तेहरान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। अमेरिकी वित्त विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने ईरान के कथित अवैध तेल निर्यात नेटवर्क पर बड़ा प्रहार करते हुए 50 से अधिक व्यक्तियों, कंपनियों और समुद्री जहाजों को प्रतिबंधित सूची (ब्लैकलिस्ट) में शामिल कर लिया है। इस कार्रवाई का सबसे बड़ा निशाना ईरान के प्रभावशाली कारोबारी मोहम्मद हुसैन शमखानी का समुद्री व्यापार नेटवर्क बना है, जिस पर आरोप है कि वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार कर ईरानी तेल की बिक्री से अरबों डॉलर का कारोबार संचालित कर रहा था।यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर लगातार हमलों और समुद्री सुरक्षा को लेकर दुनिया की चिंता बढ़ती जा रही है। अमेरिका का दावा है कि इस नेटवर्क से होने वाली कमाई का इस्तेमाल ईरान की उन गतिविधियों में किया जाता था जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा पैदा करती हैं।
किन पर गिरी अमेरिका की गाज?
अमेरिकी वित्त विभाग की ओर से जारी सूची के अनुसार, इस कार्रवाई के तहत 6 प्रमुख व्यक्तियों, 24 कंपनियों और 20 समुद्री जहाजों को प्रतिबंधित किया गया है।ब्लैकलिस्ट में शामिल प्रमुख नामों में असगर अघिली देहकोर्डी और बेहजाद मोघदास भी शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ये लोग वित्तीय ब्रोकर, लॉजिस्टिक्स मैनेजर, समुद्री परिचालन विशेषज्ञ और विदेशों में स्थापित शेल कंपनियों के जरिए ईरान के तेल व्यापार को प्रतिबंधों से बचाने का काम कर रहे थे।प्रतिबंध लागू होते ही इन सभी व्यक्तियों और संस्थाओं की अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में मौजूद संपत्तियां, बैंक खाते और अन्य वित्तीय हित तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिए गए हैं। साथ ही अमेरिकी कंपनियों और नागरिकों को इनके साथ किसी भी प्रकार का कारोबारी लेन-देन करने पर रोक लगा दी गई है।

क्यों अहम है शमखानी का नेटवर्क?
अमेरिकी एजेंसियों के अनुसार मोहम्मद हुसैन शमखानी का नेटवर्क केवल तेल परिवहन तक सीमित नहीं था, बल्कि यह दुनिया के कई देशों में फैली शेल कंपनियों, समुद्री परिवहन कंपनियों और वित्तीय एजेंटों के माध्यम से प्रतिबंधित तेल की खरीद-फरोख्त का पूरा तंत्र संचालित करता था।अमेरिका का आरोप है कि यह नेटवर्क जहाजों के नाम बदलने, झूठे दस्तावेज तैयार करने, जहाजों की लोकेशन छिपाने और तीसरे देशों के माध्यम से तेल बेचने जैसी रणनीतियों का इस्तेमाल करता था ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचा जा सके।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं तो ईरान के तेल निर्यात को बड़ा झटका लग सकता है।
अमेरिका ने क्या कहा?
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस कार्रवाई को ईरान की आर्थिक क्षमता पर सीधा हमला बताते हुए कहा
“ईरानी शासन धोखे और प्रतिबंधों से बचने वाले नेटवर्क के सहारे अपनी आर्थिक गतिविधियां चला रहा है। शमखानी का नेटवर्क उसके सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाले तंत्रों में से एक है। हमारा उद्देश्य इस वित्तीय जीवनरेखा को समाप्त करना है, जिससे उन गतिविधियों को धन मिलता है जो अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सुरक्षा के लिए खतरा हैं।”
वहीं अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि यह कार्रवाई केवल आर्थिक प्रतिबंध नहीं, बल्कि समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार प्रतिबंधित नेटवर्क से मिलने वाला पैसा व्यापारिक जहाजों पर हमलों और क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाने वाली गतिविधियों तक पहुंचता था।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों बना चिंता का केंद्र?
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। हाल के महीनों में इस क्षेत्र में कई व्यापारिक जहाजों पर हमले और सुरक्षा संबंधी घटनाएं सामने आई हैं।अमेरिका इन घटनाओं के लिए ईरान समर्थित तत्वों को जिम्मेदार ठहराता रहा है, जबकि ईरान इन आरोपों को खारिज करता आया है। ऐसे माहौल में अमेरिका की यह नई कार्रवाई दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकती है।यदि इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है तो इसका सीधा असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन लागत पर पड़ सकता है।
वैश्विक तेल बाजार पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के तेल निर्यात नेटवर्क पर यह कार्रवाई कई स्तरों पर असर डाल सकती है।सबसे पहले ईरान के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक तेल पहुंचाना और उससे प्राप्त भुगतान को सुरक्षित रूप से वापस देश में लाना कठिन हो सकता है।दूसरा यदि ईरानी तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।तीसरा समुद्री बीमा कंपनियां और शिपिंग ऑपरेटर होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते जोखिम के कारण अपनी सेवाओं की लागत बढ़ा सकते हैं, जिसका असर अंततः वैश्विक व्यापार पर पड़ेगा।
क्या ईरान देगा जवाब?
अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान की प्रतिक्रिया क्या होगी। पिछले वर्षों में भी अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में ईरान ने अपने तेल निर्यात के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशे हैं और कई बार क्षेत्रीय स्तर पर कड़े राजनीतिक और सैन्य बयान भी दिए हैं।विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ता है तो पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद अस्थिरता और गहरी हो सकती है।
आगे की तस्वीर
अमेरिका साफ संकेत दे चुका है कि वह ‘मैक्सिमम प्रेशर’ यानी अधिकतम आर्थिक दबाव की नीति पर कायम रहेगा। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, प्रतिबंधित नेटवर्क में केवल ईरानी नागरिक ही नहीं बल्कि कई विदेशी कंपनियां और विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिन्होंने कथित तौर पर प्रतिबंधों से बचने में मदद की।अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या यह आर्थिक प्रहार ईरान के तेल कारोबार को वास्तव में कमजोर कर पाएगा, या फिर तेहरान नए रास्ते तलाशकर प्रतिबंधों को चुनौती देगा। इतना तय है कि अमेरिका की इस कार्रवाई ने पश्चिम एशिया की भू-राजनीति, वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में ईरान की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का रुख तय करेगा कि यह आर्थिक जंग केवल प्रतिबंधों तक सीमित रहती है या क्षेत्रीय तनाव का नया अध्याय शुरू करती है।
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