लखनऊ में सुरक्षा एजेंसियों ने एक कथित आतंकी साजिश का पर्दाफाश करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (UP ATS) ने राजधानी में पुलिस या सेना के किसी जवान को निशाना बनाने की योजना के आरोप में तीन युवकों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक नाबालिग को पुलिस निगरानी में लिया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, संदिग्धों का संपर्क पाकिस्तान में बैठे एक हैंडलर से था, जिसने उन्हें लखनऊ में वारदात को अंजाम देने का कथित टास्क दिया था। आरोपियों के पास से एक विदेशी पिस्टल और 20 कारतूस बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।एटीएस की इस कार्रवाई के बाद राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था और पाकिस्तान से संचालित बताए जा रहे नेटवर्क की गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने लखनऊ पहुंचने के बाद रेलवे स्टेशन का वीडियो बनाकर अपने कथित हैंडलर को भेजा था। वारदात को अंजाम देने और उसका वीडियो भेजने के बदले उन्हें तीन लाख रुपये देने का वादा किया गया था। हालांकि, मामले में सामने आए सभी आरोपों की जांच अभी जारी है।
- पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर लखनऊ पहुंचे थे आरोपी
- अमृतसर से दिल्ली होते हुए 29 अक्टूबर की रात पहुंचे लखनऊ
- तीन लाख रुपये देने का था कथित लालच
- विदेशी पिस्टल और 20 कारतूस बरामद
- सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में थे संदिग्ध
- एटीएस करेगी नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान
- लखनऊ की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाने की जरूरत

पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर लखनऊ पहुंचे थे आरोपी
यूपी एटीएस के मुताबिक, एजेंसी को खुफिया इनपुट मिला था कि पंजाब के कुछ युवक प्रतिबंधित शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े लोगों के संपर्क में हैं। आशंका जताई गई थी कि ये लोग देश में किसी पुलिस या सैन्य प्रतिष्ठान को निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं। सूचना मिलने के बाद एटीएस ने संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी और जांच आगे बढ़ाई।जांच में कथित तौर पर सामने आया कि मुख्य आरोपी गगनदीप सिंह अपने साथियों के साथ पाकिस्तान में बैठे राना भाई के संपर्क में था। बताया गया है कि राना भाई प्रतिबंधित शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़ा सक्रिय सदस्य है। उसी के निर्देश पर आरोपियों को लखनऊ भेजे जाने की बात सामने आई है।एटीएस के अनुसार, आरोपियों को पुलिस या सेना के किसी जवान की टारगेट किलिंग करने और घटना का वीडियो बनाकर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर को भेजने का निर्देश दिया गया था। एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि कथित साजिश में नेटवर्क के अन्य लोगों की क्या भूमिका थी और इसके पीछे कौन-कौन सक्रिय था।
अमृतसर से दिल्ली होते हुए 29 अक्टूबर की रात पहुंचे लखनऊ
आरोपी 27 अक्टूबर को पंजाब के अमृतसर से लखनऊ के लिए रवाना हुए थे। वे दिल्ली होते हुए 29 अक्टूबर की रात करीब 12 बजे राजधानी पहुंचे। एटीएस का दावा है कि इस दौरान वे सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से कथित पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में बने हुए थे।लखनऊ पहुंचने के बाद आरोपियों ने रेलवे स्टेशन का वीडियो बनाया और उसे राना भाई को भेज दिया। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह वीडियो उनके लखनऊ पहुंचने की जानकारी देने के लिए भेजा गया था। मोबाइल फोन की शुरुआती जांच में संदिग्ध चैट, वीडियो और कुछ ऐसे डिजिटल साक्ष्य मिलने की बात कही गई है, जिनकी पड़ताल की जा रही है।एटीएस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने शहर में किन अन्य स्थानों की जानकारी जुटाई थी और क्या किसी संवेदनशील प्रतिष्ठान से जुड़ी जानकारी भी कथित हैंडलर तक पहुंचाई गई थी। जांच एजेंसी के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि रेलवे स्टेशन का वीडियो भेजने के पीछे क्या उद्देश्य था और इस पूरी गतिविधि में स्थानीय स्तर पर किसने मदद की।
तीन लाख रुपये देने का था कथित लालच
इस मामले में सबसे गंभीर पहलू आरोपियों को दिया गया कथित आर्थिक लालच है। एटीएस के मुताबिक, टारगेट किलिंग को अंजाम देने और उसका वीडियो भेजने के बदले आरोपियों को तीन लाख रुपये देने का वादा किया गया था।जांच में यह भी सामने आया है कि लखनऊ पहुंचने के लिए कथित हैंडलर की ओर से आरोपियों को यात्रा खर्च भेजा गया था। इसके अलावा शहर में रहने और अन्य खर्चों के लिए भी रकम भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। एजेंसी अब इन लेन-देन की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पैसे कहां से भेजे गए और इस नेटवर्क को आर्थिक मदद देने में अन्य कौन लोग शामिल हो सकते हैं।एटीएस के अनुसार, आरोपियों को कथित वारदात के बाद नेपाल की ओर भागने के लिए भी कहा गया था। जांच एजेंसी इस पहलू की भी पड़ताल कर रही है कि आरोपियों की आगे की गतिविधियों और कथित फरार होने की योजना में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी।
विदेशी पिस्टल और 20 कारतूस बरामद
यूपी एटीएस ने कार्रवाई के दौरान तीन युवकों को गिरफ्तार किया और एक नाबालिग को पुलिस निगरानी में लिया। आरोपियों की पहचान गगनदीप सिंह, रजत कुमार और कृष्ण के रूप में बताई गई है। तीनों पंजाब के निवासी हैं। चौथा संदिग्ध नाबालिग है, इसलिए उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।एजेंसी ने आरोपियों के कब्जे से एक विदेशी पिस्टल और 20 कारतूस बरामद किए हैं। शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि उन्हें हथियार लखनऊ में नेटवर्क से जुड़े एक स्थानीय संपर्क के माध्यम से उपलब्ध कराए गए थे। एटीएस अब उस व्यक्ति की पहचान करने में जुटी है, जिसने कथित रूप से हथियार और कारतूस उपलब्ध कराए थे।जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हथियारों की आपूर्ति का नेटवर्क कहां तक फैला है और क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं। बरामद डिजिटल सामग्री और वित्तीय लेन-देन की जांच से साजिश की पूरी कड़ी जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में थे संदिग्ध
एटीएस के मुताबिक, आरोपी कथित पाकिस्तानी हैंडलर से इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप के माध्यम से संपर्क में थे। जांच के दौरान उनके मोबाइल फोन से कुछ संदिग्ध बातचीत और वीडियो मिलने की बात कही गई है। एजेंसी ने कुछ व्हाट्सऐप खातों के वर्चुअल नंबरों के जरिए सक्रिय होने का दावा भी किया है।अब इन डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपियों का संपर्क किन-किन लोगों से था। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस नेटवर्क ने पहले भी किसी अन्य स्थान पर इसी तरह की गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश की थी।एटीएस के सामने सबसे बड़ी चुनौती कथित हैंडलर तक पहुंचने, स्थानीय संपर्कों की पहचान करने और पूरे नेटवर्क के वित्तीय तथा डिजिटल संबंधों का पता लगाने की है।
एटीएस करेगी नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान
अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के मुताबिक, खुफिया सूचना के आधार पर एटीएस ने कार्रवाई की और संदिग्धों को गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि आरोपियों से आगे पूछताछ की जाएगी। एजेंसी पुलिस कस्टडी रिमांड लेने की तैयारी में है, ताकि कथित साजिश, हथियारों की आपूर्ति, वित्तीय मदद और अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।मामले में एटीएस थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, आर्म्स एक्ट और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जानकारी दी गई है। आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा।
लखनऊ की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाने की जरूरत
यूपी एटीएस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए युवाओं को कथित आपराधिक नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश किस तरह की जा रही है। जांच एजेंसियों के सामने अब यह पता लगाने की जिम्मेदारी है कि इस कथित साजिश का दायरा कितना बड़ा था और क्या इसके पीछे कोई व्यापक नेटवर्क काम कर रहा था।फिलहाल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और एक नाबालिग को निगरानी में लिए जाने के बाद जांच आगे बढ़ रही है। बरामद हथियार, मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्य और कथित वित्तीय लेन-देन की पड़ताल से मामले में नए खुलासे होने की संभावना है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
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