
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के आरोपों को लेकर अयोध्या में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब यह मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। गुरुवार को इस विवाद ने नया मोड़ तब ले लिया, जब 500 से अधिक अधिवक्ता सड़कों पर उतर आए और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव समेत अन्य जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया।फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालका प्रसाद मिश्रा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अधिवक्ता राम जन्मभूमि थाने की ओर कूच कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के मामले में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। हालांकि पुलिस ने अधिवक्ताओं को रास्ते में ही रोक लिया और स्थिति को नियंत्रित किया।

थाने में दी गई शिकायत, एफआईआर की मांग पर अड़े वकील
प्रदर्शन के बाद अधिवक्ताओं ने राम जन्मभूमि थाने में लिखित शिकायत सौंपते हुए चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव और ट्रस्ट के अन्य जिम्मेदार सदस्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। बार एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र कुमार जायसवाल ने बताया कि शिकायत की पावती उन्हें मिल चुकी है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती है तो हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।पुलिस के अनुसार अधिवक्ताओं की तहरीर को दोपहर करीब 1:30 बजे जनरल डायरी (जीडी) में दर्ज कर लिया गया है और नियमानुसार मामले की जांच की जा रही है।
‘एफआईआर से कम कुछ मंजूर नहीं’
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ता सत्य प्रकाश मौर्य ने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या, जो कभी पूरे देश के लिए आस्था और मर्यादा का प्रतीक थी, आज भ्रष्टाचार के आरोपों से घिर गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर की व्यवस्था में ऐसे लोग शामिल हो गए हैं जिन्होंने श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।उन्होंने मांग की कि वर्तमान ट्रस्ट को भंग कर नई समिति का गठन किया जाए ताकि मंदिर की व्यवस्था पारदर्शी और जवाबदेह बन सके।
ट्रस्ट के भीतर भी खुलकर सामने आई फूट
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास महाराज ने पहली बार सार्वजनिक रूप से ट्रस्ट के सहायक प्रशासक गोपाल राव पर गंभीर आरोप लगाए।महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि पूरे विवाद के लिए गोपाल राव जिम्मेदार हैं। उनका आरोप है कि गोपाल राव मंदिर की परंपराओं का पालन करने के बजाय राजनीति कर रहे हैं और जानबूझकर मामलों को उलझा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के ट्रस्टी भगवान श्रीराम की परंपराओं का सम्मान करते हैं, लेकिन गोपाल राव का रवैया अलग है, जिससे ट्रस्ट की छवि प्रभावित हो रही है।महंत ने यह भी कहा कि मंदिर प्रशासन में अनावश्यक राजनीतिक माहौल बनाया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था को नुकसान पहुंच रहा है।
राजनीति भी हुई तेज, विपक्ष हमलावर
राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। विपक्ष लगातार सरकार और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे अनावश्यक रूप से तूल दिए जाने की बात कह रहा है।इस बीच उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन में जिन लोगों ने अपना जीवन समर्पित किया, उनमें चंपत राय जैसे कई सम्मानित लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को इस विवाद से सबसे अधिक पीड़ा हुई है।हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी ने चोरी या कोई गलत काम किया है तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई जरूर होगी। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

क्या है पूरा विवाद?
राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे को लेकर कथित गड़बड़ियों के आरोप सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया। आरोप है कि मंदिर में प्राप्त चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताएं हुई हैं। इसी को लेकर पहले ट्रस्ट के भीतर सवाल उठे और अब मामला अधिवक्ताओं के प्रदर्शन तथा एफआईआर की मांग तक पहुंच गया है।फिलहाल पुलिस शिकायत की जांच कर रही है। दूसरी ओर ट्रस्ट के भीतर भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। ऐसे में यह मामला केवल कानूनी जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश के सबसे बड़े धार्मिक संस्थानों में से एक की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस जांच के बाद क्या एफआईआर दर्ज होती है या नहीं, और यदि होती है तो यह विवाद आगे किस दिशा में बढ़ता है। राम मंदिर जैसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े विषय में उठे इन आरोपों ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
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