भारत का इतिहास जब भी राष्ट्रीय एकता, अखंडता और मजबूत नेतृत्व की चर्चा करेगा, सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम सबसे पहले लिया जाएगा। आजादी के समय भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल अंग्रेजी शासन से मुक्ति पाना नहीं थी, बल्कि सैकड़ों छोटी-बड़ी रियासतों में बंटे देश को एक मजबूत राष्ट्र के रूप में खड़ा करना भी था। ऐसे कठिन दौर में सरदार पटेल ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ, अदम्य साहस, कूटनीति और दृढ़ इच्छाशक्ति से वह काम कर दिखाया, जिसे आसान नहीं माना जा रहा था। उन्होंने रियासतों के एकीकरण में निर्णायक भूमिका निभाई और स्वतंत्र भारत की एकता की मजबूत नींव रखी। यही वजह है कि उन्हें देश का लौह पुरुष और भारतीय एकता का शिल्पकार कहा जाता है।31 अक्टूबर 2026 को देश सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मना रहा है। इस अवसर पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों और विभिन्न संस्थानों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। रन फॉर यूनिटी के माध्यम से लोगों को राष्ट्रीय एकता, अखंडता और आपसी भाईचारे का संदेश दिया जा रहा है। यह दिन केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि उस विचारधारा को समझने का भी दिन है, जिसने भारत को एक मजबूत राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभाई।
- 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात में हुआ था जन्म
- खेड़ा और बारडोली आंदोलन से मिली राष्ट्रीय पहचान
- आजादी के बाद सबसे बड़ी चुनौती: रियासतों का एकीकरण
- जूनागढ़ से हैदराबाद तक, हर चुनौती का किया सामना
- स्वतंत्र भारत के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने में योगदान
- सरदार पटेल के विचार आज भी दिखाते हैं एकता की राह
- राष्ट्रीय एकता दिवस पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने किया नमन
- रन फॉर यूनिटी से दिया जा रहा एकजुटता का संदेश
- सरदार पटेल की विरासत को आगे बढ़ाना ही सच्ची श्रद्धांजलि
31 अक्टूबर 1875 को गुजरात में हुआ था जन्म
सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। उनके पिता झवेरभाई पटेल और माता लाडबाई थीं। साधारण किसान परिवार में जन्म लेने वाले पटेल ने अपनी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर देश के प्रमुख नेताओं में स्थान बनाया।उन्होंने कानून की पढ़ाई की और वकालत के क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित की। बाद में महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हो गए। उनके व्यक्तित्व में नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने का साहस और संगठन को मजबूत बनाने की अद्भुत योग्यता थी।स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने किसानों, मजदूरों और आम जनता के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उनका मानना था कि किसी भी आंदोलन की असली ताकत जनता की एकजुटता और अनुशासन में होती है।
खेड़ा और बारडोली आंदोलन से मिली राष्ट्रीय पहचान
सरदार पटेल के राजनीतिक जीवन में खेड़ा सत्याग्रह और बारडोली आंदोलन का विशेष महत्व रहा। वर्ष 1918 में खेड़ा सत्याग्रह के दौरान उन्होंने किसानों को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय फसल खराब होने के कारण किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे थे। किसानों की मांग थी कि फसल की स्थिति को देखते हुए उनसे लगान वसूली में राहत दी जाए।पटेल ने किसानों को एकजुट किया और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष किया। इस आंदोलन ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाया।इसके बाद 1928 का बारडोली सत्याग्रह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। अंग्रेजी शासन द्वारा लगान बढ़ाए जाने के विरोध में उन्होंने किसानों का नेतृत्व किया। आंदोलन में महिलाओं और पुरुषों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। किसानों की एकजुटता और पटेल के नेतृत्व के सामने ब्रिटिश प्रशासन को पीछे हटना पड़ा। इसी आंदोलन के बाद महिलाओं ने उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि दी।इस तरह वल्लभभाई पटेल सरदार पटेल के नाम से पूरे देश में प्रसिद्ध हो गए।

आजादी के बाद सबसे बड़ी चुनौती: रियासतों का एकीकरण
15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ, लेकिन आजादी के साथ देश के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी थी। ब्रिटिश शासन के अंत के बाद देश में 560 से अधिक रियासतों के भविष्य का सवाल था। इन रियासतों के सामने भारत या पाकिस्तान में शामिल होने अथवा कुछ परिस्थितियों में अलग रहने का विकल्प था।यदि इन रियासतों का एकीकरण नहीं होता, तो भारत का राजनीतिक और भौगोलिक स्वरूप बिखरा रह सकता था। देश के अलग-अलग हिस्सों में स्वतंत्र रियासतों के बने रहने से प्रशासन, सुरक्षा, व्यापार और राष्ट्रीय एकता के सामने गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती थीं।ऐसे समय में सरदार पटेल को स्वतंत्र भारत का पहला उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री बनाया गया। उन्होंने रियासतों के एकीकरण की जिम्मेदारी संभाली। इस महत्वपूर्ण कार्य में उनके सहयोगी और तत्कालीन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी वी.पी. मेनन की भूमिका भी बेहद अहम रही।पटेल ने रियासतों के शासकों से बातचीत की, उन्हें भारतीय संघ में शामिल होने के लिए समझाया और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से अधिकांश रियासतों का विलय सुनिश्चित किया। उनकी रणनीति में संवाद, समझौता, राजनीतिक दृढ़ता और आवश्यकता पड़ने पर निर्णायक कदम उठाने की क्षमता शामिल थी।
जूनागढ़ से हैदराबाद तक, हर चुनौती का किया सामना
रियासतों का एकीकरण आसान नहीं था। कई रियासतों के शासक भारत में शामिल होने को लेकर असमंजस में थे। कुछ मामलों में परिस्थितियां बेहद जटिल थीं। जूनागढ़ और हैदराबाद जैसी रियासतें राष्ट्रीय एकीकरण के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरीं।जूनागढ़ के नवाब ने पाकिस्तान में शामिल होने का फैसला किया, जबकि वहां की अधिकांश आबादी भारत के साथ जुड़ने के पक्ष में थी। इस मामले में राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयासों के बाद जनमत संग्रह कराया गया, जिसमें भारत में विलय के पक्ष में भारी समर्थन मिला।हैदराबाद के निजाम भी स्वतंत्र रहने की इच्छा रखते थे। लंबे समय तक बातचीत के बाद सितंबर 1948 में भारत सरकार ने सैन्य कार्रवाई की, जिसे ऑपरेशन पोलो के नाम से जाना जाता है। इसके बाद हैदराबाद का भारतीय संघ में विलय हुआ।इन घटनाओं ने दिखाया कि सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता के सवाल पर कितने दृढ़ थे। उन्होंने जटिल परिस्थितियों में भी देश की अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
स्वतंत्र भारत के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने में योगदान
सरदार पटेल का योगदान केवल रियासतों के एकीकरण तक सीमित नहीं था। उन्होंने स्वतंत्र भारत के प्रशासनिक और संस्थागत ढांचे को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।वे अखिल भारतीय सेवाओं को देश की प्रशासनिक एकता और स्थिरता के लिए जरूरी मानते थे। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) जैसी सेवाओं को मजबूत बनाए रखने के पक्ष में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।उनका मानना था कि देश की एकता बनाए रखने के लिए एक मजबूत, निष्पक्ष और जिम्मेदार प्रशासनिक व्यवस्था जरूरी है। यही कारण है कि उन्हें भारतीय सिविल सेवाओं के संस्थागत विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देने वाला नेता माना जाता है।15 दिसंबर 1950 को सरदार पटेल का निधन हो गया। हालांकि, उनके निधन के कई दशक बाद भी राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय बना हुआ है। वर्ष 1991 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।सरदार पटेल के योगदान और उनके विराट व्यक्तित्व को सम्मान देने के लिए गुजरात के केवड़िया में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण कराया गया। 31 अक्टूबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका अनावरण किया था। करीब 182 मीटर ऊंची यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा के रूप में जानी जाती है।यह स्मारक केवल सरदार पटेल की याद को संजोने का माध्यम नहीं है, बल्कि भारत की एकता, दृढ़ इच्छाशक्ति और सामूहिक शक्ति का प्रतीक भी है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं और भारत के इतिहास में उनके योगदान को करीब से जानने का अवसर प्राप्त करते हैं।
सरदार पटेल के विचार आज भी दिखाते हैं एकता की राह
सरदार वल्लभभाई पटेल का व्यक्तित्व केवल एक कुशल प्रशासक या स्वतंत्रता सेनानी तक सीमित नहीं था। उनके विचारों में सामाजिक एकता, अनुशासन, समानता और राष्ट्रहित को सर्वोच्च स्थान प्राप्त था।वे मानते थे कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके नागरिकों की एकजुटता में होती है। जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र के आधार पर समाज का बंटवारा देश की प्रगति में बाधा बन सकता है। इसलिए उन्होंने हमेशा लोगों से आपसी मतभेद भुलाकर राष्ट्रहित में एकजुट रहने का आह्वान किया।उनके विचारों का एक महत्वपूर्ण पक्ष किसानों और आम नागरिकों के प्रति उनकी संवेदनशीलता भी था। खेड़ा और बारडोली आंदोलनों में उनकी भूमिका इस बात का प्रमाण है कि वे आम लोगों की समस्याओं को समझते थे और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने से पीछे नहीं हटते थे।उनकी सोच में एक ऐसा भारत शामिल था, जहां हर नागरिक को सम्मान मिले, समाज में आपसी भाईचारा बना रहे और देश विकास के रास्ते पर आगे बढ़े।
राष्ट्रीय एकता दिवस पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने किया नमन
सरदार पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को देशभर में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली स्थित सरदार पटेल चौक पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के एकतानगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पहुंचकर लौह पुरुष को श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में सरदार पटेल को अखंड भारत का शिल्पकार और देश का लौह पुरुष बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना जीवन मजबूत, समृद्ध और सक्षम भारत के निर्माण के लिए समर्पित कर दिया।वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरदार पटेल को आधुनिक भारत का निर्माता बताते हुए उनके साहस, दूरदर्शिता और रियासतों के एकीकरण में निभाई गई भूमिका को याद किया। उन्होंने अखिल भारतीय सेवाओं की स्थापना और किसानों के अधिकारों के लिए किए गए संघर्ष में भी पटेल के योगदान को रेखांकित किया।
रन फॉर यूनिटी से दिया जा रहा एकजुटता का संदेश
राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर देशभर में रन फॉर यूनिटी सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों में आम नागरिकों, युवाओं, विद्यार्थियों और विभिन्न संगठनों के लोग भाग ले रहे हैं।गुजरात के एकतानगर में राष्ट्रीय स्तर का मुख्य समारोह आयोजित किया जा रहा है। इसमें एकता दिवस परेड के माध्यम से देश की सुरक्षा, अनुशासन और विविधता में एकता का संदेश दिया जा रहा है। विभिन्न सुरक्षा बलों और राज्य पुलिस के जवान भी इस आयोजन में हिस्सा ले रहे हैं।इसके अलावा स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी संस्थानों में राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई जा रही है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों, जागरूकता अभियानों और विशेष आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को सरदार पटेल के जीवन और उनके राष्ट्र निर्माण संबंधी योगदान से परिचित कराया जा रहा है।
सरदार पटेल की विरासत को आगे बढ़ाना ही सच्ची श्रद्धांजलि
सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती हमें याद दिलाती है कि भारत की एकता और अखंडता किसी एक दिन का विषय नहीं, बल्कि निरंतर निभाई जाने वाली सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जिस भारत की कल्पना की थी, उसकी बुनियाद आपसी विश्वास, सामाजिक सद्भाव, मजबूत प्रशासन और राष्ट्रीय एकता पर टिकी थी।आज जब देश विकास, शिक्षा, तकनीक और वैश्विक पहचान के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब सरदार पटेल के विचारों की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है।उनका जीवन सिखाता है कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति, स्पष्ट सोच और सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने अपने फैसलों और कार्यों से साबित किया कि मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों में भी दृढ़ नेतृत्व के जरिए रास्ता निकाला जा सकता है।इसलिए 31 अक्टूबर केवल सरदार पटेल की जयंती मनाने का दिन नहीं, बल्कि देश की एकता और अखंडता के प्रति अपने कर्तव्यों को दोहराने का अवसर भी है। जिस एक भारत के निर्माण के लिए लौह पुरुष ने अपना पूरा जीवन समर्पित किया, उसे मजबूत बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को उनकी 151वीं जयंती पर शत-शत नमन।

