पटना बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के संगठन को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। बांकीपुर उपचुनाव में मिली हार के बाद पार्टी के भीतर मंथन का दौर जारी है। इसी बीच राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के निर्देश पर बिहार में पार्टी की सभी संगठनात्मक इकाइयों को भंग कर दिया गया है। पंचायत से लेकर प्रदेश स्तर और विभिन्न प्रकोष्ठों तक की मौजूदा इकाइयों को समाप्त करने के फैसले के बाद अब नई टीम के गठन की तैयारी है।तेजस्वी यादव के इस फैसले पर लालू प्रसाद यादव की बेटी और तेजस्वी की बहन रोहिणी आचार्य ने प्रतिक्रिया दी है। रोहिणी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए फैसले पर अपनी बात रखते हुए नई संगठनात्मक टीम को लेकर महत्वपूर्ण सलाह भी दी है।
तेजस्वी यादव के फैसले पर रोहिणी आचार्य ने क्या कहा?
रोहिणी आचार्य ने पार्टी की सभी संगठनात्मक इकाइयों को भंग किए जाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिन इकाइयों और प्रकोष्ठों को अब भंग करने का निर्णय लिया गया है, यह फैसला काफी पहले लिया जाना चाहिए था।उन्होंने उम्मीद जताई कि जब नई संगठनात्मक इकाइयों का पुनर्गठन किया जाएगा तो पार्टी के पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को उचित स्थान दिया जाएगा।रोहिणी आचार्य के मुताबिक, नई टीम में ऐसे लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए जो वर्षों से पार्टी के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ काम कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने संगठन की गहरी समझ रखने वाले और जमीन से जुड़े जुझारू कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने की जरूरत बताई।उनकी प्रतिक्रिया को RJD के संगठनात्मक पुनर्गठन को लेकर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

लालू प्रसाद की प्राथमिकता की दिलाई याद
रोहिणी आचार्य ने अपने बयान में सिर्फ संगठन के पुनर्गठन की बात नहीं की, बल्कि अपने पिता और RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक शैली और प्राथमिकताओं का भी जिक्र किया।उन्होंने कहा कि जमीन से जुड़े लोगों के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से हाशिये पर खड़े समाज के लोगों को आगे बढ़ाना लालू प्रसाद यादव की हमेशा से प्राथमिकता रही है।रोहिणी ने कहा कि कार्यकर्ताओं को उचित अवसर और सम्मानजनक जिम्मेदारी देना भी लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक सोच का हिस्सा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी की मजबूती और बेहतरी के लिए संगठन को उसी सिद्धांत और रास्ते पर आगे बढ़ना होगा, जिसे लालू प्रसाद यादव ने स्थापित किया।
क्यों भंग की गईं RJD की सभी संगठनात्मक इकाइयां?
राष्ट्रीय जनता दल ने बिहार में अपने संगठनात्मक ढांचे में व्यापक बदलाव का फैसला लिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल की ओर से जारी पत्र के मुताबिक, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव से परामर्श के बाद बिहार प्रदेश RJD का 22 जनवरी 2025 को जारी कार्यालय आदेश निरस्त कर दिया गया है।इसके साथ ही प्रदेश, जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर की संगठनात्मक इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ठों की मौजूदा इकाइयों को भी समाप्त कर दिया गया है।अब पार्टी को नए सिरे से संगठन तैयार करना है। ऐसे में माना जा रहा है कि नई टीम के गठन में पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं के साथ-साथ क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाले नेताओं को जगह मिल सकती है।
बांकीपुर उपचुनाव की हार के बाद बड़ा फैसला
RJD के संगठन में यह बड़ा बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों को लेकर पार्टी के भीतर चर्चा तेज है। चुनाव में पार्टी को मिली हार के बाद लालू परिवार और RJD नेतृत्व की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।इससे पहले लालू प्रसाद यादव की बड़ी बेटी और राज्यसभा सांसद मीसा भारती ने भी तेजस्वी यादव को सलाह दी थी। अब रोहिणी आचार्य की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद संगठनात्मक बदलाव को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है।हालांकि संगठन को भंग करने का फैसला सिर्फ बांकीपुर उपचुनाव की हार से जुड़ा है या पार्टी की लंबे समय से चली आ रही संगठनात्मक समीक्षा का हिस्सा है, इस पर पार्टी की ओर से विस्तृत कारण नहीं बताया गया है।
नई टीम में किन लोगों को मिल सकता है मौका?
रोहिणी आचार्य की प्रतिक्रिया के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि RJD की नई संगठनात्मक टीम में किन नेताओं और कार्यकर्ताओं को जगह मिलेगी।रोहिणी ने अपने बयान में तीन तरह के कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की बात कही है। पहला, पार्टी के पुराने और कट्टर लालूवादी कार्यकर्ता। दूसरा, लंबे समय से पार्टी के लिए निष्ठा और समर्पण के साथ काम करने वाले कार्यकर्ता। तीसरा, संगठन की गहरी समझ रखने वाले और जमीन पर सक्रिय जुझारू लोग।इसके अलावा उन्होंने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से हाशिये पर खड़े लोगों को आगे बढ़ाने की लालू प्रसाद यादव की नीति को भी महत्वपूर्ण बताया है।
RJD के सामने संगठन मजबूत करने की चुनौती
बिहार में आगामी राजनीतिक मुकाबलों को देखते हुए RJD के सामने अपने संगठन को मजबूत करने की बड़ी चुनौती है। पार्टी के लिए सिर्फ प्रदेश स्तर पर नई टीम बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर पर भी सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देना महत्वपूर्ण होगा।तेजस्वी यादव के फैसले के बाद अब पार्टी की नजर नई संगठनात्मक संरचना पर है। यह देखना अहम होगा कि नई टीम में पुराने नेताओं को कितना महत्व मिलता है और नए चेहरों को कितनी जिम्मेदारी दी जाती है।
रोहिणी आचार्य के बयान से क्या संकेत?
रोहिणी आचार्य की प्रतिक्रिया को पार्टी के अंदर संगठनात्मक बदलाव को लेकर एक अहम संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर नई टीम में जमीन से जुड़े और लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की बात कही है।साथ ही लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक प्राथमिकताओं का जिक्र करके उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संगठन की मजबूती के लिए पार्टी को अपने पुराने सामाजिक और राजनीतिक आधार से जुड़ना होगा।अब सबकी नजर इस बात पर है कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में RJD की नई संगठनात्मक टीम कैसी होगी और क्या उसमें रोहिणी आचार्य द्वारा सुझाए गए पुराने, समर्पित और जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को प्रमुख भूमिका मिलती है।
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