
लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में ओला और उबर जैसी ऐप आधारित वाहन सेवाओं (एग्रीगेटर्स) पर नकेल कसने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक व वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली 2026’ जारी कर दी है। कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद अपर मुख्य सचिव परिवहन अर्चना अग्रवाल द्वारा जारी की गई इस नई नीति के तहत अब ओला-उबर जैसी सभी कंपनियों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराना पूरी तरह अनिवार्य होगा, जिसकी प्रक्रिया अगले महीने से शुरू होने जा रही है। नई नियमावली के तहत अब नशे में गाड़ी चलाने (ड्रिंक एंड ड्राइव) वालों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया गया है। प्रावधानों के मुताबिक, यदि किसी चालक का पिछले तीन सालों में ड्रिंक एंड ड्राइव का कोई भी रिकॉर्ड या अपराध रहा है, तो ऐप पर उसका पंजीकरण बिल्कुल नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, यदि कोई ड्राइवर पहले से पंजीकृत है और उसका नशे में गाड़ी चलाने का चालान कट जाता है, तो वह तब तक वाहन नहीं चला सकेगा जब तक कि वह कोर्ट या संबंधित अथॉरिटी से पूरी तरह दोषमुक्त नहीं हो जाता। आंकड़ों की बात करें तो इस साल जनवरी और फरवरी के महीने में ही पूरे प्रदेश में ड्रिंक एंड ड्राइव के 987 चालान काटे जा चुके हैं, जिसे देखते हुए यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है।
इस नई नीति में महिला यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए कई बड़े बदलाव किए गए हैं। अब महिलाओं को ऐप के माध्यम से यात्रा बुक करते समय महिला चालक (फीमेल ड्राइवर) का चयन करने का विशेष विकल्प मिलेगा। इसके साथ ही यात्रियों की सुरक्षा के लिए सभी ऐप आधारित वाहनों में पैनिक बटन लगाना अनिवार्य होगा, जिसे सीधे व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) से जोड़ा जाएगा। पहले इन वाहनों की लाइव लोकेशन और ड्राइवर की सटीक जानकारी ट्रैक करना मुश्किल होता था, लेकिन अब गाड़ी बुक करते ही ड्राइवर का पूरा बायोडाटा और अगले सात दिनों तक का बुकिंग ब्योरा सरकारी पोर्टल पर लाइव दिखाई देगा। ड्राइवरों की फिटनेस को लेकर भी कड़े नियम बनाए गए हैं, जिसके तहत अब सभी चालकों का अनिवार्य पुलिस वेरिफिकेशन, फिटनेस टेस्ट और मनोचिकित्सक (साइकियाट्रिस्ट) से मानसिक जांच कराई जाएगी। इसके अलावा, ऐप पर जुड़ने वाले हर ड्राइवर के पास कम से कम दो साल का ड्राइविंग अनुभव होना जरूरी है। कंपनियों और ड्राइवरों के लिए व्यावसायिक व कल्याणकारी नियम भी तय किए गए हैं। सेवा प्रदाता कंपनियों के लिए ऑनलाइन आवेदन की फीस 25 हजार रुपये और लाइसेंस की फीस 5 लाख रुपये निर्धारित की गई है। ड्राइवरों के सामाजिक कल्याण को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उनके लिए 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 10 लाख रुपये का टर्म बीमा कराना अनिवार्य कर दिया है। यात्रियों की सहूलियत और शिकायतों के निपटारे के लिए 24 घंटे सक्रिय रहने वाला ग्रीवांस सेल (शिकायत प्रकोष्ठ) बनाया जाएगा। ऐप पर हर वाहन और ड्राइवर की रेटिंग की व्यवस्था होगी, जो पूरी तरह यात्रियों के फीडबैक पर निर्भर करेगी। यदि किसी ड्राइवर की रेटिंग खराब होती है, तो कंपनी को उसे अनिवार्य रूप से दोबारा ट्रेनिंग (प्रशिक्षण) के लिए भेजना होगा। दरअसल, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 1 जुलाई 2025 को मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 93 में संशोधन किया था, जिसे अब उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरी तरह अपना लिया है। अकेले राजधानी लखनऊ में ही 25 हजार से अधिक ऐसे ऐप आधारित वाहन चल रहे हैं, जिन पर अब इस नई नीति के जरिए सीधा नियंत्रण रखा जा सकेगा।
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