उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में लाइसेंसी हथियारों के डिजिटल रिकॉर्ड को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जिले में 1,478 ऐसे लाइसेंसी हथियार मिले हैं जिनका यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN) अब तक नेशनल डाटाबेस ऑफ आर्म्स लाइसेंस (NDAL) पोर्टल पर दर्ज नहीं है। ऐसे में जिला प्रशासन ने इन सभी शस्त्र लाइसेंसों को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। संबंधित फाइल जिलाधिकारी को भेज दी गई है और जल्द कार्रवाई होने की संभावना है।यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सरकार देशभर में हथियारों की डिजिटल ट्रैकिंग और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दे रही है। प्रशासन का मानना है कि बिना UIN वाले हथियार सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं।
- छह साल बाद भी अधूरा है डिजिटलाइजेशन अभियान
- रिकॉर्ड अधूरा होने से बढ़ी प्रशासन की चिंता
- एडीएम सिटी आलोक गुप्ता का बड़ा बयान
- क्यों अटका हजारों हथियारों का रिकॉर्ड?
- उत्तराधिकार के मामलों की भी जांच जारी
- बिना UIN वाले हथियार क्यों हैं चिंता का विषय?
- नोटिस के बाद भी नहीं मिला जवाब
- डिजिटल निगरानी को मजबूत करने की तैयारी
छह साल बाद भी अधूरा है डिजिटलाइजेशन अभियान
केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में सभी लाइसेंसी हथियारों के लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN) अनिवार्य कर दिया था। इसका उद्देश्य देशभर के सभी वैध हथियारों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना और उनकी ट्रैकिंग आसान बनाना था।कानपुर में अब तक 40,680 शस्त्र लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं, लेकिन इनमें से केवल 39,202 हथियारों को ही UIN आवंटित किया जा सका है। बाकी 1,478 हथियार आज भी डिजिटल पहचान से बाहर हैं, जिससे उनका सत्यापन और निगरानी प्रभावित हो रही है।
रिकॉर्ड अधूरा होने से बढ़ी प्रशासन की चिंता
प्रशासन के अनुसार जिन हथियारों का UIN दर्ज नहीं है, उनका रिकॉर्ड अधूरा है। ऐसे हथियारों की ऑनलाइन पहचान संभव नहीं है। यदि इनका दुरुपयोग होता है तो उनकी डिजिटल ट्रैकिंग और जांच बेहद कठिन हो जाती है।इसी कारण जिला प्रशासन ने पहले संबंधित लाइसेंसधारकों को नोटिस जारी किए थे, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर अधिकांश लोगों ने कोई जवाब नहीं दिया। अब प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई का फैसला लिया है।
एडीएम सिटी आलोक गुप्ता का बड़ा बयान
एडीएम सिटी आलोक गुप्ता ने बताया कि:
“पोर्टल पर सभी असलहों की जानकारी फीड है। जांच में पता चला कि 1,478 हथियारों का UIN ही नहीं है। इनका सत्यापन भी कराया गया लेकिन कोई अपडेट नहीं हुआ। अब इनके लाइसेंस निरस्त करने की फाइल जिलाधिकारी के पास भेजी गई है। जल्द ही नियमानुसार शस्त्र लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे।”
उन्होंने बताया कि प्रशासन पूरी प्रक्रिया को नियमों के अनुसार आगे बढ़ा रहा है और जिन लोगों ने अब तक रिकॉर्ड अपडेट नहीं कराया है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

क्यों अटका हजारों हथियारों का रिकॉर्ड?
प्रशासन की जांच में कई ऐसे कारण सामने आए हैं जिनकी वजह से हजारों हथियारों का डेटा आज तक पूरा नहीं हो सका।अधिकारियों के अनुसार कई लाइसेंसधारकों की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनके उत्तराधिकारियों ने हथियार अपने नाम ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया पूरी नहीं कराई। कई लोग दूसरे जिलों या राज्यों में स्थानांतरित हो गए, जबकि कुछ पुराने रिकॉर्ड अधूरे पाए गए।इन्हीं कारणों से डिजिटल रिकॉर्ड अपडेट नहीं हो सका और बड़ी संख्या में हथियार UIN से वंचित रह गए।
उत्तराधिकार के मामलों की भी जांच जारी
प्रशासन के अनुसार पिछले तीन वर्षों में 489 हथियार उत्तराधिकार के आधार पर नए लाइसेंसधारकों के नाम ट्रांसफर किए जा चुके हैं।हालांकि अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे मामले लंबित हैं जिनमें दस्तावेजों का सत्यापन और रिकॉर्ड अपडेट होना बाकी है। प्रशासन इन मामलों की भी लगातार समीक्षा कर रहा है।
बिना UIN वाले हथियार क्यों हैं चिंता का विषय?
विशेषज्ञों के अनुसार UIN किसी भी लाइसेंसी हथियार की डिजिटल पहचान होती है। इसके माध्यम से हथियार के मालिक, लाइसेंस, स्थान और अन्य विवरण तुरंत उपलब्ध हो जाते हैं।यदि किसी हथियार का UIN दर्ज नहीं है तो अपराध की जांच के दौरान उसकी पहचान और ट्रैकिंग में कठिनाई आ सकती है। यही वजह है कि केंद्र और राज्य सरकारें सभी हथियारों का डिजिटल रिकॉर्ड अनिवार्य बना चुकी हैं।
नोटिस के बाद भी नहीं मिला जवाब
जिला प्रशासन ने पहले सभी संबंधित लाइसेंसधारकों को नोटिस जारी कर रिकॉर्ड अपडेट कराने का अवसर दिया था। लेकिन अधिकांश मामलों में कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।अब प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित समय के बाद भी रिकॉर्ड अपडेट नहीं कराने वालों के लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे और नियमानुसार आगे की कार्रवाई होगी।
डिजिटल निगरानी को मजबूत करने की तैयारी
प्रशासन का कहना है कि हथियारों का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी। इससे फर्जी लाइसेंस, अवैध हथियारों के उपयोग और संदिग्ध गतिविधियों पर भी प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी।कानपुर प्रशासन की यह कार्रवाई पूरे प्रदेश में डिजिटल शस्त्र प्रबंधन अभियान को और गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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