रिपोर्ट :मो अरशद
मुरादाबाद उत्तर प्रदेश के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोइया दीदियों के लिए योगी सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। प्रदेश सरकार ने रसोइयों के मासिक मानदेय को ₹2,000 से बढ़ाकर ₹3,000 करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही रसोइयों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ देने के लिए दुर्घटना बीमा और स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने की पहल भी की गई है।रविवार को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के साथ ही प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी कार्यक्रम हुए। मुरादाबाद जिला मुख्यालय और चारों तहसीलों में आयोजित कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और रसोइया दीदियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान सरकार की ओर से किए गए ऐलानों और रसोइयों के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी दी गई।सरकार के इस फैसले को स्कूलों में मिड-डे मील यानी पीएम पोषण योजना को जमीन पर संचालित करने वाली महिला कर्मियों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में करीब 3.53 लाख रसोइये कार्यरत हैं और उनके मानदेय में ₹1,000 प्रतिमाह की वृद्धि की गई है। बढ़ा हुआ मानदेय सितंबर से लागू होकर अक्तूबर के भुगतान में शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।

₹2,000 से बढ़कर ₹3,000 हुआ मासिक मानदेय
रसोइयों के लिए सबसे बड़ी घोषणा उनके मानदेय में ₹1,000 की बढ़ोतरी है। पहले रसोइयों को हर महीने ₹2,000 मानदेय मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर ₹3,000 कर दिया गया है। इससे लंबे समय से स्कूलों में भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी संभाल रहीं रसोइया दीदियों को सीधे आर्थिक लाभ मिलेगा।रसोइयों का काम सिर्फ भोजन तैयार करने तक सीमित नहीं है। स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन की तैयारी, साफ-सफाई और भोजन व्यवस्था से जुड़े कई कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में मानदेय में वृद्धि को उनके योगदान को आर्थिक सम्मान देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।एक रिपोर्ट के मुताबिक, मानदेय में ₹1,000 की वृद्धि से राज्य सरकार पर हर महीने लगभग ₹35.35 करोड़ और सालाना ₹353 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय भार आने का अनुमान है।

₹2 लाख का दुर्घटना बीमा भी मिलेगा
रसोइया दीदियों के लिए सरकार ने सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाते हुए ₹2 लाख के दुर्घटना बीमा की सुविधा देने की घोषणा की है। इसके लिए एसबीआई में खाते खोले जाने की प्रक्रिया की जानकारी कार्यक्रम में दी गई।दुर्घटना बीमा का उद्देश्य किसी अप्रत्याशित दुर्घटना की स्थिति में रसोइया और उनके परिवार को आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। स्कूलों में नियमित रूप से काम करने वाली इन महिला कर्मियों के लिए यह सुविधा अतिरिक्त सुरक्षा कवच के तौर पर देखी जा रही है।मुरादाबाद में आयोजित कार्यक्रम में अधिकारियों ने रसोइयों को बीमा सुविधा से जुड़ी प्रक्रिया और आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध कराई।

रसोइया परिवारों को ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज
सरकार की ओर से रसोइया परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने की दिशा में भी पहल की गई है। कार्यक्रम में बताया गया कि आयुष्मान योजना की तर्ज पर रसोइया परिवारों को ₹5 लाख तक के कैशलेस मेडिकल कार्ड उपलब्ध कराए जा रहे हैं।इस सुविधा के जरिए पात्र परिवारों को इलाज के खर्च को लेकर बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में स्वास्थ्य खर्च बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे में कैशलेस चिकित्सा सुविधा परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करने में मदद कर सकती है।रसोइयों के लिए कैशलेस चिकित्सा कार्ड से जुड़ा कार्यक्रम लखनऊ में आयोजित होने की जानकारी भी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार पीएम पोषण योजना के तहत प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत करीब 3.53 लाख रसोइयों को इस पहल से जोड़ने की तैयारी है।
मुरादाबाद में चारों तहसीलों में हुए कार्यक्रम
सरकार के ऐलान के बाद मुरादाबाद में भी जिला मुख्यालय के साथ चारों तहसीलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में रसोइया दीदियां शामिल हुईं। जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने सरकार की नई सुविधाओं की जानकारी देते हुए कहा कि स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोइयों का योगदान महत्वपूर्ण है।कार्यक्रम के दौरान मानदेय बढ़ोतरी, दुर्घटना बीमा और कैशलेस चिकित्सा कार्ड जैसी सुविधाओं को लेकर जानकारी साझा की गई। इससे रसोइया दीदियों में भी उत्साह देखने को मिला।मुरादाबाद कार्यक्रम में डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने भी अपनी बात रखी। वहीं भारतीय जनता पार्टी के गोपाल अंजान ने भी कार्यक्रम में रसोइयों को संबोधित किया।
स्कूलों में रसोइयों की अहम भूमिका
उत्तर प्रदेश के सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में पीएम पोषण योजना के तहत लाखों बच्चों को प्रतिदिन भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इस पूरी व्यवस्था में रसोइयों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। वे स्कूलों में निर्धारित मेन्यू के अनुसार बच्चों के लिए भोजन तैयार करती हैं।प्रदेश में बड़ी संख्या में रसोइयां लंबे समय से कम मानदेय पर काम कर रही थीं। ऐसे में मानदेय में ₹1,000 की बढ़ोतरी उनके लिए सीधे तौर पर आर्थिक राहत का कदम है। सरकार की ओर से स्वास्थ्य और दुर्घटना सुरक्षा को इससे जोड़ने की पहल रसोइया परिवारों के सामाजिक सुरक्षा दायरे को भी मजबूत करने वाली है।
सरकार पर बढ़ेगा वित्तीय भार
मानदेय बढ़ाने के फैसले का सीधा असर राज्य के बजट पर भी पड़ेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रदेश में करीब 3.53 लाख रसोइयों के मानदेय में ₹1,000 की वृद्धि से सरकार पर सालाना ₹353 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त भार पड़ेगा।इस फैसले से एक ओर जहां रसोइयों की आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर सरकार को स्वास्थ्य और बीमा जैसी सुविधाओं के क्रियान्वयन के लिए भी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होंगी।
रसोइया दीदियों के लिए तीन बड़े फायदे
योगी सरकार की नई घोषणा को आसान भाषा में समझें तो रसोइयों को मुख्य रूप से तीन बड़े लाभ मिलने जा रहे हैं—
- मासिक मानदेय: ₹2,000 से बढ़कर ₹3,000
- दुर्घटना बीमा: ₹2 लाख की बीमा सुरक्षा
- स्वास्थ्य सुविधा: परिवार के लिए ₹5 लाख तक कैशलेस चिकित्सा कार्ड
सरकार की ओर से रसोइयों को आर्थिक सहायता के साथ स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने की यह पहल स्कूलों में पीएम पोषण योजना को मजबूती देने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार के आधिकारिक सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की वेबसाइट पर सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी घोषणाओं और कार्यक्रमों की जानकारी नियमित रूप से प्रकाशित की जाती है।
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