डोभाल का बीजिंग दौरा: चीन से सीमा विवाद पर होगी अहम वार्ता, शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से पहले बढ़ी हलचल

Editorial
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नई दिल्ली भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर उच्चस्तरीय कूटनीतिक बातचीत का दौर शुरू होने जा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार को चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचेंगे। यहां मंगलवार को भारत और चीन के बीच स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स (SR) स्तर की 25वें दौर की वार्ता होगी। इस बैठक में डोभाल चीन के विदेश मंत्री और विशेष प्रतिनिधि वांग यी के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) समेत सीमा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत करेंगे।यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के बीच संबंधों में धीरे-धीरे सुधार के प्रयास जारी हैं। साथ ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सितंबर में भारत में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन में संभावित भागीदारी को लेकर भी चर्चा तेज है। ऐसे में डोभाल और वांग यी की बैठक को दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मंगलवार को होगी 25वें दौर की बातचीत

सरकारी सूत्रों के अनुसार, अजीत डोभाल और वांग यी मंगलवार को SR स्तर की वार्ता में आमने-सामने होंगे। दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधि सीमा विवाद के समाधान और सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर चर्चा करेंगे।भारत और चीन के बीच करीब 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। सीमा विवाद के व्यापक समाधान के लिए वर्ष 2003 में विशेष प्रतिनिधि तंत्र की शुरुआत की गई थी। हालांकि अब तक इस बातचीत से सीमा विवाद का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और संवाद बनाए रखने में यह तंत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।

LAC पर शांति भारत की प्राथमिकता

भारत लगातार स्पष्ट करता रहा है कि चीन के साथ सामान्य और स्थिर संबंधों के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बेहद जरूरी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी हाल में इस बात को दोहरा चुके हैं कि दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों की दिशा काफी हद तक सीमा की स्थिति पर निर्भर करती है।जयशंकर के मुताबिक, वर्ष 2020 से 2024 के बीच भारत-चीन संबंधों का दौर काफी चुनौतीपूर्ण रहा। इसका मुख्य कारण सीमा क्षेत्रों की स्थिति थी। भारत का रुख है कि सीमा पर शांति और स्थिरता कायम होने के बाद ही दोनों देशों के संबंधों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा सकता है।

शी जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले अहम बैठक

डोभाल का बीजिंग दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सितंबर में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा की चर्चा है। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है और ऐसी संभावना जताई जा रही है कि शी जिनपिंग इसमें हिस्सा ले सकते हैं।हालांकि उनकी भारत यात्रा को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात की संभावना भी बन सकती है। ऐसे में डोभाल-वांग वार्ता को आगामी उच्चस्तरीय संपर्क की पृष्ठभूमि तैयार करने वाली बातचीत के तौर पर भी देखा जा रहा है।

मोदी और शी की पिछली मुलाकात भी रही अहम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच पिछले साल तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई थी। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में भारत-चीन संबंधों को स्थिर बनाने और आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया था।अब डोभाल और वांग यी की बैठक के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संभावित बातचीत को लेकर भी उम्मीदें बढ़ सकती हैं।

अरुणाचल प्रदेश को लेकर भी तनाव

भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर भी लंबे समय से मतभेद हैं। चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है और इसे ‘दक्षिणी तिब्बत’ का हिस्सा बताता रहा है। भारत ने चीन के इस दावे को पूरी तरह खारिज किया है।चीन वर्ष 2017 से अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों के लिए अपने नाम जारी करता रहा है। भारत ने चीन की इस कार्रवाई को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि नाम बदलने की कोशिश से अरुणाचल प्रदेश की वास्तविक स्थिति में कोई बदलाव नहीं आएगा। भारत के अनुसार अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न हिस्सा है।

सीमा पर चीनी गतिविधियों पर भारत की नजर

हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी क्षेत्र के आसपास चीनी गतिविधियों को लेकर भी खबरें सामने आई हैं। भारत सीमा क्षेत्रों में चीन की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है। वहीं चीन की ओर से कहा गया है कि चीन-भारत सीमा की स्थिति फिलहाल सामान्य और स्थिर है।चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने हाल ही में दोनों देशों के बीच सीमा मामलों से जुड़े कार्य तंत्र की बैठक का भी उल्लेख किया था। चीन के मुताबिक, दोनों पक्ष राजनयिक और सैन्य माध्यमों से बातचीत जारी रखने तथा सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने पर सहमत हैं।

भारत ने कहा- सीमा की स्थिति से तय होंगे रिश्ते

भारतीय विदेश मंत्रालय भी लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि LAC पर शांति और स्थिरता बनाए रखना भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। भारत का मानना है कि सीमा पर किसी भी तरह का तनाव सीधे तौर पर द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करता है।यही वजह है कि डोभाल और वांग यी के बीच होने वाली बातचीत को केवल सीमा विवाद तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इस बैठक में दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली, सीमा पर तनाव कम करने और भविष्य में उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद की संभावनाओं पर भी अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है डोभाल का चीन दौरा?

अजीत डोभाल का बीजिंग दौरा कई मायनों में अहम है। एक तरफ भारत और चीन सीमा विवाद को लेकर बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां बढ़ी हैं।यदि SR वार्ता में सकारात्मक प्रगति होती है तो इससे सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है। साथ ही भारत-चीन संबंधों में लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।फिलहाल सभी की नजरें बीजिंग में होने वाली 25वें दौर की SR वार्ता पर हैं। यह देखना अहम होगा कि अजीत डोभाल और वांग यी के बीच बातचीत से सीमा विवाद और LAC पर शांति को लेकर क्या सहमति बनती है और इसका आने वाले समय में भारत-चीन संबंधों पर कितना असर पड़ता है।

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