“पेट दर्द ने खोला हैरान करने वाला राज, 7 साल की बच्ची के शरीर में मिलीं चार-चार किडनी!”

Editorial
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वाराणसी सात साल की मासूम बच्ची… शरीर में चार आधी-आधी किडनी। सुनने में यह किसी मेडिकल रहस्य या विज्ञान की किसी दुर्लभ कहानी जैसा लगता है, लेकिन यह हकीकत है। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर की रहने वाली एक सात वर्षीय बच्ची पिछले कई वर्षों से एक ऐसी जन्मजात शारीरिक संरचना के साथ जीवन जी रही है, जिसे देखकर अनुभवी डॉक्टर भी हैरान हैं। बच्ची के शरीर में सामान्य दो किडनी की जगह चार आधी-आधी किडनी मौजूद हैं और इनसे निकलने वाली चार अलग-अलग नलियां उसकी तकलीफ का कारण बनी हुई हैं। यह अनोखा मामला तब सामने आया जब करीब दो वर्ष पहले बच्ची को अचानक पेट और कमर में असहनीय दर्द होने लगा। इसके साथ ही उसे पेशाब से जुड़ी गंभीर समस्याएं भी होने लगीं। परिजन उसे इलाज के लिए गोरखपुर लेकर पहुंचे, जहां अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन जैसी जांचों के बाद डॉक्टरों ने जो बताया, उसे सुनकर परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि बच्ची के शरीर में चार आधी-आधी किडनी मौजूद हैं और उनसे चार अलग-अलग यूरिन नलियां निकल रही हैं।

डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति बेहद दुर्लभ है। सामान्य तौर पर हर व्यक्ति के शरीर में दो किडनी होती हैं और प्रत्येक किडनी से एक-एक नली निकलती है, जो मूत्राशय तक पहुंचती है। लेकिन इस बच्ची के मामले में किडनी का विकास गर्भावस्था के दौरान सामान्य तरीके से नहीं हो पाया। परिणामस्वरूप दोनों किडनी दो-दो हिस्सों में विभाजित हो गईं और उनसे अलग-अलग नलियां विकसित हो गईं। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को “डुप्लेक्स किडनी” कहा जाता है। वर्तमान में बच्ची लखनऊ के पीजीआई में भर्ती है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर उसकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। राहत की बात यह है कि उसकी सभी किडनियां फिलहाल सामान्य रूप से काम कर रही हैं। हालांकि, किडनी की दो नलियों के आपस में असामान्य तरीके से जुड़े होने के कारण उसे बार-बार यूरिन संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से एक नली को काटकर दूसरी से जोड़ा जाएगा, जिससे मूत्र प्रवाह सामान्य हो सकेगा और बच्ची की समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी।

इस पूरी घटना ने जहां डॉक्टरों को चिकित्सा की दृष्टि से चुनौती दी है, वहीं बच्ची के पिता के जीवन की दिशा भी बदल दी है। बेटी की बीमारी की जानकारी मिलने के बाद वे गहरे सदमे में चले गए थे। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय इस विषय को समझने और शोध करने का निर्णय लिया। अब वे किडनी रोगों पर ज्योतिषीय दृष्टिकोण से अध्ययन कर रहे हैं। उनका शोध विषय “ज्योतिषशास्त्रदृष्टया वृक्करोगस्य प्रायोगिकमध्ययनम” है, जिसका अर्थ है—गुर्दे की बीमारियों का ज्योतिषीय दृष्टिकोण से व्यावहारिक अध्ययन।

बेटी की बीमारी को समझने के लिए उन्होंने विभिन्न अस्पतालों से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे बच्चों का डेटा जुटाना शुरू कर दिया है। उनका दावा है कि पीजीआई में ही ऐसे कई बच्चे भर्ती हैं, जिनकी एक किडनी है या जिनकी किडनी का विकास सामान्य नहीं हुआ। कुछ बच्चों की दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं, जबकि कुछ को जन्म से ही किडनी संबंधी गंभीर विकृतियां हैं।आईएमएस बीएचयू के यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर समीर त्रिवेदी के अनुसार यह एक जन्मजात विकार है। उन्होंने बताया कि गर्भ में शिशु के विकास के दौरान किडनी की संरचना पूरी तरह विकसित नहीं हो पाती और जो हिस्सा मिलकर एक अंग बनना चाहिए, वह अलग-अलग हिस्सों में विकसित हो जाता है। कई मामलों में किडनी अपनी सामान्य स्थिति से हटकर शरीर के दूसरे हिस्से में भी पहुंच जाती है। बच्ची के मामले में किडनी दो-दो हिस्सों में विभाजित हो गई है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में डुप्लेक्स किडनी कहा जाता है।विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी के लक्षणों में बार-बार बुखार आना, यूरिन इन्फेक्शन होना, पेट या कमर में दर्द रहना, पेशाब करने में परेशानी होना और गंभीर मामलों में बच्चों के शारीरिक विकास पर असर पड़ना शामिल है। हालांकि कई मरीजों में यह बीमारी लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के भी रह सकती है और किसी अन्य जांच के दौरान इसका पता चलता है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि डुप्लेक्स किडनी से कोई परेशानी नहीं हो रही हो तो केवल नियमित निगरानी पर्याप्त होती है। लेकिन संक्रमण, दर्द या मूत्र प्रवाह में रुकावट जैसी जटिलताएं पैदा होने पर दवाओं और जरूरत पड़ने पर सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है। इस बच्ची के मामले में भी रोबोटिक सर्जरी को सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प माना जा रहा है। एक तरफ चिकित्सा विज्ञान के लिए यह मामला अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय बन गया है, तो दूसरी ओर सात साल की यह मासूम अपनी बीमारी से अनजान सामान्य बच्चों की तरह जीवन जीने की कोशिश कर रही है। परिवार को उम्मीद है कि सफल सर्जरी के बाद उनकी बेटी एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकेगी। फिलहाल डॉक्टरों की टीम इस दुर्लभ मेडिकल रहस्य को सुलझाने और बच्ची को नई जिंदगी देने की तैयारी में जुटी हुई है।

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