बाढ़ से सौर ऊर्जा की बैटरियां खराब, सोहगीबरवा-शिकारपुर-धरमपुर में छाया अंधेरा

Editorial
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महराजगंज जिले के सोहगीबरवा, शिकारपुर और धरमपुर ग्राम सभा क्षेत्र में बाढ़ के बाद ग्रामीणों के सामने बिजली और रोशनी की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। बाढ़ के पानी से गांवों में लगी सौर ऊर्जा व्यवस्था की बैटरियां बड़े पैमाने पर खराब होने की बात सामने आई है। स्थानीय स्तर पर करीब 90 प्रतिशत सौर ऊर्जा बैटरियों के खराब होने का दावा किया गया है। इसके चलते कई ग्रामीण परिवारों के घरों में अंधेरा छाया हुआ है और रात के समय लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।ग्रामीणों की इस समस्या को लेकर वरिष्ठ भाजपा नेता कुशीनगर-महराजगंज एवं क्षेत्र के निवासी रामसहाय दुबे ने जिला अधिकारी महराजगंज को लिखित निवेदन देकर खराब सौर ऊर्जा बैटरियों की मरम्मत कराने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में जल्द आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है, ताकि बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों को रोशनी की सुविधा दोबारा मिल सके।

बाढ़ के बाद सौर ऊर्जा व्यवस्था प्रभावित

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में सौर ऊर्जा आधारित उपकरण ग्रामीणों के लिए काफी उपयोगी साबित होते हैं। लेकिन सोहगीबरवा, शिकारपुर और धरमपुर ग्राम सभा में बाढ़ के कारण सौर ऊर्जा की बैटरियों को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है। आवेदन में बताया गया है कि लगभग 90 प्रतिशत बैटरियां खराब हो चुकी हैं।बैटरियों के खराब होने के कारण सौर ऊर्जा से संचालित होने वाली रोशनी की व्यवस्था प्रभावित हो गई है। ग्रामीणों के घरों में शाम होते ही अंधेरा छाने लगता है। इससे खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के दौरान पहले ही आवागमन, पेयजल, साफ-सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर चुनौतियां बढ़ जाती हैं। ऐसे में घरों में रोशनी की व्यवस्था खराब होने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

राम सहाय दुबे (वरिष्ट भाजपा नेता ,महाराजगंज)
राम सहाय दुबे (वरिष्ट भाजपा नेता ,महाराजगंज)

डीएम से बैटरियों की मरम्मत कराने की मांग

इस समस्या को लेकर रामसहाय दुबे ने जिला अधिकारी, महराजगंज को पत्र भेजकर खराब सौर ऊर्जा बैटरियों की मरम्मत कराने का अनुरोध किया है। आवेदन में उन्होंने बताया कि बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में बैटरियां खराब हो गई हैं और ग्रामीणों को अंधेरे में रहना पड़ रहा है।उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि संबंधित विभाग के अधिकारियों को मौके पर भेजकर सौर ऊर्जा उपकरणों की स्थिति का जायजा कराया जाए। साथ ही खराब बैटरियों की तकनीकी जांच कराकर उनकी मरम्मत या आवश्यकता पड़ने पर उन्हें बदलने की व्यवस्था की जाए।

बाढ़ से सौर ऊर्जा की बैटरियां खराब
बाढ़ से सौर ऊर्जा की बैटरियां खराब

ग्रामीणों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद

बाढ़ के बाद प्रभावित गांवों में प्रशासन की ओर से राहत और पुनर्वास से जुड़े कार्य किए जाते हैं। ग्रामीणों की मांग है कि सौर ऊर्जा व्यवस्था को भी प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त कराया जाए। उनका कहना है कि रोशनी की सुविधा केवल घरेलू जरूरत नहीं है, बल्कि रात के समय सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।यदि सौर ऊर्जा की बैटरियां जल्द ठीक हो जाती हैं तो ग्रामीण परिवारों को काफी राहत मिल सकती है। खासकर उन इलाकों में जहां नियमित बिजली आपूर्ति प्रभावित है, वहां सौर ऊर्जा व्यवस्था ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण वैकल्पिक साधन बन सकती है।

बाढ़ के बाद बढ़ती हैं ग्रामीणों की चुनौतियां

बाढ़ का असर केवल खेतों और रास्तों तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ता है। घरों में पानी भरने, रास्तों के क्षतिग्रस्त होने और बिजली जैसी सुविधाओं के प्रभावित होने से लोगों की परेशानी बढ़ जाती है।सोहगीबरवा, शिकारपुर और धरमपुर ग्राम सभा में सौर ऊर्जा की बैटरियों के खराब होने की शिकायत भी इसी समस्या से जुड़ी है। ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित अधिकारी गांव में पहुंचकर वास्तविक स्थिति की जांच करें और खराब उपकरणों को जल्द ठीक कराएं।

प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपील

रामसहाय दुबे ने अपने निवेदन में जिला प्रशासन से मानवीय आधार पर मामले को गंभीरता से लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित ग्रामीण पहले से ही कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे में घरों में रोशनी की व्यवस्था बहाल करना आवश्यक है।ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन संबंधित विभाग को निर्देश देकर खराब सौर ऊर्जा बैटरियों की जांच और मरम्मत की प्रक्रिया जल्द शुरू कराएगा। इससे प्रभावित परिवारों को राहत मिलेगी और गांवों में फिर से रोशनी की व्यवस्था सुचारु हो सकेगी।फिलहाल ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। यदि समय रहते खराब बैटरियों की मरम्मत या replacement की व्यवस्था कर दी जाती है, तो बाढ़ प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ के बाद जरूरी सुविधाओं को सामान्य करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि ग्रामीणों को लंबे समय तक अंधेरे और असुविधा का सामना न करना पड़े।

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