“देर रात तक जागना पड़ सकता है भारी! सेहत पर पड़ते हैं ये गंभीर असर

Editorial
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आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल चुकी है। काम का बढ़ता दबाव, सोशल मीडिया का आकर्षण, मोबाइल फोन की लत और देर रात तक चलने वाली डिजिटल गतिविधियों ने नींद के महत्व को पीछे धकेल दिया है। खासकर युवाओं के बीच देर रात तक जागना एक आम आदत बन चुकी है। कोई वेब सीरीज देखने में व्यस्त रहता है, कोई सोशल मीडिया स्क्रॉल करता है तो कोई ऑफिस या पढ़ाई का काम पूरा करने के लिए रात भर जागता रहता है। धीरे-धीरे यह आदत जीवनशैली का हिस्सा बन जाती है, लेकिन बहुत कम लोग यह समझ पाते हैं कि इसका असर केवल अगले दिन की थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर और दिमाग दोनों को लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकता है। नींद केवल शरीर को आराम देने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह शरीर के लिए एक प्राकृतिक उपचार प्रणाली की तरह काम करती है। जब हम सोते हैं, तब हमारा शरीर दिनभर की थकान से उबरता है, कोशिकाओं की मरम्मत होती है, दिमाग नई जानकारी को व्यवस्थित करता है और शरीर अगले दिन के लिए खुद को तैयार करता है। यदि किसी व्यक्ति को पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद नहीं मिलती, तो उसका असर धीरे-धीरे उसकी शारीरिक क्षमता, मानसिक स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर दिखाई देने लगता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानव शरीर एक जैविक घड़ी यानी सर्केडियन रिदम के अनुसार काम करता है। यह प्राकृतिक घड़ी सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करती है। जब सूरज ढलता है तो शरीर में मेलाटोनिन नामक हार्मोन का उत्पादन बढ़ने लगता है, जो नींद लाने में मदद करता है। यही कारण है कि रात के समय शरीर स्वाभाविक रूप से आराम की स्थिति में पहुंचने लगता है। यदि इस प्राकृतिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाए और समय पर सोया जाए, तो शरीर अधिक स्वस्थ और ऊर्जावान बना रहता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार रात 10 बजे से 11 बजे के बीच सो जाना सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस समय तक शरीर की अधिकांश गतिविधियां धीमी होने लगती हैं और मस्तिष्क आराम की अवस्था में पहुंचने लगता है। इस दौरान सोने से शरीर को पर्याप्त गहरी नींद मिलती है, जो संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक है। गहरी नींद वह अवस्था होती है जिसमें शरीर खुद की मरम्मत करता है, प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है और मांसपेशियों को आराम मिलता है। गहरी नींद का महत्व केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उतनी ही आवश्यक है। जब व्यक्ति गहरी नींद लेता है तो मस्तिष्क दिनभर की सूचनाओं को व्यवस्थित करता है। यही प्रक्रिया स्मरण शक्ति को बेहतर बनाती है और सीखने की क्षमता को बढ़ाती है। विद्यार्थियों, पेशेवरों और मानसिक कार्य करने वाले लोगों के लिए अच्छी नींद उतनी ही जरूरी है जितनी कि संतुलित भोजन और नियमित व्यायाम। जो लोग लगातार देर रात तक जागते हैं, उनके शरीर का प्राकृतिक नींद चक्र प्रभावित होने लगता है। शुरुआत में इसका असर केवल थकान और आलस्य के रूप में दिखाई देता है, लेकिन धीरे-धीरे यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है। नींद की कमी से व्यक्ति में चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है, तनाव का स्तर बढ़ने लगता है और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है। ऐसे लोगों में अवसाद और चिंता जैसी मानसिक समस्याओं का खतरा भी अधिक देखा गया है।

देर रात तक जागने का असर शरीर के मेटाबॉलिज्म पर भी पड़ता है। पर्याप्त नींद न मिलने से शरीर में भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं। इससे व्यक्ति को बार-बार भूख लगती है और जंक फूड खाने की इच्छा बढ़ जाती है। यही कारण है कि जो लोग नियमित रूप से कम सोते हैं, उनमें मोटापे का खतरा अधिक पाया जाता है। मोटापा आगे चलकर कई अन्य बीमारियों की जड़ बन सकता है। इसके अलावा नींद की कमी का सीधा संबंध हृदय स्वास्थ्य से भी है। कई शोध बताते हैं कि जो लोग लगातार कम नींद लेते हैं, उनमें हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। पर्याप्त नींद न लेने से शरीर में सूजन बढ़ सकती है, जो हृदय संबंधी समस्याओं को जन्म देती है। यही वजह है कि डॉक्टर अच्छी नींद को हृदय की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक मानते हैं। डायबिटीज का खतरा भी नींद की कमी से जुड़ा हुआ है। जब शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो इंसुलिन का कार्य प्रभावित होने लगता है। इससे रक्त में शुगर का स्तर बढ़ सकता है और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक नींद की अनदेखी करने वाले लोगों में यह जोखिम और भी अधिक हो सकता है।

आज के समय में मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण नींद के सबसे बड़े दुश्मन बन चुके हैं। अधिकांश लोग सोने से ठीक पहले तक मोबाइल स्क्रीन देखते रहते हैं। मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट से निकलने वाली ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को प्रभावित करती है। इससे नींद आने में देरी होती है और व्यक्ति देर तक जागता रहता है। धीरे-धीरे यह आदत नींद की गुणवत्ता को खराब कर देती है। अच्छी नींद पाने के लिए जरूरी है कि सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी जैसी स्क्रीन से दूरी बना ली जाए। इसके अलावा कमरे का वातावरण शांत और आरामदायक होना चाहिए। हल्का भोजन करना, कैफीन युक्त पेय पदार्थों से बचना और नियमित समय पर सोने-जागने की आदत विकसित करना भी अच्छी नींद के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। नींद को अक्सर लोग अपनी व्यस्त दिनचर्या में नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन वास्तव में यह स्वस्थ जीवन की सबसे मजबूत नींव है। जिस तरह शरीर को भोजन और पानी की आवश्यकता होती है, उसी तरह पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद भी आवश्यक है। समय पर सोना और पर्याप्त नींद लेना केवल अगले दिन ताजगी महसूस करने के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ, ऊर्जावान और खुशहाल जीवन जीने के लिए भी बेहद जरूरी है। यदि हम अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखना चाहते हैं, मानसिक तनाव को कम करना चाहते हैं और गंभीर बीमारियों से बचना चाहते हैं, तो हमें अपनी नींद को प्राथमिकता देनी होगी। सही समय पर सोना कोई छोटी आदत नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की सबसे बड़ी कुंजी है। जो व्यक्ति अपनी नींद का सम्मान करता है, उसका शरीर और दिमाग दोनों लंबे समय तक बेहतर तरीके से कार्य करते हैं। इसलिए देर रात तक जागने की आदत छोड़कर समय पर सोने की संस्कृति अपनाना आज की सबसे बड़ी स्वास्थ्य जरूरत बन चुकी है।

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