों जल्लादों के कदम ऊपर के कमरे की तरफ बढ़े, जहां कारोबारी पिता वीरेंद्र कुमार वैश्य और मां अनीता बेखबर सो रहे थे। इन दोनों राक्षसों ने सोते हुए बूढ़े मां-बाप पर लोहे की भारी रॉड और पाइप से इस बेरहमी से हमला किया कि उनके सिर के चिथड़े उड़ गए और बिस्तर पर ही खून की नदियां बह गईं।

कत्ल के इस तांडव के बाद दोनों ने अलमारियां तोड़ दीं और घर में रखे करीब डेढ़ करोड़ रुपये के सोने-चांदी के जेवरात और नकदी समेट ली। इसके बाद पुलिस की जांच को भटकाने के लिए अभिषेक ने अपना शातिर दिमाग चलाया। उसने एक गत्ते पर लाल स्केच पेन से लिख दिया— ‘बंटी-बबली बहू ने मारा।’ मकसद साफ था कि हत्या का पूरा इल्जाम उसके छोटे भाई अश्विनी और उसकी पत्नी रीतू पर आ जाए, जिन्हें घर में इसी नाम से ताना मारा जाता था। सबूतों को पूरी तरह मिटाने के लिए अभिषेक ने घर के कीमती दस्तावेज, कपड़े, लैपटॉप और मोबाइल पानी की टंकी में फेंक दिए। लेकिन जैसे ही दोनों हत्यारे लूट का माल लेकर नीचे दुकान में पहुंचे, लालच का असली भूत जाग उठा। अभिषेक इस अकूत दौलत में से अपने मददगार दोस्त शनि को महज पांच सोने के कंगन देकर टरकाना चाहता था। डेढ़ करोड़ के माल के सामने सिर्फ पांच कंगन देखकर शनि का खून खौल उठा। उसने आव देखा न ताव, उसी लोहे की रॉड से अपने दोस्त अभिषेक के सिर पर जोरदार हमला कर दिया। अपनी ही मां, बाप और बहन का खून बहाने वाला अभिषेक चंद मिनटों बाद खुद अपने दोस्त के हाथों मारा गया और उसका शव भी उसी फर्श पर ढेर हो गया।
अभिषेक को रास्ते से हटाने के बाद शनि गुप्ता जेवरों से भरा बैग लेकर मकान के पिछले हिस्से की ओर भागा और उसे अपनी दुकान के ऊपर बने छज्जे पर फेंक दिया। लेकिन कत्ल के बाद घबराहट में वह एक ऐसी ऐतिहासिक भूल कर बैठा जो उसकी बर्बादी का परवाना बन गई। शनि जल्दबाजी में अपने जूतों के बजाय मृत अभिषेक के कपड़े और जूते पहनकर कॉम्प्लेक्स से बाहर निकल गया। जब बाहर आकर उसे अपनी गलती का अहसास हुआ, तो वह 23 सेकंड के भीतर दोबारा जूते बदलने के लिए मकान के अंदर गया। सीसीटीवी के इस 23 सेकंड के फुटेज ने पुलिस के सामने पूरा सच उगल दिया। अपनी पहचान छिपाने के लिए शनि ने तुरंत नाई के पास जाकर अपने लंबे बाल और दाढ़ी कटवा ली थी। हद तो यह थी कि अगली सुबह जब घर से लाशें बाहर निकाली जा रही थीं, तो वह खुद पुलिस और भीड़ के बीच सबसे बड़ा हमदर्द बनकर लाशें उठवा रहा था। उसके हाथ पर पट्टी बंधी थी, जिसे लेकर उसने पुलिस से झूठ बोला कि उसे कुत्ते ने काट लिया है, जबकि वह चोट हत्या के दौरान अभिषेक से कशमकश में लगी थी।
इस सनसनीखेज हत्याकांड के खुलासे के लिए यूपी पुलिस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। दो डीसीपी, पांच एसीपी और एसओजी समेत 60 पुलिसकर्मियों की संयुक्त टीम ने दिन-रात एक कर दिया और आखिरकार मुट्ठीगंज के रहने वाले शनि गुप्ता को दबोच लिया। उसकी निशानदेही पर दुकान के छज्जे से एक किलो सोना, 360 ग्राम चांदी और चाभियां बरामद कर ली गईं। इस मामले में पुलिस की तत्परता तो दिखी, लेकिन खाकी पर लापरवाही का एक बड़ा दाग भी लगा। पुलिस चौकी से महज 50 मीटर की दूरी पर इतनी बड़ी वारदात हो गई और रात एक बजे जब शनि का भाई उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचा, तो पुलिसकर्मी सोते रहे। पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने इस घोर लापरवाही पर कड़ा एक्शन लेते हुए सूरजकुंड चौकी प्रभारी मुलायम सिंह यादव और साउथ मलाका चौकी प्रभारी रोहित गौड़ को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। यह हत्याकांड चीख-चीख कर गवाही दे रहा है कि जब इंसान के भीतर लालच और नफरत की आग सीमाएं लांघ जाती है, तो वह सबसे पहले अपने ही खून को अपना निवाला बनाती है और आखिर में खुद भी उसी आग में भस्म हो जाती है।
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