“गरीब पिता की सबसे बड़ी चिंता हुई खत्म! बेटियों की सुरक्षा के लिए मिला पक्का घर, खुशी से छलक पड़े आंसू”

Editorial
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रिपोर्ट:दीपचंद्र दीक्षित

शमसाबाद/कायमगंज (फर्रुखाबाद) कभी बरसात की हर बूंद इस परिवार के लिए आफत बनकर बरसती थी। गर्मी में तपती झोपड़ी और सर्दियों में ठंडी हवाओं के बीच जिंदगी किसी संघर्ष से कम नहीं थी। लेकिन अब इस परिवार की जिंदगी बदलने जा रही है। वर्षों से एक जर्जर झोपड़ी में रहने को मजबूर गरीब परिवार को आखिरकार पक्के मकान की सौगात मिलने जा रही है। फर्रुखाबाद के शमसाबाद थाना क्षेत्र के गांव बिरिया डाढ़े में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। यहां समाजवादी पार्टी के नेता अजीत यादव ने निर्धन परिवार के नए मकान का विधिवत भूमि पूजन कर शिलान्यास किया और एक ऐसे सपने की नींव रखी, जिसका इंतजार पूरा परिवार वर्षों से कर रहा था।यह केवल ईंट और सीमेंट से बनने वाले घर की शुरुआत नहीं थी, बल्कि एक पिता के अधूरे सपने, बेटियों की सुरक्षा और पूरे परिवार के सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत थी। भूमि पूजन के दौरान परिवार की आंखों में खुशी के आंसू थे और गांव के लोग इस मानवीय पहल के साक्षी बने।

बरसों तक झोपड़ी में बीती जिंदगी, हर मौसम देता था दर्द

परिवार लंबे समय से एक जर्जर झोपड़ी में जीवन गुजार रहा था। बरसात आते ही झोपड़ी टपकने लगती थी और पूरा परिवार रातभर जागकर किसी तरह खुद को भीगने से बचाता था। गर्मियों में टीन और फूस की झोपड़ी आग की तरह तपती थी, जबकि सर्दियों में ठंडी हवाएं सीधे भीतर तक पहुंच जाती थीं।आर्थिक तंगी इतनी गहरी थी कि परिवार अपने दम पर पक्का मकान बनवाने की कल्पना भी नहीं कर सकता था। रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना ही सबसे बड़ी चुनौती थी। ऐसे में अपने सिर पर सुरक्षित छत का सपना हर साल अधूरा रह जाता था।

बेटियों की सुरक्षा को लेकर हर दिन रहती थी चिंता

परिवार के मुखिया ने भावुक होकर बताया कि उनका सबसे बड़ा सपना अपनी बेटियों को एक सुरक्षित और सम्मानजनक घर देना था। झोपड़ी में रहते हुए उन्हें हर समय बेटियों की सुरक्षा की चिंता सताती रहती थी। बारिश, तेज हवा, अंधेरी रात और असुरक्षित माहौल उन्हें हमेशा डराता था।उन्होंने कहा कि कई बार लगा कि शायद यह सपना कभी पूरा नहीं होगा, लेकिन अब जब मकान निर्माण शुरू हो रहा है तो ऐसा लग रहा है जैसे भगवान ने उनकी वर्षों की प्रार्थना सुन ली हो। पिता की आंखों में खुशी के आंसू और चेहरे पर संतोष साफ दिखाई दे रहा था।

अजीत यादव ने देखा दर्द, फिर लिया मदद का संकल्प

जब समाजवादी पार्टी के नेता अजीत यादव को इस परिवार की दयनीय स्थिति की जानकारी मिली तो उन्होंने स्वयं मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। परिवार की कठिनाइयों को करीब से देखने के बाद उन्होंने तुरंत मदद का निर्णय लिया।भूमि पूजन के दौरान अजीत यादव ने कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े जरूरतमंद लोगों की सहायता करना ही सच्ची मानव सेवा है। उनका कहना था कि हर व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है और किसी भी परिवार को मजबूरी में झोपड़ी में रहने के लिए विवश नहीं होना चाहिए।उन्होंने कहा कि समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब सक्षम लोग जरूरतमंदों का हाथ थामें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी ऐसे गरीब और जरूरतमंद परिवारों की हरसंभव सहायता की जाएगी।

भूमि पूजन बना भावनाओं का पल, पूरे गांव ने दी शुभकामनाएं

जैसे ही भूमि पूजन की रस्म पूरी हुई और नए मकान की नींव रखी गई, परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिवार के सदस्य भावुक हो उठे और उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।उन्होंने अजीत यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज उन्हें केवल मकान नहीं मिला, बल्कि सम्मान और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद भी मिली है। अब उनकी बेटियां एक पक्के और सुरक्षित घर में रह सकेंगी और परिवार को हर मौसम की मार से राहत मिलेगी।गांव के लोगों ने भी इस पहल का स्वागत किया। ग्रामीणों का कहना था कि ऐसे कार्य समाज में सेवा, संवेदनशीलता और इंसानियत का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि यदि समाज के सक्षम लोग इसी तरह आगे आएं तो कोई भी गरीब परिवार बेघर नहीं रहेगा।

‘घर’ सिर्फ चार दीवारें नहीं, सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक

ग्रामीणों का कहना है कि गरीब परिवार के लिए पक्का मकान केवल रहने की जगह नहीं होता, बल्कि वह सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास का प्रतीक होता है। खासकर बेटियों वाले परिवार के लिए सुरक्षित घर सबसे बड़ी जरूरत होती है।इस पहल ने यह साबित किया कि सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय सोच से किसी परिवार की पूरी जिंदगी बदली जा सकती है। एक छोटी-सी मदद किसी के जीवन में नई उम्मीद जगा सकती है।

कई गणमान्य लोग रहे मौजूद

भूमि पूजन कार्यक्रम में क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक, समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता इलियास मंसूरी सहित अनेक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने परिवार को नए आशियाने के लिए शुभकामनाएं दीं और इस मानवीय पहल की सराहना की।

मानवता की मिसाल बनी यह पहल

आज जब समाज में अक्सर स्वार्थ और राजनीति की चर्चाएं होती हैं, ऐसे समय में बिरिया डाढ़े गांव की यह घटना इंसानियत और सामाजिक जिम्मेदारी की नई मिसाल बनकर सामने आई है। एक पिता का वर्षों पुराना सपना, बेटियों की सुरक्षा की चिंता और सम्मानजनक जीवन की उम्मीद अब हकीकत में बदलती नजर आ रही है।यह सिर्फ एक मकान का शिलान्यास नहीं, बल्कि उस विश्वास की नींव है जो बताती है कि यदि समाज साथ खड़ा हो जाए तो किसी भी गरीब परिवार के जीवन में खुशियों का नया सवेरा लाया जा सकता है। यही वजह है कि इस मानवीय पहल की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है और लोग इसे सेवा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरणादायक उदाहरण मान रहे हैं।

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