स्वामी प्रसाद मौर्य का BJP पर हमला, बोले- भाजपा में जो भी है देश का दुश्मन

Editorial
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लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। इसी बीच पूर्व कैबिनेट मंत्री और अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने भारतीय जनता पार्टी और केंद्र व उत्तर प्रदेश की सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। ‘न्यूज़ 7 हिंदी’ के विशेष कार्यक्रम ‘27 का सरताज कौन’ में बातचीत के दौरान मौर्य ने भाजपा की नीतियों, रोजगार, महंगाई, किसानों, शिक्षा, कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।इंटरव्यू के दौरान भाजपा में शामिल लोगों को लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य ने बेहद तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “जो भी भाजपा में है, वह देश का दुश्मन है, चाहे वह मेरी बेटी हो या मेरा बेटा ही क्यों न हो।” उनके इस बयान के बाद यूपी की सियासत में राजनीतिक चर्चा तेज हो सकती है। गौरतलब है कि उनकी बेटी संघमित्रा मौर्य भाजपा से जुड़ी रही हैं।यह बयान स्वामी प्रसाद मौर्य का राजनीतिक मत है। इसे भाजपा में शामिल सभी लोगों के बारे में तथ्यात्मक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

स्वामी प्रसाद मौर्य का BJP पर हमला
स्वामी प्रसाद मौर्य का BJP पर हमला

BJP सरकार के वादों पर मौर्य ने उठाए सवाल

स्वामी प्रसाद मौर्य ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को “डबल इंजन सरकार” बताते हुए उसके कामकाज पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि सरकार चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने में सफल नहीं रही है।मौर्य ने खासतौर पर बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश का बड़ा युवा वर्ग रोजगार की तलाश में है। उन्होंने सरकारी भर्तियों को लेकर भी सवाल खड़े किए और कहा कि इसका असर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के आरक्षण पर पड़ता है। रोजगार और सरकारी भर्ती को लेकर मौर्य द्वारा लगाए गए आरोप उनके राजनीतिक विश्लेषण और दावे हैं। इन दावों का मूल्यांकन करने के लिए संबंधित सरकारी आंकड़ों और भर्ती के आधिकारिक रिकॉर्ड को अलग से देखना जरूरी है।

80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन पर भी साधा निशाना

इंटरव्यू के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य ने केंद्र सरकार की मुफ्त राशन योजना को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों को मुफ्त राशन दिए जाने को सरकार की उपलब्धि के बजाय आर्थिक स्थिति से जोड़कर देखा।मौर्य ने कहा कि अगर बड़ी संख्या में परिवारों को लंबे समय तक मुफ्त राशन की आवश्यकता पड़ रही है, तो सरकार को यह भी देखना चाहिए कि इन परिवारों की आय और रोजगार की स्थिति क्या है।उन्होंने सवाल उठाया कि केवल राशन उपलब्ध कराने से गरीब परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा और बेहतर करियर के अवसर कैसे सुनिश्चित होंगे। उनके मुताबिक सरकार की प्राथमिकता ऐसी व्यवस्था बनाने की होनी चाहिए, जिससे परिवार आत्मनिर्भर बन सकें।

महंगाई और किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरा

स्वामी प्रसाद मौर्य ने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर महंगाई को नियंत्रित करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि महंगाई का सीधा असर आम परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ता है।किसानों के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार को घेरा। मौर्य ने दावा किया कि चुनाव के दौरान किसानों की आय और फसलों के लाभकारी मूल्य को लेकर कई वादे किए गए, लेकिन जब फसल तैयार होती है तो किसानों को खरीद केंद्र और उचित मूल्य को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।उन्होंने छुट्टा पशुओं की समस्या का भी जिक्र किया। मौर्य के अनुसार आवारा पशुओं से फसलों को नुकसान पहुंचता है और किसानों को रात में खेतों की रखवाली करनी पड़ती है।

कानून-व्यवस्था पर योगी सरकार पर गंभीर आरोप

उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में आपराधिक मामलों में कार्रवाई करते समय जातिगत भेदभाव किया जाता है।मौर्य ने अपने दावे के समर्थन में अयोध्या, गोंडा और सुल्तानपुर की कुछ आपराधिक घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में प्रभावशाली लोगों को संरक्षण मिलने की वजह से कार्रवाई प्रभावित होती है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दलित, पिछड़े या मुस्लिम समुदाय से जुड़े किसी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई तेजी से होती है, जबकि दूसरी जातियों से जुड़े आरोपियों के मामले में अलग रवैया अपनाया जाता है।ये आरोप गंभीर राजनीतिक दावे हैं। इनके संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित मामलों की FIR, पुलिस कार्रवाई, गिरफ्तारियों और न्यायिक रिकॉर्ड को देखना जरूरी होगा।

सरकारी स्कूलों के मर्जर का मुद्दा भी उठाया

शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी स्वामी प्रसाद मौर्य ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने सरकारी स्कूलों को मर्ज करने की नीति का विरोध किया।2025 में उत्तर प्रदेश सरकार के 50 से कम नामांकन वाले 27,764 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को दूसरे विद्यालयों के साथ मर्ज करने के फैसले का स्वामी प्रसाद मौर्य और उनकी पार्टी ने विरोध किया था। जुलाई 2025 में उन्होंने इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन भी सौंपा था।मौर्य का तर्क था कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को अगर स्कूल के लिए ज्यादा दूरी तय करनी पड़ेगी तो इसका असर उनकी पढ़ाई पर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से स्कूलों को बंद या मर्ज करने के बजाय शिक्षकों की भर्ती और मौजूदा स्कूलों को मजबूत करने की मांग की थी।

‘पद का लालच नहीं, मुद्दों की राजनीति’ का दावा

इंटरव्यू में जब स्वामी प्रसाद मौर्य से उनके राजनीतिक सफर और अलग-अलग दलों में जाने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए राजनीति नहीं की।उन्होंने दावा किया कि उनकी राजनीति गरीबों, दलितों और पिछड़े वर्गों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रही है। मौर्य ने कहा कि अगर सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों की बात आती है तो वह बड़े से बड़ा राजनीतिक पद छोड़ने से भी पीछे नहीं हटेंगे।उनके इस बयान को उनके राजनीतिक सफर की उनकी अपनी व्याख्या के रूप में देखा जाना चाहिए।

2027 चुनाव से पहले बढ़ रहा सियासी तापमान

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। भाजपा, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य राजनीतिक संगठन अपने-अपने मुद्दों को लेकर जनता के बीच पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।स्वामी प्रसाद मौर्य लंबे समय से सामाजिक न्याय, जातिगत प्रतिनिधित्व, आरक्षण और पिछड़े-दलित वर्गों से जुड़े मुद्दों को लेकर मुखर रहे हैं। ऐसे में ‘27 का सरताज कौन’ कार्यक्रम में उनके बयान भी इसी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा हैं।उनका भाजपा पर हमला कई मुद्दों को एक साथ जोड़ता है—रोजगार, महंगाई, किसान, शिक्षा, कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय। हालांकि इन मुद्दों पर सरकार और भाजपा का पक्ष अलग हो सकता है और राजनीतिक दल अपने-अपने आंकड़ों तथा नीतियों के आधार पर जनता के सामने अपना पक्ष रखते हैं।

बेटी और बेटे को लेकर बयान ने खींचा ध्यान

इंटरव्यू में भाजपा में शामिल लोगों को लेकर दिया गया बयान सबसे ज्यादा चर्चा में आने वाला हिस्सा रहा। मौर्य ने कहा कि भाजपा में शामिल व्यक्ति अगर उनका अपना बेटा या बेटी भी हो, तब भी वह उसे देश का दुश्मन मानेंगे।यह टिप्पणी राजनीतिक निष्ठा और पारिवारिक संबंधों को लेकर उनके कठोर रुख को दर्शाती है। उनकी बेटी संघमित्रा मौर्य भाजपा से जुड़ी रही हैं और 2019 में बदायूं से भाजपा की लोकसभा सांसद चुनी गई थीं। ऐसे में उनके बयान में बेटी का नाम आने से राजनीतिक चर्चा और बढ़ गई है।स्वामी प्रसाद मौर्य ने ‘27 का सरताज कौन’ कार्यक्रम में भाजपा और केंद्र तथा उत्तर प्रदेश की सरकार पर कई मोर्चों पर सवाल उठाए। उन्होंने भाजपा की राजनीतिक विचारधारा, रोजगार, राशन, महंगाई, किसान, शिक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं।सबसे तीखी टिप्पणी भाजपा में शामिल लोगों को लेकर रही, जब उन्होंने कहा कि “जो भी भाजपा में है, वह देश का दुश्मन है, चाहे वह मेरा बेटा या बेटी ही क्यों न हो।”मौर्य के इन बयानों पर भाजपा की प्रतिक्रिया आने के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है। फिलहाल उनके इंटरव्यू ने उत्तर प्रदेश की 2027 की राजनीतिक चर्चा में सामाजिक न्याय, रोजगार और भाजपा-विरोधी राजनीति से जुड़े मुद्दों को फिर केंद्र में ला दिया है।

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