रिपोर्ट:आयुष तिवारी
एटा शहर की काशीराम आवास कॉलोनी इन दिनों जलभराव, गंदगी और बदहाल व्यवस्था की मार झेल रही है। बारिश के बाद कॉलोनी की सड़कें तालाब में तब्दील हो गई हैं और लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नालियों पर कथित अवैध कब्जों और पक्के निर्माण के कारण जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। इसका परिणाम यह है कि बारिश का पानी कई दिनों तक सड़कों और गलियों में जमा रहता है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।समिति के सामने जीटी रोड से सटे क्षेत्र में हालात सबसे अधिक गंभीर बताए जा रहे हैं। यहां नालियों के ऊपर कथित रूप से किए गए निर्माण और अतिक्रमण के कारण पानी आगे नहीं बढ़ पा रहा है। नतीजतन बारिश का पानी सड़कों पर भर जाता है और पूरे इलाके में गंदगी फैल जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बारिश के बाद यही स्थिति बन जाती है, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
सड़कें बनीं तालाब, लोगों का निकलना हुआ मुश्किल
बारिश के बाद कॉलोनी की अधिकांश गलियां जलमग्न हो जाती हैं। कई स्थानों पर पानी इतना भर जाता है कि पैदल चलना भी चुनौती बन जाता है। दोपहिया वाहन फिसलने का खतरा बना रहता है, जबकि बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।स्थानीय निवासी बताते हैं कि कई बार बच्चों के स्कूल जाने में दिक्कत होती है, वहीं नौकरीपेशा लोगों को भी समय पर अपने कार्यस्थल तक पहुंचने में परेशानी उठानी पड़ती है। जलभराव के कारण कई मकानों में भी पानी घुसने की शिकायतें सामने आती हैं, जिससे लोगों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ता है।

नालियों पर कथित अवैध कब्जों से बिगड़ी व्यवस्था
कॉलोनीवासियों का आरोप है कि कुछ लोगों ने नालियों के ऊपर कथित रूप से पक्के निर्माण कर लिए हैं और कहीं-कहीं दुकानों का निर्माण भी कर दिया गया है। इससे नालियों की चौड़ाई कम हो गई है और पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया है।लोगों का कहना है कि यदि इन कथित अतिक्रमणों को समय रहते हटाया जाता तो आज जलभराव जैसी गंभीर समस्या उत्पन्न नहीं होती। उनका आरोप है कि संबंधित विभागों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
गंदगी से बढ़ा संक्रामक बीमारियों का खतरा
जलभराव केवल आवागमन की समस्या नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है। कई दिनों तक गंदा पानी जमा रहने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों को डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और अन्य जलजनित बीमारियों की चिंता सता रही है।निवासियों का कहना है कि बारिश के बाद पूरे इलाके में बदबू फैल जाती है। गंदे पानी के कारण वातावरण दूषित हो रहा है और छोटे बच्चों तथा बुजुर्गों के बीमार होने का खतरा बढ़ गया है।

निरीक्षण हुए, समाधान अब तक नहीं
स्थानीय लोगों के अनुसार नगर पालिका के अधिकारी और कर्मचारी कई बार मौके का निरीक्षण कर चुके हैं। शिकायतें भी दर्ज कराई गईं, लेकिन निरीक्षण के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।कॉलोनीवासियों का आरोप है कि केवल औपचारिक निरीक्षण कर कार्रवाई का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन कथित अतिक्रमण हटाने या नालियों की सफाई एवं मरम्मत की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
स्थायी समाधान की मांग
कॉलोनी के लोगों का कहना है कि अस्थायी सफाई से समस्या का समाधान नहीं होगा। यदि नालियों पर हुए कथित अवैध निर्माण नहीं हटाए गए और जल निकासी व्यवस्था को वैज्ञानिक तरीके से दुरुस्त नहीं किया गया तो हर वर्ष बरसात में यही स्थिति बनी रहेगी।उन्होंने जिला प्रशासन और नगर पालिका से मांग की है कि पूरे क्षेत्र का संयुक्त सर्वे कराया जाए। जहां भी नियमों के विरुद्ध निर्माण या अतिक्रमण पाया जाए, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाए और जल निकासी व्यवस्था को सुचारु बनाया जाए।

जनप्रतिनिधियों से भी हस्तक्षेप की मांग
स्थानीय नागरिकों ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से भी समस्या का संज्ञान लेने की अपील की है। उनका कहना है कि यह केवल एक कॉलोनी की समस्या नहीं बल्कि सैकड़ों परिवारों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और दैनिक जीवन से जुड़ा मुद्दा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
प्रशासन से बड़ी उम्मीद
कॉलोनीवासियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करेगा। लोगों की मांग है कि नालियों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था का सुधार और कथित अतिक्रमणों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि हर बारिश में होने वाली इस परेशानी से स्थायी राहत मिल सके।
अब सबसे बड़ा सवाल…
काशीराम आवास कॉलोनी में जलभराव की समस्या से परेशान लोग अब प्रशासन की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं। सवाल यह है कि क्या नगर पालिका कथित अवैध कब्जों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करेगी और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करेगी, या फिर कॉलोनीवासी हर बारिश में जलभराव, गंदगी और बीमारियों के खतरे के बीच जीवन बिताने को मजबूर रहेंगे? आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई ही इस सवाल का जवाब तय करेगी।
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