दोहा दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को झकझोर देने वाली एक बेहद गंभीर घटना सामने आई है। कतर से भारत के गुजरात स्थित दहेज एलएनजी टर्मिनल के लिए रवाना हुए विशाल एलएनजी टैंकर ‘अल-रकियात’ पर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास संदिग्ध ड्रोन से हमला किए जाने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। राहत की बात यह रही कि इस हमले में किसी के घायल होने या जहाज को बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन इस घटना ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत सरकार की ओर से इस घटना पर आधिकारिक बयान का अभी इंतजार किया जा रहा है।जानकारी के मुताबिक एलएनजी से पूरी तरह भरा यह विशाल टैंकर कतर के रास लफ्फान बंदरगाह से गुजरात के दहेज के लिए रवाना हुआ था। 7 जुलाई को जब जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते हुए अरब सागर और ओमान की खाड़ी के मिलन बिंदु के पास पहुंचा, तभी उस पर संदिग्ध ड्रोन से हमला किया गया। यह इलाका दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

घटना के बाद कतर सरकार ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए ईरान के उप-राजदूत को तत्काल विदेश मंत्रालय तलब किया और इस हमले के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। कतर ने साफ शब्दों में कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से गुजर रहे एक वाणिज्यिक एलएनजी टैंकर को निशाना बनाना न केवल अस्वीकार्य है बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय नौवहन सुरक्षा कानून का गंभीर उल्लंघन भी है। कतर ने इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताया।कतर के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इस तरह की घटनाएं पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकती हैं। मंत्रालय के प्रोटोकॉल विभाग के निदेशक इब्राहिम बिन यूसुफ ने कतर में तैनात ईरान के उप-राजदूत मोहसेन मोहम्मद घनेई को बुलाकर विरोध पत्र सौंपा। इस पत्र में ईरान से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा गया और क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाली किसी भी गतिविधि को तुरंत रोकने की मांग की गई।

कतर ने अपने विरोध पत्र में यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में चल रहे वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। यदि ऐसी घटनाएं लगातार होती रहीं तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है और कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। कतर ने ईरान से यह सुनिश्चित करने को कहा कि भविष्य में ऐसी कोई घटना दोबारा न हो तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समुद्री सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन किया जाए।कतर ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी राष्ट्रीय संपत्तियों, जहाजों और ऊर्जा हितों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उपलब्ध सभी वैधानिक अधिकारों का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र है। हालांकि फिलहाल कतर ने किसी सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं की है, लेकिन उसके बयान से साफ संकेत मिलते हैं कि वह इस मामले को बेहद गंभीरता से देख रहा है।

इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हमला जिस जहाज पर हुआ, वह भारत के लिए एलएनजी लेकर आ रहा था। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित प्राकृतिक गैस से पूरा करता है और कतर लंबे समय से भारत का प्रमुख एलएनजी आपूर्तिकर्ता रहा है। ऐसे में यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है या समुद्री मार्ग बाधित होता है तो इसका सीधा असर भारत सहित कई एशियाई देशों की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।होर्मुज जलडमरूमध्य रणनीतिक दृष्टि से दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से होकर गुजरती है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में होने वाली हर सुरक्षा घटना पर दुनिया भर की सरकारें, ऊर्जा कंपनियां और अंतरराष्ट्रीय बाजार नजर बनाए रखते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के हमले बढ़ते हैं तो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां सुरक्षा लागत बढ़ा सकती हैं, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।

फिलहाल इस हमले की जिम्मेदारी किसी संगठन या देश ने नहीं ली है और हमले की स्वतंत्र पुष्टि तथा विस्तृत जांच जारी है। कतर ने ईरान से तत्काल जवाब मांगा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन चूंकि जहाज भारत के लिए एलएनजी लेकर आ रहा था, इसलिए नई दिल्ली की प्रतिक्रिया पर भी सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।फिलहाल राहत की बात यह है कि जहाज पर सवार चालक दल सुरक्षित बताया जा रहा है और किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। इसके बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य में हुआ यह हमला एक बार फिर इस बात का संकेत है कि मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले की जांच और संबंधित देशों की प्रतिक्रिया तय करेगी कि यह घटना केवल एक सुरक्षा उल्लंघन बनकर रह जाती है या फिर क्षेत्रीय तनाव को एक नए स्तर तक पहुंचा देती है।
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