अमित शाह का सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा पर जोर, बोले- सीमाएं सुरक्षित हुए बिना देश सुरक्षित नहीं रह सकता

Editorial
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नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में सीमा सुरक्षा और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जब तक देश की सीमाएं सुरक्षित नहीं होंगी, तब तक न तो पश्चिम बंगाल और न ही भारत पूरी तरह सुरक्षित रह सकता है। शाह ने सीमा पर निगरानी, बाड़ लगाने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।सिलीगुड़ी कॉरिडोर को रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है। इसे आम बोलचाल में ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है। यह संकरी भू-पट्टी भारत के मुख्य हिस्से को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से जोड़ती है। यही वजह है कि इस क्षेत्र की सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक यह कॉरिडोर करीब 17 से 22 किलोमीटर चौड़ा क्षेत्र है और नेपाल, बांग्लादेश तथा भूटान की सीमाओं के बीच स्थित है।

सीमा सुरक्षा को लेकर शाह का सख्त संदेश

अमित शाह ने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा देश की आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा है। उन्होंने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने के मुद्दे का भी जिक्र किया। शाह ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती पश्चिम बंगाल सरकार से इस संबंध में कई बार अनुरोध किया गया था, लेकिन अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उनके मुताबिक अब सीमा सुरक्षा से जुड़े कार्यों में तेजी आई है।गृह मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार सिलीगुड़ी कॉरिडोर और उत्तर बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत करने पर जोर दे रही है। इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति इसे सुरक्षा एजेंसियों के लिए विशेष महत्व देती है।

‘चिकन नेक’ क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए केवल एक सामान्य मार्ग नहीं है। यह देश के बाकी हिस्सों और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच प्रमुख स्थलीय संपर्क प्रदान करता है। इसकी भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि इसके आसपास कई अंतरराष्ट्रीय सीमाएं मौजूद हैं। इसलिए यहां सीमा प्रबंधन, निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखना रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।पूर्वोत्तर भारत के राज्यों तक सड़क और रेल संपर्क के लिहाज से भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किसी भी आपात स्थिति में इस गलियारे की निर्बाध कनेक्टिविटी का महत्व और बढ़ जाता है। इसी कारण केंद्र सरकार की ओर से यहां सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

BSF और SSB की भूमिका पर जोर

सिलीगुड़ी दौरे के दौरान सीमा सुरक्षा से जुड़े सुरक्षा बलों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। नेपाल और भूटान के साथ भारत की खुली सीमाओं की निगरानी की जिम्मेदारी मुख्य रूप से सशस्त्र सीमा बल यानी SSB के पास है, जबकि भारत-बांग्लादेश सीमा पर BSF सुरक्षा व्यवस्था संभालता है। शाह ने सीमावर्ती इलाकों में तैनात जवानों के योगदान और उनके लिए बेहतर सुविधाओं पर भी जोर दिया।इससे पहले जुलाई में सिलीगुड़ी के जुमागाछ बॉर्डर आउटपोस्ट के दौरे के दौरान भी अमित शाह ने सीमा सुरक्षा के लिए इस्तेमाल की जा रही आधुनिक तकनीकों का जायजा लिया था। गृह मंत्रालय के मुताबिक उन्होंने रेडियो आधारित फेंस ब्रीच डिटेक्शन सिस्टम को देखा था, जो सीमा बाड़ के साथ छेड़छाड़ होने पर जवानों को तत्काल अलर्ट करने में मदद करता है।

सीमा पर बाड़ और आधुनिक तकनीक पर फोकस

केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दे रही है। जुलाई में जुमागाछ बॉर्डर आउटपोस्ट पर गृह मंत्री ने सीमा बाड़ से छेड़छाड़ की पहचान करने वाली प्रणाली का निरीक्षण किया था। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में BSF से जुड़े कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की नींव भी रखी गई थी।सीमा पर बाड़ लगाने का उद्देश्य अवैध आवाजाही को नियंत्रित करना और सुरक्षा बलों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना है। शाह ने घुसपैठ रोकने के लिए फेंसिंग को जरूरी बताते हुए सीमा प्रबंधन को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा।

करीब 189 करोड़ की परियोजनाओं का भी जिक्र

सिलीगुड़ी में SSB से जुड़े कार्यक्रम के दौरान करीब 189 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखे जाने की जानकारी सामने आई है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य सुरक्षा बलों के बुनियादी ढांचे और कार्यक्षमता को मजबूत करना है। शाह ने सीमा पर तैनात जवानों के कल्याण को भी केंद्र सरकार की प्राथमिकता बताया।

सुरक्षा के साथ विकास पर भी जोर

अमित शाह ने सीमा सुरक्षा के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को भी महत्वपूर्ण बताया। केंद्र सरकार की रणनीति में सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना भी शामिल है, ताकि वहां रहने वाली आबादी सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सके।सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर केंद्र का बढ़ता फोकस यह संकेत देता है कि उत्तर बंगाल और पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी के साथ-साथ रणनीतिक सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जा रही है। आने वाले समय में सीमा पर निगरानी, आधुनिक तकनीक, सुरक्षा बलों के बुनियादी ढांचे और फेंसिंग से जुड़े कामों में और तेजी देखने को मिल सकती है।अमित शाह का सिलीगुड़ी में दिया गया बयान सीमा सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। उनका संदेश है कि देश की सुरक्षा की मजबूत नींव सुरक्षित सीमाओं से शुरू होती है और सिलीगुड़ी कॉरिडोर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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