अलीगढ़ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के राइडिंग फील्ड की जमीन को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन और नगर निगम के बीच विवाद सामने आया है। एएमयू की कुलपति प्रो. नईमा खातून ने नगर निगम पर विश्वविद्यालय की जमीन पर बिना पूर्व सूचना के कब्जा लेने की कोशिश करने का गंभीर आरोप लगाया है। वीसी का कहना है कि जिस भूमि को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, वह लंबे समय से एएमयू के अधिग्रहण में है और राजस्व अभिलेखों में भी इसे विश्वविद्यालय के घुड़सवार फील्ड के रूप में दर्ज किया गया है।मामले के सामने आने के बाद एएमयू प्रशासन ने भूमि के स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों को आधार बनाते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है। वहीं, प्रशासन की ओर से पूरे मामले में कानूनी कार्रवाई के संकेत भी दिए गए हैं। ऐसे में एएमयू राइडिंग फील्ड की जमीन को लेकर विवाद आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।
1925 से एएमयू के अधिग्रहण में होने का दावा
एएमयू कुलपति नईमा खातून के मुताबिक राइडिंग फील्ड से संबंधित जमीन वर्ष 1925 से एएमयू के अधिग्रहण में है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह भूमि कोई नई संपत्ति नहीं है, बल्कि लंबे समय से विश्वविद्यालय के उपयोग और नियंत्रण में रही है।वीसी ने भूमि से संबंधित पुराने रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के पास जमीन से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर एएमयू प्रशासन का दावा है कि राइडिंग फील्ड की भूमि पर विश्वविद्यालय का अधिकार लंबे समय से चला आ रहा है।इस दावे के सामने आने के बाद विवाद का मुख्य केंद्र अब भूमि के राजस्व रिकॉर्ड और उसके वास्तविक कब्जे को लेकर बन गया है।
2022 में हुई थी जमीन की पैमाइश
एएमयू प्रशासन के मुताबिक जमीन को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए 3 जनवरी 2022 को भूमि की पैमाइश कराई गई थी। इसके बाद 6 जनवरी 2022 को संयुक्त रिपोर्ट तैयार की गई। विश्वविद्यालय का कहना है कि इस प्रक्रिया में संबंधित राजस्व अधिकारियों ने जमीन की स्थिति का परीक्षण किया था।एएमयू वीसी के अनुसार तहसीलदार और कानूनगो की संयुक्त रिपोर्ट में संबंधित भूमि को एएमयू के घुड़सवार फील्ड के नाम से दर्ज किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन इसी रिपोर्ट को अपने दावे के समर्थन में महत्वपूर्ण दस्तावेज मान रहा है।इस रिपोर्ट के आधार पर एएमयू का कहना है कि भूमि की पहचान और रिकॉर्ड को लेकर स्थिति पहले ही स्पष्ट की जा चुकी है। ऐसे में अब नगर निगम की ओर से जमीन पर कार्रवाई किए जाने के प्रयास पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने सवाल खड़े किए हैं।

बिना नोटिस कब्जे की कोशिश का आरोप
एएमयू कुलपति नईमा खातून ने आरोप लगाया कि नगर निगम की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन को कोई पूर्व नोटिस दिए बिना भूमि पर कब्जा लेने की कोशिश की गई। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यदि किसी सरकारी विभाग को जमीन को लेकर कोई दावा या आपत्ति थी, तो नियमानुसार एएमयू को पहले इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी।वीसी के आरोपों के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर किस आधार पर नगर निगम ने संबंधित भूमि को लेकर कदम उठाया और क्या इस कार्रवाई से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन से औपचारिक संवाद किया गया था।हालांकि इस पूरे मामले में नगर निगम का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा। विवाद की वास्तविक स्थिति दोनों पक्षों के दस्तावेज और आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

प्रशासन ने दिए कानूनी कार्रवाई के संकेत
राइडिंग फील्ड की जमीन को लेकर विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन की ओर से कानूनी प्रक्रिया अपनाए जाने के संकेत मिले हैं। ऐसे में अब पूरे मामले की जांच राजस्व रिकॉर्ड, भूमि की पैमाइश और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ सकती है।अगर दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम रहते हैं तो मामला कानूनी स्तर तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में पुराने राजस्व रिकॉर्ड, 2022 की पैमाइश रिपोर्ट और संयुक्त रिपोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
एएमयू प्रशासन ने दस्तावेजों को बताया अहम आधार
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि भूमि को लेकर उसके दावे केवल मौखिक नहीं हैं, बल्कि पुराने रिकॉर्ड और अधिकारियों की रिपोर्ट से भी समर्थित हैं। 1925 से भूमि के एएमयू के अधिग्रहण में होने का दावा और 2022 में हुई पैमाइश से संबंधित दस्तावेज अब विवाद के केंद्र में हैं।एएमयू प्रशासन की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि विश्वविद्यालय अपनी जमीन और संस्थागत संपत्तियों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कानूनी कदम उठाएगा।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल अलीगढ़ में एएमयू राइडिंग फील्ड की भूमि को लेकर नगर निगम और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच अधिकार का सवाल खड़ा हुआ है। एएमयू का दावा है कि भूमि लंबे समय से उसके अधिग्रहण में है और सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में भी इसे विश्वविद्यालय के घुड़सवार फील्ड के रूप में दर्ज किया गया है।दूसरी ओर नगर निगम की कार्रवाई को लेकर विश्वविद्यालय ने आपत्ति जताई है। वीसी का आरोप है कि बिना नोटिस दिए जमीन पर कब्जे की कोशिश की गई। अब प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर इस मामले की आगे की कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं।इस विवाद ने विश्वविद्यालय की जमीन, राजस्व रिकॉर्ड और नगर निगम के अधिकारों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। एएमयू कुलपति नईमा खातून के 1925 से जमीन के विश्वविद्यालय के अधिग्रहण में होने के दावे और वर्ष 2022 की पैमाइश व संयुक्त रिपोर्ट का हवाला दिए जाने के बाद मामला गंभीर हो गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और नगर निगम इस विवाद को किस तरह सुलझाते हैं और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर भूमि पर अधिकार किसका माना जाता है।
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