लखनऊ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सहारनपुर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। शिक्षक सम्मान समारोह में पहुंचे अखिलेश यादव ने धार्मिक सौहार्द और सनातन धर्म की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि जो लोग दूसरे धर्मों की आस्था और धार्मिक भावनाओं का सम्मान नहीं करते, उन्हें सच्चा सनातनी कैसे कहा जा सकता है।अखिलेश यादव ने कहा कि सनातन परंपरा दूसरों की आस्था का सम्मान करने की सीख देती है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि पूरी धरती को एक परिवार मानना सनातन की मूल भावना है। उनके इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में धार्मिक मुद्दे को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
- सहारनपुर मस्जिद मामले पर क्या बोले अखिलेश?
- शिक्षक सम्मान समारोह में पहुंचे थे अखिलेश
- 26 हजार प्राथमिक स्कूलों का किया दावा
- ‘शिक्षकों को सिर्फ पढ़ाने का काम दिया जाएगा’
- जर्जर स्कूलों की फोटो बनाने पर मुकदमे का आरोप
- राम मंदिर चंदे को लेकर भी भाजपा पर हमला
- लखनऊ की ‘लाल बिल्डिंग’ का भी जिक्र
- लैपटॉप योजना को बताया युवाओं के लिए अहम
- ‘शिक्षक ही बच्चों का भविष्य बनाते हैं’
सहारनपुर मस्जिद मामले पर क्या बोले अखिलेश?
सहारनपुर में कथित अवैध मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर अखिलेश यादव ने कहा कि किसी भी धर्म की आस्था के साथ खिलवाड़ करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति दूसरे धर्मों और उनकी आस्थाओं का सम्मान नहीं करता, वह सनातन धर्म की मूल भावना को नहीं समझता।सपा प्रमुख ने कहा कि सच्चा हिंदू कभी दूसरे व्यक्ति या उसके धर्म का अपमान नहीं करता। उनके मुताबिक भारतीय समाज की विशेषता उसकी विविधता और अलग-अलग आस्थाओं के साथ मिलकर रहने की परंपरा रही है।अखिलेश यादव के बयान को आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की राजनीतिक पृष्ठभूमि से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, सहारनपुर में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से जुड़े प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं पर संबंधित पक्षों के अपने-अपने दावे हैं।

शिक्षक सम्मान समारोह में पहुंचे थे अखिलेश
अखिलेश यादव लखनऊ पब्लिक स्कूल्स एंड कॉलेजेस में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों को समाज और आने वाली पीढ़ी का मार्गदर्शक बताया।उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल बच्चों को किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व और भविष्य को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अखिलेश ने शिक्षकों को समाज का रक्षक बताते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ी को बेहतर दिशा देने में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
26 हजार प्राथमिक स्कूलों का किया दावा
कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में करीब 26 हजार प्राथमिक स्कूल बंद हो गए हैं।सपा प्रमुख ने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी की सरकार सत्ता में आती है तो इन स्कूलों को दोबारा खोलने का काम किया जाएगा। उन्होंने सरकारी स्कूलों की स्थिति और बच्चों को मिलने वाली शिक्षा को लेकर भी चिंता जताई।अखिलेश ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किए बिना प्रदेश के भविष्य को बेहतर नहीं बनाया जा सकता। उनके मुताबिक स्कूलों में पर्याप्त सुविधाएं, शिक्षक और बेहतर वातावरण उपलब्ध होना जरूरी है।
‘शिक्षकों को सिर्फ पढ़ाने का काम दिया जाएगा’
अखिलेश यादव ने शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि शिक्षक का मूल काम बच्चों को पढ़ाना और उनका भविष्य तैयार करना है।उन्होंने कहा कि अगर शिक्षक को शिक्षा के अलावा लगातार दूसरे कामों में लगाया जाएगा तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा। अखिलेश ने दावा किया कि उनकी सरकार बनने पर शिक्षकों को पढ़ाने के अलावा दूसरे कार्यों में नहीं लगाया जाएगा, ताकि वे पूरी तरह शिक्षा व्यवस्था पर ध्यान दे सकें।
जर्जर स्कूलों की फोटो बनाने पर मुकदमे का आरोप
सपा प्रमुख ने सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को लेकर भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जर्जर स्कूलों की फोटो या वीडियो बनाने पर भी मुकदमे दर्ज किए जाते हैं।अखिलेश यादव ने कहा कि स्कूलों की कमियों को सामने लाना अपराध नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि अगर किसी स्कूल की इमारत जर्जर है या वहां बच्चों को परेशानी हो रही है तो सरकार को समस्या दूर करने पर ध्यान देना चाहिए।उन्होंने इस मुद्दे को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता से जोड़ते हुए सरकार से सवाल किए।
राम मंदिर चंदे को लेकर भी भाजपा पर हमला
अखिलेश यादव ने राम मंदिर से जुड़े चंदे को लेकर भी भाजपा पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर के नाम पर जुटाए गए धन को लेकर सवाल उठने के बाद इसे सांप्रदायिक मुद्दे की ओर मोड़ने की कोशिश की जा रही है।सपा अध्यक्ष ने भाजपा के पुराने राजनीतिक दौर का जिक्र करते हुए पार्टी की कथित धर्मनिरपेक्ष छवि पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पहले भाजपा विभिन्न समुदायों के लोगों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करती थी।हालांकि राम मंदिर चंदे को लेकर अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक दावे हैं और खबर में इन्हें उसी रूप में देखा जाना चाहिए।
लखनऊ की ‘लाल बिल्डिंग’ का भी जिक्र
अखिलेश यादव ने लखनऊ की ‘लाल बिल्डिंग’ का जिक्र करते हुए भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि इस परियोजना को लेकर पहले से ही भ्रष्टाचार की चर्चाएं होती रही हैं।उन्होंने अधिकारियों की तैनाती और कथित अनियमितताओं को लेकर भी सवाल उठाए। अखिलेश ने तंज कसते हुए आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी गोरखपुर की कार्यशैली को लखनऊ लेकर आए हैं। उन्होंने इसे ‘गोरखधंधा’ बताते हुए सरकार पर हमला बोला।
लैपटॉप योजना को बताया युवाओं के लिए अहम
कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी सरकार के समय विद्यार्थियों को बांटे गए लैपटॉप का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज भी कई विद्यार्थी बताते हैं कि लैपटॉप ने उनकी पढ़ाई में मदद की और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर मिले।अखिलेश के मुताबिक तकनीक को शिक्षा से जोड़ना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने से उनकी पढ़ाई और भविष्य की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं।उन्होंने शिक्षा और तकनीक से जुड़े अपनी सरकार के कार्यों को गिनाते हुए मौजूदा सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए।
‘शिक्षक ही बच्चों का भविष्य बनाते हैं’
अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में बार-बार शिक्षकों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज को दिशा देते हैं और आने वाली पीढ़ी का निर्माण करते हैं।सपा प्रमुख के बयान में एक तरफ सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण को लेकर धार्मिक सौहार्द का मुद्दा प्रमुख रहा, तो दूसरी तरफ शिक्षा, स्कूलों और शिक्षकों की समस्याओं को लेकर उन्होंने सरकार पर हमला बोला।उनके बयान ऐसे समय में आए हैं जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और सभी प्रमुख दल चुनावी तैयारियों में जुटे हैं। ऐसे में अखिलेश यादव का यह संबोधन धार्मिक सौहार्द, शिक्षा व्यवस्था और सरकार की नीतियों पर केंद्रित रहा।अब देखना होगा कि सहारनपुर मस्जिद मामले और शिक्षा व्यवस्था को लेकर अखिलेश यादव के इन बयानों पर भाजपा और सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
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