Su-30 MKI की बढ़ेगी ताकत, रूस की RVV-BD मिसाइल से लैस करने की तैयारी

Editorial
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नई दिल्ली भारतीय वायु सेना की ताकत को और बढ़ाने की दिशा में रक्षा मंत्रालय एक अहम प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। इसके तहत भारतीय वायु सेना के प्रमुख लड़ाकू विमान Su-30 MKI को रूस में निर्मित लंबी दूरी की RVV-BD एयर-टू-एयर मिसाइल से लैस करने की योजना है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद भारतीय लड़ाकू विमानों की लंबी दूरी से हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता में महत्वपूर्ण इजाफा हो सकता है।रक्षा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव पर डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की बैठक में चर्चा और संभावित मंजूरी की उम्मीद है। इस कदम को भारतीय वायु सेना के एयर-टू-एयर हथियारों के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Su-30 MKI को मिलेगा लंबी दूरी का हथियार

Su-30 MKI लंबे समय से भारतीय वायु सेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों में शामिल है। बड़ी संख्या में इसकी मौजूदगी के कारण इसे वायु सेना की प्रमुख परिचालन ताकत माना जाता है। अब इन विमानों को लंबी दूरी की RVV-BD मिसाइल से लैस करने की योजना के पीछे उद्देश्य हवाई युद्ध में दूर से लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता को मजबूत करना है।रिपोर्ट के मुताबिक, RVV-BD को लंबी दूरी के एयर-टू-एयर हथियार के रूप में विकसित किया गया है। इसकी मारक क्षमता करीब 300 किलोमीटर तक बताई जाती है। ऐसी क्षमता वाला हथियार लड़ाकू विमान को अपेक्षाकृत दूर रहकर हवाई लक्ष्यों के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद कर सकता है।

AEW&C और निगरानी विमानों के खिलाफ अहम भूमिका

RVV-BD की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में इसकी लंबी दूरी बताई जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, यह मिसाइल केवल सामान्य लड़ाकू विमानों के अलावा हवा में मौजूद महत्वपूर्ण सपोर्ट और निगरानी प्लेटफॉर्म को भी निशाना बनाने के लिए डिजाइन की गई है।एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल यानी AEW&C विमान किसी भी आधुनिक वायु अभियान में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये विमान हवा में मौजूद अन्य लड़ाकू विमानों को निगरानी, सूचना और लक्ष्य संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। ऐसे में लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल भारतीय वायु सेना की रणनीतिक क्षमता को बढ़ा सकती है।

करीब 6 मैक की रफ्तार का दावा

रिपोर्ट में RVV-BD के कुछ संस्करणों की गति करीब 6 मैक तक बताई गई है। हालांकि किसी हथियार की वास्तविक परिचालन क्षमता केवल उसकी अधिकतम गति और मारक दूरी से तय नहीं होती। इसमें सेंसर, लक्ष्य की प्रकृति, लॉन्च प्लेटफॉर्म और युद्ध की परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होती हैं।फिर भी लंबी दूरी और तेज गति वाले एयर-टू-एयर हथियार किसी भी वायु सेना की ‘बियॉन्ड विजुअल रेंज’ यानी BVR क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

Su-30 MKI की बढ़ेगी ताकत
Su-30 MKI की बढ़ेगी ताकत

स्वदेशी अस्त्र मिसाइल पर भी फोकस

भारत केवल विदेशी हथियारों पर निर्भर रहने के बजाय स्वदेशी एयर-टू-एयर मिसाइल क्षमता को भी लगातार मजबूत कर रहा है। DRDO अस्त्र मिसाइल परिवार के नए संस्करणों पर काम कर रहा है।रिपोर्ट के अनुसार, भविष्य के अस्त्र संस्करणों में लंबी दूरी तक हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। इससे भारतीय वायु सेना के पास अलग-अलग दूरी और परिस्थितियों के लिए स्वदेशी एयर-टू-एयर हथियारों का विकल्प मजबूत हो सकता है।

फ्रांस की मीटियर मिसाइल भी बेड़े में शामिल

भारत अपनी हवाई मारक क्षमता बढ़ाने के लिए फ्रांस की Meteor एयर-टू-एयर मिसाइलों का भी इस्तेमाल कर रहा है। Meteor को लंबी दूरी के हवाई लक्ष्यों के खिलाफ प्रभावी मिसाइलों में गिना जाता है।इस तरह भारत की रणनीति में रूसी, फ्रांसीसी और स्वदेशी तकनीक का संयोजन दिखाई देता है। इसका मकसद वायु सेना के अलग-अलग लड़ाकू विमानों को उनकी जरूरत के मुताबिक आधुनिक हथियारों से लैस करना है।

260 से ज्यादा Su-30 MKI भारतीय वायु सेना की ताकत

भारतीय वायु सेना के पास 260 से अधिक Su-30 MKI होने की बात रिपोर्ट में कही गई है। इतनी बड़ी संख्या में मौजूदगी के कारण इस लड़ाकू विमान का आधुनिकीकरण भारतीय वायु शक्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।Su-30 MKI को अपग्रेड करने से पुराने प्लेटफॉर्म को आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इसमें बेहतर एवियोनिक्स, सेंसर, हथियार प्रणाली और अन्य क्षमताओं को शामिल करने पर काम किया जा रहा है।

दो बड़े अपग्रेड प्रोजेक्ट पर काम

भारत Su-30 MKI बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए कई स्तरों पर काम कर रहा है। प्रस्तावित अपग्रेड के बाद विमानों की निगरानी, लक्ष्य पहचानने और लंबी दूरी के हथियारों के इस्तेमाल की क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है।इस तरह का आधुनिकीकरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नए लड़ाकू विमानों की बड़ी संख्या में तैनाती में समय लगता है। मौजूदा बेड़े को आधुनिक बनाकर वायु सेना अपनी परिचालन क्षमता को मजबूत बनाए रख सकती है।

AL-31 इंजन के ओवरहॉल पर भी जोर

Su-30 MKI में इस्तेमाल होने वाले AL-31 इंजन के रखरखाव और ओवरहॉल से जुड़े काम पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL के जरिए विमानों और इंजनों की उपलब्धता बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।इंजन का समय पर रखरखाव और ओवरहॉल लड़ाकू विमानों की परिचालन उपलब्धता के लिए बेहद जरूरी होता है। इससे विमान लंबे समय तक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

ऑपरेशन सिंदूर में भी Su-30 MKI की भूमिका

रिपोर्ट में Su-30 MKI की ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। इस अभियान में भारतीय लड़ाकू विमानों द्वारा लंबी दूरी के एयर-टू-ग्राउंड हथियारों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई थी।Su-30 MKI को लंबी दूरी के हथियारों से लैस करने का अनुभव भविष्य की रणनीति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। अब एयर-टू-एयर क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिए जाने से इस विमान की बहु-भूमिका क्षमता और बढ़ सकती है।

HAL को मिल सकता है ALH Mark-3 का बड़ा ऑर्डर

रक्षा क्षेत्र में केवल लड़ाकू विमानों पर ही नहीं, बल्कि हेलिकॉप्टर बेड़े को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, HAL को Advanced Light Helicopter (ALH) Mark-3 के लिए बड़ा ऑर्डर मिलने की संभावना है।यदि यह सौदा आगे बढ़ता है तो भारतीय सशस्त्र बलों के हेलिकॉप्टर बेड़े को मजबूती मिलने के साथ स्वदेशी रक्षा उत्पादन को भी बढ़ावा मिल सकता है।

रूस के साथ रक्षा सहयोग के बीच अहम कदम

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से पहले इस प्रस्ताव को लेकर चर्चा और भी महत्वपूर्ण हो गई है। भारत और रूस के बीच लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में सहयोग रहा है। Su-30 MKI भी दोनों देशों के रक्षा सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण है।RVV-BD जैसे हथियारों के संभावित एकीकरण से भारत की लंबी दूरी की हवाई युद्ध क्षमता को नया विकल्प मिल सकता है। हालांकि प्रस्ताव की अंतिम स्थिति और खरीद या एकीकरण से जुड़े निर्णय संबंधित सरकारी प्रक्रियाओं और मंजूरी पर निर्भर करेंगे।Su-30 MKI को RVV-BD जैसी लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल से लैस करने की प्रस्तावित योजना भारतीय वायु सेना के आधुनिकीकरण की दिशा में अहम कदम हो सकती है। इसके साथ ही अस्त्र के नए संस्करण, Meteor मिसाइल, Su-30 MKI अपग्रेड, AL-31 इंजन ओवरहॉल और ALH Mark-3 जैसे प्रोजेक्ट भारतीय रक्षा क्षमता को कई स्तरों पर मजबूत करने की दिशा दिखाते हैं। अगर इन प्रस्तावों को मंजूरी और निर्धारित समय पर लागू किया जाता है, तो भारतीय वायु सेना की लंबी दूरी की हवाई युद्ध क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हो सकती है।

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